
चांडिल : महीनों की मेहनत के बाद खेतों में तैयार हो रही धान की फसल अब किसानों के लिए चिंता का कारण बन गई है। धान की बालियों में दाने भर चुके हैं और कटाई का इंतजार कर रहे किसानों के सामने जंगली हाथियों का संकट खड़ा हो गया है। कुकड़ू और नीमडीह क्षेत्र में पिछले दो दिनों से हाथियों की लगातार मौजूदगी ने ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है। रात होते ही हाथियों का झुंड खेतों की ओर पहुंच रहा है और धान की तैयार होती फसल को नुकसान पहुंचा रहा है।
हाथी धान की बालियां खाने के साथ खेत में खड़ी फसल को पैरों तले रौंद रहे हैं। इससे किसानों को हाथियों द्वारा खाई गई फसल के अलावा बड़ी मात्रा में रौंदी गई फसल का भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि हाथियों का झुंड इसी तरह खेतों में पहुंचता रहा, तो कटाई से पहले ही काफी फसल बर्बाद हो सकती है।
डेरे गांव में रातभर मंडराता रहा 14 हाथियों का झुंड
कुकड़ू प्रखंड के डेरे गांव में बीती रात से सोमवार सुबह तक करीब 14 जंगली हाथियों का झुंड खेतों के आसपास मौजूद रहा। झुंड के गांव और खेतों के नजदीक पहुंचने की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई। रात के दौरान हाथियों ने खेतों में पहुंचकर धान की बालियां खाईं और कई जगहों पर खड़ी फसल को रौंद दिया।
सुबह जब किसान अपने खेतों की ओर पहुंचे तो उन्हें जगह-जगह हाथियों के पैरों के निशान दिखाई दिए। कई हिस्सों में धान के पौधे जमीन पर दबे मिले। तैयार फसल की इस स्थिति को देखकर किसानों की चिंता और बढ़ गई। किसानों को डर है कि हाथियों की आवाजाही यदि आने वाले दिनों में भी जारी रही, तो खेतों में बची फसल को भी नुकसान पहुंच सकता है।
पकने के करीब धान पर मंडराया जंगली हाथियों का खतरा
इस समय खेतों में धान की बालियां तैयार हो चुकी हैं और उनमें दाने भर गए हैं। किसान फसल पकने और कटाई शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। खेती के इस महत्वपूर्ण चरण में हाथियों की दस्तक ने किसानों की मेहनत पर संकट खड़ा कर दिया है। किसानों के अनुसार, धान की फसल तैयार होने के समय हाथियों का खेतों तक पहुंचना नुकसान की आशंका को बढ़ा रहा है। महीनों तक बीज, खाद, बारिश और खेती की मेहनत के बाद अब फसल से उपज मिलने की उम्मीद थी। लेकिन हाथियों के झुंड के लगातार खेतों में पहुंचने से किसानों की यह उम्मीद प्रभावित हो रही है।
धान खाने के साथ फसल को रौंद रहे हाथी
जंगली हाथियों से खेतों को होने वाला नुकसान केवल धान खाने तक सीमित नहीं है। झुंड खेत में प्रवेश करने के बाद बड़ी संख्या में पौधों को पैरों से कुचल देता है। इससे तैयार फसल का एक बड़ा हिस्सा बर्बाद हो जाता है। किसानों के सामने सबसे बड़ी परेशानी यह है कि धान की कटाई में अभी कुछ समय बाकी है। यदि इस दौरान हाथियों का झुंड बार-बार खेतों में पहुंचता रहा, तो बची हुई फसल की सुरक्षा भी मुश्किल हो सकती है। किसानों का कहना है कि फसल का नुकसान सीधे उनकी सालभर की मेहनत और आमदनी पर असर डालेगा।
हाथियों के डर से ग्रामीणों की बढ़ी परेशानी
कुकड़ू और नीमडीह क्षेत्र में हाथियों की लगातार मौजूदगी से ग्रामीणों में डर का माहौल है। रात के समय खेतों में हाथियों के पहुंचने से किसान अपनी तैयार फसल को लेकर चिंतित हैं। खेतों के आसपास हाथियों की गतिविधि ने धान की कटाई से पहले ही ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है।
डेरे गांव में 14 हाथियों के झुंड की मौजूदगी के बाद किसानों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि धान अब पकने के अंतिम चरण में है। खेतों में खड़ी फसल हाथियों के लिए आसानी से उपलब्ध भोजन बन रही है और झुंड के आने से कम समय में ही काफी नुकसान हो सकता है।
किसानों ने वन विभाग से फसल बचाने की मांग की
हाथियों से परेशान किसानों ने वन विभाग से तत्काल कदम उठाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि फसल के नुकसान के बाद मुआवजा मिलना जरूरी है, लेकिन फिलहाल उनकी प्राथमिकता खेतों में तैयार खड़ी धान की फसल को बचाना है। किसानों ने मांग की है कि वन विभाग हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखे और झुंड को खेतों तथा आबादी वाले इलाकों से दूर सुरक्षित स्थान की ओर ले जाने की व्यवस्था करे। इसके साथ ही प्रभावित खेतों में हुए नुकसान का आकलन कर जल्द मुआवजा देने की मांग भी की गई है।

