रांची: झारखंड के चुनावी माहौल में एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला है। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के प्रत्याशी अकील अख्तर उर्फ रिजवान क्रांतिकारी ने नामांकन वापस लेने के ठीक एक दिन पहले झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) का हाथ थाम लिया। इस निर्णय से JLKM के प्रमुख जयराम महतो को गहरा झटका लगा है।
हेमंत सोरेन की उपस्थिति में झामुमो में शामिल हुए रिजवान क्रांतिकारी
झारखंड मुक्ति मोर्चा ने सोशल मीडिया पर अपने नए सदस्य का स्वागत करते हुए एक पोस्ट में बताया कि अकील अख्तर उर्फ रिजवान क्रांतिकारी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व और झामुमो के सिद्धांतों पर विश्वास जताते हुए पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। उनके साथ कई समर्थकों ने भी झामुमो का साथ देने का निर्णय लिया।
महागठबंधन सरकार के कार्यों पर जताया भरोसा
झामुमो के अनुसार, अकील अख्तर ने महागठबंधन सरकार द्वारा किए गए जनहित के कार्यों पर भरोसा जताते हुए पार्टी में शामिल होने का निर्णय लिया है। उनका मानना है कि झारखंड की जनता के हित में जो कार्य इस सरकार द्वारा किए गए हैं, वे राज्य के विकास के लिए जरूरी हैं।

