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Bihar Election Politics : विधानसभा चुनाव को लेकर मिथिलांचल पर सियासत तेज

by Anand Mishra
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सेंट्रल डेस्क : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियों के बीच मिथिलांचल क्षेत्र राजनीतिक हलचलों का केंद्र बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 24 अप्रैल को झंझारपुर में रैली करके एनडीए के चुनावी अभियान की शुरुआत करेंगे, जिससे इस क्षेत्र की राजनीतिक अहमियत और बढ़ गई है।​

मिथिलांचल, जिसे ‘पग-पग पोखरी माछ मखान, मधुर बोली मुख में पान’ जैसी लोक कथाओं से जाना जाता है, बिहार के सात जिलों मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी और सहरसा में फैला हुआ है। इन जिलों में कुल 60 विधानसभा सीटें हैं, जो राज्य की कुल सीटों का लगभग 25 प्रतिशत हैं।​

इस क्षेत्र की राजनीति में पहले लालू यादव की पार्टी आरजेडी का दबदबा था, लेकिन 2005 के बाद से नीतीश कुमार की अगुवाई वाले एनडीए ने यहां मजबूत पकड़ बनाई। 2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए ने मिथिलांचल की 60 में से 40 से अधिक सीटें जीतीं।​

एनडीए की रणनीति, विकास और पहचान का समावेश

बीजेपी और जेडीयू ने मिथिलांचल में विकास कार्यों को प्राथमिकता दी है। दरभंगा में एयरपोर्ट की शुरुआत, एम्स की स्थापना, मखाना को जीआई टैग, मैथिली भाषा में संविधान की प्रति का प्रकाशन और मखाना बोर्ड का गठन जैसे कदम उठाए गए हैं। इन प्रयासों से क्षेत्रीय पहचान को बढ़ावा मिला है।​

आरजेडी की मिथिलांचल राज्य की मांग

विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी ने मिथिलांचल को अलग राज्य बनाने की मांग उठाकर राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। उन्होंने कहा कि मैथिली भाषा को सम्मान देने के साथ-साथ मिथिला राज्य की आवश्यकता है। यह मांग आरजेडी की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य बीजेपी की बढ़ती प्रभाव को चुनौती देना है।​

सीमांचल पर भी नजरें

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव सीमांचल क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए महिला केंद्रित योजनाओं की घोषणा कर रहे हैं। ‘माई बहिन मान योजना’ के तहत प्रत्येक महिला को 2,500 रुपये प्रति माह देने का वादा किया गया है। इससे महिला मतदाताओं को आकर्षित करने की कोशिश की जा रही है।​

मिथिलांचल की राजनीति में उथल-पुथल

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मिथिलांचल क्षेत्र की राजनीति अब केवल विकास तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह पहचान, संस्कृति और भावनाओं से जुड़ी हुई है। एनडीए और आरजेडी दोनों ही इस क्षेत्र में अपनी सियासी जमीन मजबूत करने के लिए विभिन्न रणनीतियाँ अपना रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी चुनावों में मिथिलांचल की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।​

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