
रांची : समुद्र की गहराइयों में बचाव अभियान चलाने और संकट में फंसी पनडुब्बियों तक सहायता पहुंचाने के लिए भारतीय नौसेना को मिले आईएनएस निस्तार के निर्माण में झारखंड के बोकारो का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इस अत्याधुनिक पोत के लिए जरूरी विशेष श्रेणी की इस्पात प्लेटों की आपूर्ति स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड, सेल ने की है। इन प्लेटों के निर्माण और आपूर्ति में बोकारो इस्पात संयंत्र के साथ भिलाई इस्पात संयंत्र ने भी भूमिका निभाई।
आईएनएस निस्तार केवल एक नौसैनिक पोत नहीं है, बल्कि समुद्र में विशेष बचाव और गोताखोरी अभियानों के लिए तैयार की गई भारतीय नौसेना की महत्वपूर्ण क्षमता है। इसे स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित किया गया है। पोत के निर्माण में देश के बड़े सार्वजनिक उपक्रमों से लेकर 120 से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों की भागीदारी रही है।
आईएनएस निस्तार में इस्तेमाल हुआ बोकारो और भिलाई का विशेष इस्पात
समुद्री परिस्थितियों में लंबे समय तक काम करने वाले पोतों के निर्माण के लिए मजबूत और विशेष गुणवत्ता वाले इस्पात की जरूरत होती है। आईएनएस निस्तार के निर्माण में इसी उद्देश्य से सेल की विशेष श्रेणी की स्टील प्लेटों का उपयोग किया गया।
सेल ने पोत निर्माण के लिए आवश्यक सभी विशेष श्रेणी की प्लेटों की आपूर्ति की। बोकारो और भिलाई इस्पात संयंत्रों के योगदान से तैयार इस इस्पात का इस्तेमाल देश की रक्षा जरूरतों से जुड़े एक महत्वपूर्ण नौसैनिक पोत में किया गया है।
इससे रक्षा क्षेत्र के लिए घरेलू स्तर पर इस्पात उत्पादन और आपूर्ति की क्षमता भी सामने आई है। भारतीय नौसेना के लिए तैयार होने वाले ऐसे विशेष पोतों में स्वदेशी इस्पात का उपयोग आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण को मजबूती देता है।
118 मीटर लंबा है भारतीय नौसेना का आईएनएस निस्तार
आईएनएस निस्तार का निर्माण विशाखापत्तनम स्थित हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड ने किया है। पोत की लंबाई करीब 118 मीटर है और इसका वजन लगभग 10 हजार टन है।
इस पोत को मुख्य रूप से समुद्र की गहराई में गोताखोरी और बचाव अभियानों के लिए तैयार किया गया है। आईएनएस निस्तार 300 मीटर की गहराई तक गोताखोरी से जुड़े अभियान संचालित करने की क्षमता रखता है।
पोत में लगाए गए विशेष उपकरण समुद्र में गहराई तक बचाव कार्यों में सहायता कर सकते हैं। उपलब्ध सुविधाओं के माध्यम से एक हजार मीटर की गहराई तक चलने वाले बचाव अभियानों में सहयोग मिलने की क्षमता है।
पनडुब्बी बचाव अभियान में भी निभाएगा महत्वपूर्ण भूमिका
भारतीय नौसेना के इस डाइविंग सपोर्ट पोत को समुद्र में विशेष परिस्थितियों में सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार किया गया है। इसका उपयोग गोताखोरों को सहयोग देने के साथ पनडुब्बियों से जुड़े बचाव अभियानों में भी किया जा सकता है।
समुद्र में किसी आपात स्थिति के दौरान गहराई तक पहुंचकर अभियान चलाने की क्षमता आईएनएस निस्तार को भारतीय नौसेना के महत्वपूर्ण पोतों में शामिल करती है। इसके निर्माण में इस्तेमाल हुई विशेष इस्पात प्लेटें पोत की संरचना और मजबूती के लिए अहम हैं।
18 जुलाई 2025 को नौसेना में शामिल हुआ था आईएनएस निस्तार
आईएनएस निस्तार को 18 जुलाई 2025 को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था। इसके निर्माण की प्रक्रिया में 120 से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों ने योगदान दिया।
हिंदुस्तान शिपयार्ड में तैयार इस पोत में सेल की भागीदारी ने रक्षा क्षेत्र में सार्वजनिक उपक्रमों और भारतीय उद्योग की भूमिका को भी रेखांकित किया है। बोकारो और भिलाई इस्पात संयंत्रों से विशेष इस्पात की आपूर्ति इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही।
रक्षा निर्माण में बढ़ रही भारतीय इस्पात उद्योग की भागीदारी
आईएनएस निस्तार के निर्माण में सेल के विशेष इस्पात का इस्तेमाल रक्षा और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में भारतीय इस्पात उद्योग की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है। नौसेना के लिए आवश्यक विशेष पोतों के निर्माण में घरेलू संसाधनों का उपयोग स्वदेशी रक्षा उत्पादन की दिशा में महत्वपूर्ण है।

