पटना : बिहार सरकार ने विधानमंडल के दोनों सदनों, विधानसभा और विधान परिषद, में पार्टियों के सचेतकों को ‘राज्य मंत्री’ का दर्जा प्रदान किया है। यह निर्णय राज्यपाल की सहमति के बाद लागू किया गया। बुधवार को बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने इस संदर्भ में संशोधित नियमों से संबंधित राजपत्र को विधानसभा में प्रस्तुत किया।
मुख्य सचेतक पहले से उठा रहे कैबिनेट सुविधाओं का लाभ
राजपत्र में स्पष्ट किया गया है कि दोनों सदनों के सचेतकों को अब राज्य मंत्री के बराबर वेतन, भत्ते और अन्य सुविधाएं मिलेंगी। इसके अतिरिक्त, पार्टियों के मुख्य सचेतक पहले से ही राज्य में कैबिनेट मंत्रियों की सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं। यह कदम पार्टियों के सचेतकों को उनकी जिम्मेदारियों के प्रति और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से लिया गया है।
विधानसभा में अन्य विधेयक भी हुए पारित, विपक्ष ने किया हंगामा
बिहार विधानसभा में दो प्रमुख विधेयक भी ध्वनि मत से पारित किए गए। इसमें बिहार सरकारी परिसर (आवंटन, किराया, वसूली और बेदखली) (संशोधन), 2024 और बिहार खेल विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2024 शामिल है. हालांकि, इन विधेयकों के पारित होने के दौरान विपक्ष ने तीव्र विरोध और हंगामा किया।
वक्फ संशोधन विधेयक पर विपक्ष का विरोध
विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार से वक्फ संशोधन विधेयक को वापस लेने की मांग करते हुए सदन में जोरदार विरोध दर्ज किया। विपक्षी नेताओं ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख न अपनाने का आरोप लगाते हुए सदन से बहिर्गमन कर दिया। भोजनावकाश के बाद की कार्यवाही में भी विपक्ष का हंगामा जारी रहा। विपक्षी सदस्य आसन के समीप पहुंचकर नारेबाजी करते रहे, जिससे सदन की कार्यवाही बाधित हुई।
सरकार का कदम राजनीतिक संतुलन की ओर
विश्लेषकों का मानना है कि बिहार सरकार का यह निर्णय सचेतकों की भूमिका को औपचारिक रूप से मजबूत करने और राजनीतिक संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। यह कदम सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच शक्ति संतुलन के समीकरण को भी प्रभावित कर सकता है।

