
रांची : ग्रामीण विकास मंत्रालय ने ‘विकसित भारत–रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 के तहत स्वीकार्य कार्यों की नई अनुसूची अधिसूचित कर दी है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में अब 375 तरह के कार्य कराये जा सकेंगे। यह संख्या पिछली व्यवस्था के 266 स्वीकार्य कार्यों की तुलना में करीब 41 प्रतिशत अधिक है। नई सूची में रोजगार देने के साथ गांवों में जल सुरक्षा, बुनियादी ढांचा, आजीविका और आपदा से निपटने की क्षमता विकसित करने पर जोर दिया गया है।
नई कार्य-सूची को चार प्रमुख श्रेणियों में बांटा गया है। इनमें जल सुरक्षा के 128, मुख्य ग्रामीण बुनियादी ढांचे के 111, आजीविका से जुड़े बुनियादी ढांचे के 98 और आपदा तैयारी से संबंधित 38 कार्य शामिल हैं। मंत्रालय के अनुसार, अब मजदूरी रोजगार को टिकाऊ ग्रामीण परिसंपत्तियों और विकास के परिणामों से जोड़ने की कोशिश की गयी है।
जल सुरक्षा को सबसे ज्यादा महत्व
128 कार्यों के साथ जल सुरक्षा को सबसे बड़ा हिस्सा मिला है। इसमें चेक डैम, गली प्लग, भूमिगत बांध, रिचार्ज शाफ्ट, इंजेक्शन कुएं और नदियों, छोटी नदियों व नालों के पुनरुद्धार जैसे कार्य शामिल हैं। जलभराव वाली भूमि का सुधार और खेतों में जल-वितरण चैनलों का जीर्णोद्धार भी कराया जा सकेगा। ड्रिप सिंचाई, फव्वारा सिंचाई, छतों पर वर्षा जल संचयन और टांकों के साथ बर्फ-स्तूप तथा कृत्रिम हिमनद जैसे उपाय भी सूची में शामिल किये गये हैं।
गांवों में पुस्तकालय से स्वास्थ्य केंद्र तक
मुख्य ग्रामीण बुनियादी ढांचे के तहत 111 कार्य रखे गये हैं। इनमें सौर स्ट्रीट लाइट, अपशिष्ट से संपदा रीसाइक्लिंग संयंत्र, ग्रे-वॉटर उपचार इकाइयां, कचरा पृथक्करण शेड, ग्रामीण पुस्तकालय, पशु चिकित्सा एवं ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र, कॉमन सर्विस सेंटर और बहुउद्देशीय युवा केंद्र शामिल हैं। स्कूलों में अतिरिक्त कमरे और प्रयोगशालाओं के निर्माण के अलावा ग्रामीण पार्क, पैदल पथ और सामुदायिक सुविधाओं के विकास का भी प्रावधान है।
खेती से प्रसंस्करण और बाजार तक
आजीविका से जुड़े बुनियादी ढांचे के लिए 98 कार्य रखे गये हैं। इनमें कृषि प्रसंस्करण, ग्रेडिंग-पैकेजिंग, शीत भंडारण, मिनी आटा मिल, कृषि बाजार परिसर, डेयरी, मशरूम शेड, रेशम उत्पादन, पॉली-हाउस और जलीय कृषि से जुड़े कार्य शामिल हैं। स्वयं सहायता समूहों के लिए कार्यशाला, शी मार्ट, संघ भवन और प्रशिक्षण-सह-कौशल विकास केंद्र भी बनाये जा सकेंगे।
बाढ़, सूखा और जंगल की आग से बचाव
पहली बार आपदा तैयारी और चरम मौसम के लिए अलग श्रेणी बनायी गयी है। इसमें 38 कार्य हैं। बाढ़ राहत आश्रय, सुरक्षा दीवार, तटबंध सुदृढ़ीकरण, बाढ़ सुरक्षा, आपदा के बाद ग्रामीण सड़कों व सामुदायिक परिसंपत्तियों की बहाली तथा जंगल की आग से बचाव के लिए फायर लाइन और ईंधन-बफर क्षेत्र बनाने का प्रावधान है।
कृषि और संबद्ध गतिविधियों के 181 कार्य, कमजोर परिवारों के लिए 107, महिलाओं के लिए 36 और युवाओं के लिए 36 कार्य भी शामिल किये गये हैं। कार्यों का चयन विकसित ग्राम पंचायत योजना के जरिये स्थानीय जरूरतों के आधार पर होगा और ग्राम सभा से अनुमोदन लिया जायेगा। डिजिटल निगरानी के लिए ‘विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण बुनियादी ढांचा स्टैक’ का इस्तेमाल होगा। इससे रोजगार के साथ टिकाऊ परिसंपत्तियों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर रहेगा।

