
चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन की ओर से एक नई पहल की गई। जिले के विभिन्न विभागों में पदस्थापित सहायकों एवं लिपिकों की कार्य दक्षता, प्रशासनिक समझ, कार्यालयीन अनुशासन तथा सेवा वितरण प्रणाली को और अधिक प्रभावी एवं जनोन्मुखी बनाने के उद्देश्य से कोल्हान विश्वविद्यालय चाईबासा परिसर स्थित ऑडिटोरियम में जिला दण्डाधिकारी सह उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला सह स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया।
बताए गए कार्यालयीन कार्यों के महत्वपूर्ण पहलू, मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण
प्रशिक्षण के दौरान कार्यालयीन कार्यों के विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत एवं व्यवहारिक जानकारी दी गई। इसमें कार्यालय अभिलेखों एवं पंजी का वैज्ञानिक संधारण, कार्यालयीन पत्राचार, नोटशीट एवं मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया, फाइलों का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निष्पादन, ई-ऑफिस प्रणाली में कार्य निष्पादन, समयपालन एवं कार्यालयीन अनुशासन, शासकीय सेवक के आचरण नियम, सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत समयबद्ध एवं तथ्यात्मक जवाब तैयार करना, वित्तीय नियमों का अनुपालन, आरक्षण रोस्टर तैयार करने की प्रक्रिया, स्थापना एवं प्रशस्ति संबंधी कार्य, विधायी कार्यों का निष्पादन, सेवा पुस्तिका संधारण, अभिलेख प्रबंधन तथा शासकीय पत्रों के उचित प्रारूप सहित अनेक विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने विभिन्न विभागों में कार्य करते समय आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों एवं उनके समाधान पर भी विस्तार से चर्चा की।

प्रशिक्षण के साथ स्वास्थ्य का भी रखा गया विशेष ध्यान
जिला प्रशासन द्वारा इस कार्यशाला को केवल प्रशासनिक प्रशिक्षण तक सीमित न रखते हुए कर्मचारियों के स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता दी गई। स्वास्थ्य विभाग एवं आयुष विभाग के संयुक्त तत्वावधान में स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किया गया, जिसमें नेत्र परीक्षण, मधुमेह जांच, रक्तचाप परीक्षण, क्षय रोग स्क्रीनिंग सहित अन्य आवश्यक स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था की गई। आयुष विभाग द्वारा लगाए गए स्टॉल में प्राकृतिक चिकित्सा, योग एवं स्वस्थ जीवनशैली से संबंधित परामर्श भी उपलब्ध कराया गया। बड़ी संख्या में उपस्थित सहायकों एवं लिपिकों ने स्वास्थ्य जांच कराकर चिकित्सकीय सलाह प्राप्त की। प्रशिक्षण के अंतिम चरण में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने अपनी जिज्ञासाएं रखीं तथा विशेषज्ञों द्वारा उनका विस्तृत समाधान किया गया।

प्रशासन की रीढ़ हैं सहायक एवं लिपिक : उपायुक्त
उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली में सहायक एवं लिपिक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। किसी भी सरकारी योजना, जनकल्याणकारी कार्यक्रम, विकास कार्य अथवा प्रशासनिक निर्णय का प्रभावी क्रियान्वयन तभी संभव है, जब कार्यालयीन व्यवस्था सुदृढ़ एवं व्यवस्थित हो। इसके लिए कार्यालयों में कार्यरत सहायकों एवं लिपिकों का प्रशिक्षित, दक्ष, अनुशासित एवं उत्तरदायी होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्रशासनिक कार्यों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। डिजिटलीकरण, ई-गवर्नेंस, समयबद्ध सेवा वितरण तथा पारदर्शिता की बढ़ती अपेक्षाओं के बीच प्रत्येक कर्मचारी को स्वयं को निरंतर अद्यतन रखना होगा। प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल नियमों की जानकारी देना नहीं, बल्कि ऐसी कार्य संस्कृति विकसित करना है, जिसमें समयबद्धता, जवाबदेही, पारदर्शिता और संवेदनशीलता सर्वोच्च प्राथमिकता हो।
गुणवत्तापूर्ण कार्य ला सकता है सकारात्मक परिवर्तन
उपायुक्त ने कहा कि प्रत्येक कर्मचारी को यह महसूस करना चाहिए कि उसकी एक छोटी-सी लापरवाही किसी आम नागरिक को अनावश्यक परेशानी में डाल सकती है, जबकि समय पर किया गया गुणवत्तापूर्ण कार्य किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। उन्होंने सभी सहायकों एवं लिपिकों से अपील की कि वे प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान का उपयोग अपने दैनिक कार्यों में करें तथा कार्यालयों में लंबित मामलों का त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निष्पादन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि “एक स्वस्थ कर्मचारी ही बेहतर प्रशासन दे सकता है।” इसी उद्देश्य से प्रशिक्षण के साथ स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया है, ताकि कर्मचारी अपने स्वास्थ्य के प्रति भी जागरूक रहें और पूर्ण ऊर्जा के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें।
प्रशिक्षण से बढ़ेगी कार्यकुशलता एवं सेवा की गुणवत्ता : उप विकास आयुक्त
उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि आज के समय में सरकारी कार्यालयों से नागरिकों की अपेक्षाएं पहले की तुलना में कहीं अधिक बढ़ गई हैं। ऐसे में प्रत्येक कर्मचारी को नियमों की सही जानकारी, कार्यों में पारदर्शिता, समयबद्धता तथा तकनीकी दक्षता विकसित करनी होगी। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि स्वयं को बेहतर बनाने का अवसर है। इससे प्राप्त ज्ञान का लाभ तभी मिलेगा, जब कर्मचारी उसे अपने दैनिक कार्यों में व्यवहारिक रूप से अपनाएंगे। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से टीम भावना के साथ कार्य करने, समय का सम्मान करने तथा नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर प्रयासरत रहने का आह्वान किया।
प्रशिक्षकों ने साझा किए प्रशासनिक अनुभव
कार्मिक उप सचिव संजय रजक ने कहा कि एक सक्षम सहायक या लिपिक प्रशासनिक व्यवस्था की मजबूत नींव होता है। यदि कार्यालयीन प्रक्रियाओं का सही अनुपालन किया जाए तो अधिकांश प्रशासनिक समस्याओं का स्वतः समाधान हो जाता है। उन्होंने सेवा नियमों, कार्यालय प्रक्रिया तथा अनुशासन के महत्व पर विशेष बल दिया। सहायक राज्य कर पदाधिकारी संतोष कुमार ने वित्तीय अनुशासन, सरकारी अभिलेखों की शुद्धता तथा नियमसम्मत कार्य निष्पादन पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वित्तीय मामलों में छोटी-सी त्रुटि भी गंभीर प्रशासनिक एवं विधिक जटिलताओं का कारण बन सकती है। सेवानिवृत्त प्रशासी पदाधिकारी शशि मिश्रा ने स्थापना एवं सेवा संबंधी प्रकरणों के निष्पादन में नियमों की गहन समझ विकसित करने पर बल दिया। सहायक प्रशासी पदाधिकारी वीरेंद्र यादव ने आरक्षण रोस्टर, सेवा अभिलेख, स्थापना संबंधी प्रक्रियाओं तथा कार्यालयीन पत्रावलियों के वैज्ञानिक संधारण पर विस्तृत जानकारी दी।
उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मियों का हुआ सम्मान
कार्यशाला के समापन अवसर पर विभिन्न विभागों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 63 लिपिकों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त लगभग 300 सहायकों एवं लिपिकों को प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र वितरित किए गए तथा सांकेतिक रूप से 5 कर्मियों को परिचय-पत्र भी प्रदान किए गए। इस अवसर पर सभी पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों ने नशा मुक्त समाज के निर्माण का सामूहिक संकल्प लिया तथा समाज में नशामुक्ति के प्रति जन-जागरूकता फैलाने का भी संकल्प दोहराया। जिला प्रशासन की ओर से सभी प्रतिभागियों को स्मृति स्वरूप विशेष टी-शर्ट भी प्रदान की गई। कार्यक्रम का समापन इस विश्वास के साथ हुआ कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से कर्मचारियों की क्षमता में वृद्धि होगी, कार्यालयीन कार्यों में पारदर्शिता एवं गुणवत्ता आएगी, समयबद्ध सेवा वितरण को और अधिक गति मिलेगी तथा पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन सुशासन, जवाबदेही एवं जनसेवा के अपने लक्ष्य को और अधिक प्रभावी ढंग से प्राप्त कर सकेगा।
पौधारोपण कर दिया गया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
सभी अतिथियों की ओर से कोल्हान विश्वविद्यालय परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया तथा कार्यक्रम की स्मृति में हस्ताक्षर पट्टिका पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर हरित एवं स्वच्छ पर्यावरण के प्रति जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रतीकात्मक रूप से गुब्बारे भी छोड़े गए

