बोकारो : झारखंड के बोकारो इस्पात संयंत्र (BSL) में विस्थापित अप्रेंटिस संघ के आंदोलन के कारण प्लांट में गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। इसे लेकर बोकारो इस्पात संयंत्र (Plant) के प्रबंधन ने आंदोलनकारियों से अपील की है कि वे संयंत्र के गेट से जाम हटा लें, क्योंकि संयंत्र की सुरक्षा और संचालन पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। संयंत्र एक थर्मो-सेंसिटिव इकाई है।यहां के गैस पाइपलाइन नेटवर्क का संचालन 24 घंटे कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत होता है। जाम के कारण लगभग 5000 कर्मचारी 18 घंटे से अधिक समय से संयंत्र के अंदर फंसे हुए हैं। उनकी भूख-प्यास और थकान के कारण सुरक्षा मानकों का पालन करना अब मुश्किल हो रहा है।
गैस पाइपलाइन सुरक्षा पर खतरा
संयंत्र प्रबंधन के अनुसार, ब्लास्ट फर्नेस, कोक ओवन, सिंटर प्लांट, स्टील मेल्टिंग शॉप और हॉट स्ट्रिप मिल जैसी प्रमुख उत्पादन इकाइयां बीती रात से बंद हैं। इन इकाइयों के ठप होने से न केवल उत्पादन प्रभावित हुआ है, बल्कि अब तक करोड़ों रुपये का नुकसान भी हो चुका है। इन इकाइयों में कोक ओवन गैस, ब्लास्ट फर्नेस गैस, सिंटर गैस और अन्य औद्योगिक गैसों का उपयोग होता है, और इन गैसों का प्रवाह बाधित होने से पाइपलाइनों में दबाव असंतुलन, रिसाव या विस्फोट जैसी घटनाएं हो सकती हैं। इससे न केवल संयंत्र, बल्कि पूरे शहर की सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है।
संयंत्र प्रबंधन की चिंता
संयंत्र प्रबंधन के सूत्रों का कहना है कि संयंत्र के कर्मी सुरक्षा प्रोटोकॉल बनाए रखने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन लंबे समय तक भूख, थकान और नींद की कमी के कारण यह स्थिति संभालना मुश्किल हो सकता है। यदि स्थिति जल्द सामान्य नहीं होती, तो इससे गंभीर सुरक्षा घटनाएं हो सकती हैं, जो न केवल संयंत्र बल्कि पूरे शहर के लिए खतरे का कारण बन सकती हैं।
जनहित में संयम बरतने की अपील
बोकारो इस्पात संयंत्र के प्रशासन ने आंदोलनकारियों से संयंत्र के गेट से जाम हटाने की अपील करते हुए कहा है कि यह मामला केवल संयंत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे शहर की सुरक्षा से जुड़ा है। संयंत्र प्रबंधन ने सभी पक्षों से संयम बरतने और स्थिति को जल्द सामान्य करने में सहयोग की अपील की है, ताकि किसी भी तरह के नुकसान और खतरे से बचा जा सके।

