
Jamshedpur : डीजल जेनरेटर (डीजी सेट) से होने वाले वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने सख्त रुख अपनाया है। पर्षद ने टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) समेत जमशेदपुर के 12 प्रमुख औद्योगिक, चिकित्सा और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सभी संबंधित संस्थानों को नोटिस मिलने की तारीख से छह महीने यानी 180 दिनों के भीतर प्रदूषण नियंत्रण के आवश्यक उपाय करने का निर्देश दिया गया है। निर्धारित समय सीमा में निर्देशों का पालन नहीं करने पर प्रतिदिन 7,500 रुपये से लेकर 25,000 रुपये तक पर्यावरणीय मुआवजा लगाया जा सकता है।
12 प्रमुख संस्थान कार्रवाई के दायरे में
प्रदूषण नियंत्रण पर्षद की कार्रवाई के दायरे में टाटा स्टील, टीआरएफ, टाटा पिगमेंट, एसटीपी लिमिटेड, शिवा प्लास्टिक, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और टाटा मोटर्स शामिल हैं। इसके अलावा टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच), टाटा मोटर्स अस्पताल, टिनप्लेट अस्पताल, होटल साउथ पार्क और मिथिला मोटर्स को भी नोटिस जारी किया गया है।
पर्षद ने संबंधित संस्थानों को उनके डीजल जेनरेटर की क्षमता के अनुरूप रेट्रोफिट उत्सर्जन नियंत्रण उपकरण (आरइसीडी) लगाने और प्रदूषण कम करने के लिए अन्य उपयुक्त तकनीक अपनाने का निर्देश दिया है। इसके लिए छह महीने की समय सीमा तय की गयी है।
नियमों का उल्लंघन करने पर लगेगा पर्यावरणीय मुआवजा
सूचना का अधिकार (आरटीआइ) के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार, निर्धारित अवधि में प्रदूषण नियंत्रण संबंधी निर्देशों का पालन नहीं करने पर संबंधित संस्थानों को आर्थिक दंड का सामना करना पड़ सकता है। जेनरेटर की क्षमता और नियमों के उल्लंघन की स्थिति के आधार पर प्रतिदिन 7,500 रुपये, 15,000 रुपये या 25,000 रुपये तक पर्यावरणीय मुआवजा वसूला जा सकता है।
डीजल जेनरेटर का धुआं स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा
बिजली आपूर्ति बाधित होने पर इस्तेमाल किए जाने वाले डीजल जेनरेटर वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में शामिल हैं। इनसे निकलने वाले उत्सर्जन में पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे सूक्ष्म कणों के साथ नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसें भी मौजूद हो सकती हैं। इनके संपर्क में आने से सांस संबंधी समस्याओं और अस्थमा का खतरा बढ़ सकता है। बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर इसका विशेष रूप से प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है।
आरटीआइ के बाद उठा मामला
इस मामले को झारखंड मानवाधिकार सम्मेलन (जेएचआरसी) ने आरटीआइ के तहत प्राप्त जानकारी के आधार पर उठाया था। इसके बाद झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने संबंधित संस्थानों को नोटिस जारी कर प्रदूषण नियंत्रण के उपाय करने का निर्देश दिया। अब इन संस्थानों को निर्धारित समय सीमा के भीतर आवश्यक कदम उठाने होंगे, अन्यथा उन्हें प्रतिदिन के हिसाब से पर्यावरणीय मुआवजा देना पड़ सकता है।

