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West Singhbhum News : पश्चिमी सिंहभूम में जंगली हाथियों ने मचाया उत्पात, कई घर और फसलें तबाह, ग्रामीणों में दहशत, वन विभाग के खिलाफ आक्रोश

ग्रामीणों ने हाथियों को भगाने के लिए शोर मचाया, मशालें भी जलाईं, लेकिन इसके बावजूद हाथी काफी देर तक गांवों में ही डटे रहे। हाथियों ने कुछ ही घंटों में किसानों की महीनों की मेहनत और पूंजी बर्बाद कर दीं।

by Rajeshwar Pandey
West Singhbhum News (1)
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चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीती रात हाथियों के एक झुंड ने तांतनगर प्रखंड के तीन गांवों गितीकुंदु, बड़ापसेया और चिरूपसेया में जमकर उत्पात मचाया। इस दौरान हाथियों ने कई घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया और खेतों में खड़ी तैयार फसलों को पूरी तरह रौंद डाला। घटना के बाद से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।

देर रात गांव में घुसा झुंड, मशालों का भी नहीं हुआ असर

ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार देर रात हाथियों का झुंड अचानक जंगल से निकलकर रिहायशी इलाके में दाखिल हो गया। झुंड ने सबसे पहले गितीकुंदु गांव में धावा बोलकर दो कच्चे मकानों की दीवारें तोड़ दीं। इसके बाद हाथियों ने बड़ापसेया और चिरूपसेया गांवों का रुख किया, जहां कई घरों के दरवाजे, छप्पर और अनाज के भंडारों को भारी नुकसान पहुंचाया। ग्रामीणों ने हाथियों को भगाने के लिए शोर मचाया और मशालें भी जलाईं, लेकिन इसके बावजूद हाथी काफी देर तक गांवों में ही डटे रहे।

महीनों की मेहनत बर्बाद, किसानों को भारी आर्थिक चोट

घरों के साथ-साथ हाथियों ने किसानों की आजीविका पर भी करारी चोट की है। खेतों में लगी भिंडी, आम और कटहल की फसलों को हाथियों ने पूरी तरह तहस-नहस कर दिया। पीड़ित किसानों का कहना है कि फसलें पूरी तरह तैयार थीं, और वे इन्हें बाजार में बेचने की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन कुछ ही घंटों में उनकी महीनों की मेहनत और पूंजी बर्बाद हो गई। इससे उनके सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

ग्रामीणों ने की बैठक, वन विभाग के खिलाफ फूटा गुस्सा

घटना से आक्रोशित होकर शुक्रवार सुबह तीनों गांवों के लोग एकजुट हुए और एक आपात बैठक की। बैठक में ग्रामीणों ने वन विभाग की ढीली कार्यशैली पर तीखा आक्रोश जताया। लोगों का आरोप है कि बार-बार शिकायत और गुहार लगाने के बाद भी वन विभाग हाथियों को रिहायशी इलाकों में आने से रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है।

ग्रामीणों का बड़ा फैसला

दहशत और असुरक्षा के माहौल को देखते हुए ग्रामीणों ने निर्णय लिया है कि जब तक वन विभाग इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकालता, तब तक वे खुद ही रात-रात भर जागकर गांवों की रखवाली करेंगे।

प्रशासन से उठाई ये मांगें

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और वन विभाग से निम्नलिखित मांगें जल्द से जल्द पूरी करने की अपील की हैं।

* नुकसान का तत्काल उचित मुआवजा दिया जाए।
* हाथियों को खदेड़ने के लिए विशेषज्ञ रेस्क्यू टीम तैनात की जाए।
* हाथियों के प्रवेश को रोकने के लिए गांवों के चारों ओर सौर ऊर्जा संचालित लाइट लगाई जाए।

वन विभाग का पक्ष

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि घटना की सूचना मिलते ही विभाग की एक टीम को प्रभावित गांवों के लिए रवाना कर दिया गया है। हाथियों द्वारा किए गए नुकसान का सही आकलन किया जा रहा है, ताकि पीड़ितों को जल्द से जल्द मुआवजा दिया जा सके। इसके साथ ही हाथियों को दोबारा गांवों की तरफ आने से रोकने और उन्हें गहरे जंगल की ओर खदेड़ने के लिए इलाके में निगरानी बढ़ा दी गई है।

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