
रांची: झारखंड पुलिस के लिए असीम मंडल लंबे समय से बड़ा सिरदर्द बना हुआ था। उस पर एक करोड़ रुपये का भारी इनाम था। अब यह खूंखार नक्सली कमांडर पुलिस की गिरफ्त में है। उसे पश्चिम बंगाल से दबोचा गया है। इसके बाद झारखंड पुलिस पूरी तरह से एक्शन में आ गई है। पुलिस की तैयारी अब उसे कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की है। इसके लिए कानूनी प्रक्रिया बहुत तेज कर दी गई है।
अदालत में मामले का जल्द ट्रायल पूरा कराने की कोशिश हो रही है। असीम मंडल कोई छोटा अपराधी नहीं है। उसने कई बड़ी और खौफनाक वारदातों को अंजाम दिया है। आईजी अभियान नरेंद्र सिंह के अनुसार उस पर कई गंभीर मामले दर्ज हैं। वह हत्या और हिंसक घटनाओं में सीधे तौर पर शामिल रहा है। उसका निशाना अक्सर बड़े नेता और पुलिस वाले होते थे। सांसद से लेकर जवानों तक की हत्या की साजिश उसने रची थी। इनमें सबसे बड़ा मामला जमशेदपुर के सांसद सुनील महतो की हत्या का है। इसके अलावा ग्यारह जवानों की शहादत में भी उसका ही हाथ बताया जाता है।
सांसद को निशाना बना बरसाई थीं अंधाधुंध गोलियां
तारीख थी चार मार्च दो हजार सात। पूर्वी सिंहभूम के बाकुरिया गांव में एक फुटबॉल मैच चल रहा था। वहां बतौर मुख्य अतिथि सांसद सुनील महतो पहुंचे थे। गांव वालों ने उनका बहुत ही शानदार स्वागत किया था। हर तरफ खुशी का माहौल था। लेकिन यह खुशी अचानक मातम में बदल गई। हथियारबंद नक्सली वहां आ धमके। उन्होंने अचानक अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। इस दर्दनाक हमले में सांसद सुनील महतो की मौके पर ही जान चली गई। उनके दो सुरक्षाकर्मी और एक झामुमो नेता भी मारे गए। इस घटना ने पूरे राज्य को भीतर तक दहला दिया था।
पुलिस अब सिर्फ गिरफ्तारी पर रुकने वाली नहीं है। पुरानी फाइलों को फिर से खोला जा रहा है। जिन मामलों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है वहां स्पीडी ट्रायल चलेगा। पुलिस के पास असीम को सजा दिलाने का एक और बड़ा हथियार है। यह हथियार हैं उसके पुराने साथी। असीम के दस्ते के कई नक्सली पहले ही पकड़े जा चुके हैं। कई नक्सलियों ने पुलिस के सामने सरेंडर भी किया है। अब यही लोग अदालत में सरकारी गवाह बन सकते हैं। सुनील महतो और जवानों की हत्या के मामले में इनकी गवाही बहुत काम आएगी।
सांसद हत्याकांड में पहले भी हो चुकी हैं बड़ी गिरफ्तारियां
सांसद हत्याकांड में पहले भी कई बड़ी गिरफ्तारियां हुई हैं। राहुल उर्फ रंजीत पाल ने अपनी पत्नी के साथ साल दो हजार सत्रह में पश्चिम बंगाल में सरेंडर किया था। शकुंतला महतो उर्फ पुष्पा पर भी दस लाख का इनाम था। उसने इसी साल जून दो हजार छब्बीस में हथियार डाल दिए। वहीं रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन ने भी हाल ही में सितंबर दो हजार छब्बीस में सरेंडर किया है। इनके अलावा राजेंद्र मुंडा और जयंती जैसे नक्सली पहले ही पकड़े जा चुके हैं। इन सभी से पुलिस को काफी अहम राज पता चले हैं जिससे इस नेटवर्क की कमर टूट गई है।
असीम मंडल माओवादी संगठन का बहुत बड़ा दिमाग माना जाता था। प्रशांत बोस उर्फ बेसरा के बाद वही संगठन का मुख्य रणनीतिकार बचा था। उस पर अकेले पचपन हिंसक मामले दर्ज हैं। झारखंड सरकार ने उस पर एक करोड़ का इनाम रखा था। वहीं ओडिशा सरकार ने भी एक करोड़ बीस लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। अब पुलिस उससे लगातार कड़ी पूछताछ कर रही है। उसके पकड़े जाने से माओवादियों का बहुत बड़ा नेटवर्क टूट गया है। पुलिस हर एक सबूत जुटाकर उसे उसके अंजाम तक पहुंचाने की पूरी तैयारी में है।

