
जमशेदपुर : ‘जेका बाघ का करेजा देके ऊपर वाला भेजा…’ और ‘ठोक देंगे कट्टा कपार में…’ जैसे जुबान पर चढ़ जाने वाले चर्चित और विवादित गीत आखिर किसने रचे? आखिर किन परिस्थितियों में लिखे गए ये बेबाक और लोकप्रिय गीत? अगर आपके मन में भी उठ रहे हैं ये सवाल, तो आपको मिलने वाला है इसका सही जवाब!
इन सभी प्रश्नों के उत्तर और तीखे-मीठे संवादों की महफिल सजने जा रही है झारखंड के सबसे बड़े साहित्यिक महाकुंभ ‘छाप-3.0’ में। साहित्य कला फाउंडेशन की ओर से आयोजित इस दो दिवसीय महाकुंभ का तीसरा संस्करण आगामी 9 और 10 अक्टूबर को बिष्टुपुर के होटल एल्कोर में भव्य रूप से आयोजित होने जा रहा है।
दिग्गजों का होगा संगम
09 अक्टूबर को सुबह 10 बजे उद्घाटन सत्र के साथ शुरू होने वाले इस आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. के. वनजा तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में ख्यात कहानीकार पंकज मित्र और जाने-माने आलोचक राकेश बिहारी अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। अध्यक्षता पूर्व सूचना आयुक्त बैजनाथ मिश्रा करेंगे।
दूसरे दिन गूंजेंगे चर्चित गीत और जुटेंगे देश के नामचीन हस्ताक्षर
कार्यक्रम के दूसरे दिन लोकप्रिय गीतों के सिरमौर गीतकार डॉ. सागर विशेष रूप से मौजूद रहेंगे, जो अपने इन सुपरहिट गीतों के पीछे की पूरी दास्तान साझा करेंगे।
इस बार का आयोजन कई मायनों में खास है, क्योंकि इसमें देश के प्रतिष्ठित रचनाकारों की किताबों पर खुलकर चर्चा होगी। इस फेहरिस्त में झारखंड के सूचना आयुक्त अनुज कुमार सिन्हा, युगल जोशी, प्रशांत आनंद, प्रमोद कुमार सिंह, सत्य व्यास, विमल चंद्र पांडेय, विनीता अस्थाना, कविता, खालिद जावेद, पंकज दुबे के साथ-साथ जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार और लेखक मनोज राजन त्रिपाठी भी शामिल हैं।
खास आकर्षण : पत्रकार व लेखक मनोज राजन त्रिपाठी की मौजूदगी
भारतीय मीडिया जगत में लगभग तीन दशकों का लंबा और शानदार अनुभव रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार मनोज राजन त्रिपाठी आज सिर्फ खबरों की दुनिया का ही नहीं, बल्कि साहित्य और लेखन का भी एक मजबूत हस्ताक्षर हैं। इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया के बड़े संस्थानों में शीर्ष पदों पर काम करने के साथ-साथ उनका पहला उपन्यास ‘कोड काकोरी’ खासी चर्चा में रहा और आते ही बेस्टसेलर बन गया। इनकी दूसरी किताब ‘कसारी मसारी’ भी बेहद चर्चित हिंदी उपन्यास है, जो उत्तर प्रदेश के माफिया अतीक अहमद और उसके भाई की पुलिस हिरासत में हुई हत्या की सच्ची घटनाओं पर आधारित है। पत्रकारिता के तीखे अनुभवों और सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को अपनी रचनाओं में पिरोने वाले मनोज राजन त्रिपाठी का इस महाकुंभ में होना साहित्य प्रेमियों के लिए वैचारिक रूप से बेहद समृद्ध अनुभव रहेगा।
साहित्य, समाज और तकनीक पर मंथन
पुस्तक-आधारित सत्रों के अलावा इस महाकुंभ में वर्तमान दौर के ज्वलंत मुद्दों पर भी विद्वान चर्चा करेंगे। इनमें प्रमुख विषय हैं:
* आदिवासी साहित्य में स्त्री
* एआई (AI) युग में खबरें और विश्वसनीयता का संकट
* सूचना क्रांति के दौर में सूचना के अधिकार (RTI) की प्रासंगिकता
इन सत्रों में पद्मश्री डॉ. दमयंती बेसरा, झारखंड के राज्य सूचना आयुक्त अनुज कुमार सिन्हा और निर्मला पुतुल मुर्मू जैसे दिग्गज विचारक अपने विचार रखेंगे।
मंच की अन्य रंगारंग प्रस्तुतियां
* हिमांशु बाजपेई की दमदार किस्सागोई
* भूपेंद्र सिंह खिड़िया की अनूठी तबला पोयट्री
* राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त पहली संताली फिल्म ‘आँगेन’ की विशेष स्क्रीनिंग
विगत वर्षों में पुष्पेश पंत, उदय प्रकाश, महुआ माजी, जेरी पिन्टो जैसे विश्वप्रसिद्ध रचनाकारों की मौजूदगी से झारखंड के युवाओं और महाविद्यालय के विद्यार्थियों में जो साहित्यिक अलख जगी थी, इस वर्ष ‘छाप-3.0’ उसे और भी ऊंचे पायदान पर ले जाने के लिए तैयार है। साहित्य कला फाउंडेशन ने राज्य के सभी साहित्य प्रेमियों से इस ऐतिहासिक महाकुंभ में उत्साहपूर्वक शामिल होने की अपील की है।

