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Chandil Wild Elephant : झुंड से बिछड़ा हाथी जंगल से निकलकर पहुंच गया धान के खेतों में, किसानों की बढ़ी परेशानी

खेत में आहार की तलाश में घूमते हुए हाथी ने कई जगह धान के पौधों को पैरों से कुचल दिया। इससे खेत में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचा है

by Rakesh Pandey
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चांडिल : चांडिल के जंगल से निकलकर एक जंगली हाथी शुक्रवार सुबह अचानक धान के खेतों के बीच पहुंच गया। हाथी को खेतों में घूमता देख रसूनिया और बाना गांव के आसपास रहने वाले ग्रामीणों के बीच डर का माहौल बन गया। जंगल से निकलकर खेतों में पहुंचने के बाद यह हाथी धान की फसल खाने लगा। उसने खेत के कई हिस्सों में फसल को पैरों तले रौंद दिया। धान की फसल तैयार होने के समय हुई इस घटना से किसानों की चिंता बढ़ गई है।

सुबह बाना गांव के लोगों की पड़ी नजर

ग्रामीणों के अनुसार, शुक्रवार की सुबह बाना गांव के जंगल से सटे खेतों में लोगों की नजर एक जंगली हाथी पर पड़ी। बताया गया कि हाथी अपने झुंड से अलग होकर जंगल से निकलकर खेतों की ओर आ गया था। कुछ देर बाद वह धान की फसल वाले खेत में पहुंच गया और फसल खाने लगा। खेत में आहार की तलाश में घूमते हुए हाथी ने कई जगह धान के पौधों को पैरों से कुचल दिया। इससे खेत में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचा है। धान की फसल तैयार होने के दौर में हाथी के खेत में पहुंचने से किसानों के सामने फसल बचाने की चिंता खड़ी हो गई है।

ग्रामीणों में बढ़ा डर, आसपास के गांवों में भी सतर्कता

खेतों में जंगली हाथी के पहुंचने की सूचना आसपास के गांवों में फैलते ही ग्रामीण सतर्क हो गए। लोग हाथी के करीब जाने से बचते हुए दूरी बनाकर उसकी गतिविधियों पर नजर रखते रहे। जंगल से सटे इलाकों में हाथियों की आवाजाही ग्रामीणों के लिए पहले से ही चिंता का विषय बनी हुई है।

ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के खेतों में आने से हर वर्ष फसलों को नुकसान पहुंचने की स्थिति बनती है। खासकर धान की फसल तैयार होने के समय हाथियों की मौजूदगी किसानों के लिए परेशानी बढ़ा देती है। फसल के नुकसान के साथ ग्रामीणों को अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर भी सतर्क रहना पड़ता है।

धान की फसल को पहुंचा नुकसान

जंगली हाथी के खेतों में पहुंचने से धान की फसल के कई हिस्से प्रभावित हुए हैं। हाथी ने कुछ फसल खाई, जबकि खेत में घूमने के दौरान कई जगह धान के पौधे रौंद दिए। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि हाथी दोबारा खेतों की ओर आता है तो फसल को और नुकसान हो सकता है। इसके साथ ही अचानक हाथी के सामने आने की स्थिति में ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर भी खतरा बना रहता है। यही वजह है कि हाथी की गतिविधियों को लेकर आसपास के लोग लगातार सतर्क हैं।

वन विभाग से निगरानी बढ़ाने की मांग

हाथी के खेतों में पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग से रसूनिया, बाना और आसपास के गांवों में निगरानी बढ़ाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि झुंड से अलग हुए हाथी की गतिविधियों पर नजर रखी जाए और उसे सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर भेजने की व्यवस्था की जाए। ग्रामीणों ने हाथियों के विचरण वाले इलाकों में विभागीय गश्त बढ़ाने की भी मांग की है। उनका कहना है कि जंगल से सटे गांवों में समय रहते निगरानी बढ़ाने से हाथियों के खेतों और आबादी वाले इलाकों में पहुंचने की स्थिति में ग्रामीणों को सतर्क किया जा सकता है।

फसल नुकसान का आकलन कर मुआवजा देने की मांग

किसानों ने जंगली हाथी के कारण धान की फसल को हुए नुकसान का आकलन कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रभावित किसानों को नियम के अनुसार मुआवजा मिलना चाहिए, ताकि हाथियों के कारण हुए फसल नुकसान से उन्हें राहत मिल सके।

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