रांची : रामकृपाल कंस्ट्रक्शन एक बार फिर विवादों में घिर गई है, जो झारखंड विधानसभा और उच्च न्यायालय जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं के निर्माण में शामिल रही है। इस बार कंपनी पर गंभीर आरोप लगे हैं, जिनमें टेरर फंडिंग और रिश्वत कांड शामिल हैं। हाल ही में सीबीआई ने कंपनी के महाप्रबंधक सुरेश महापात्र और दो अन्य कर्मियों को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। सीबीआई की जांच में और भी राज सामने आ सकते हैं।
आरके कंस्ट्रक्शन (रामकृपाल कंस्ट्रक्शन) को लेकर यह विवाद नए नहीं हैं। पिछले दिनों सीबीआई ने एनएचएआई के क्षेत्रीय कार्यालय पटना के महाप्रबंधक राम प्रीत पासवान को 15 लाख रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। इस रकम का संबंध आरके कंस्ट्रक्शन कंपनी से था और महाप्रबंधक सुरेश महापात्र ने यह राशि दी थी। इसके अलावा, कंपनी के दो अन्य कर्मी बरुण कुमार और चेतन कुमार को भी गिरफ्तार किया गया। सीबीआई ने इस मामले में आरके कंस्ट्रक्शन और एनएचएआई के अधिकारियों पर प्राथमिकी दर्ज की और छापेमारी कर 1.18 करोड़ रुपये भी जब्त किए।
इससे पहले, 21 जनवरी 2018 को गिरिडीह जिले के डुमरी थाना क्षेत्र से आरके कंस्ट्रक्शन के कर्मी मनोज कुमार को 6 लाख रुपये और संदिग्ध दस्तावेजों के साथ गिरफ्तार किया गया था। जांच में पता चला कि यह राशि माओवादियों के नाम पर वसूली गई थी। मनोज कुमार ने स्वीकार किया था कि वह माओवादी रीजनल कमांडर कृष्णा हांसदा के लिए लेवी वसूलता था।
इस मामले में एनआईए ने केस टेकओवर करते हुए 2018 में जांच शुरू की और मनोज कुमार के साथ-साथ माओवादी कमांडर कृष्णा हांसदा को भी आरोपित किया। एनआईए की छापेमारी में यह खुलासा हुआ कि मनोज कुमार का काम माओवादियों और ठेकेदारों के बीच समन्वय करना था और वह ठेकेदारों से लेवी वसूलता था।
एनआईए ने जून 2020 में रामकृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन कंपनी के दफ्तर में भी छापेमारी की थी, जिससे इस पूरे मामले का और खुलासा हुआ।

