
रांची : झारखंड हाई कोर्ट ने सरकारी व्यवस्था की लापरवाही के कारण नुकसान झेल रहे शिक्षकों के हक में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कहा है कि अगर सरकारी लेटलतीफी की वजह से किसी शिक्षक की नियुक्ति देर से हुई है, तो इसमें उसकी कोई गलती नहीं है। ऐसे शिक्षकों को उनके साथ परीक्षा पास करने वाले अन्य शिक्षकों के बराबर ही सीनियरिटी, बढ़ा हुआ वेतनमान और सालाना सैलरी बढ़ोतरी का पूरा लाभ मिलेगा। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि इस आदेश को 12 हफ्तों के अंदर लागू किया जाए।
2016 में निकली थी भर्ती
यह मामला साल 2016 की हाई स्कूल टीजीटी भर्ती (विज्ञापन संख्या-21/2016) से जुड़ा है। इस परीक्षा में पास हुए कई उम्मीदवारों को सरकार ने साल 2019 में ही नौकरी पर रख लिया था। लेकिन पलामू, गढ़वा, हजारीबाग, बोकारो और धनबाद जैसे गैर-अनुसूचित जिलों के कुछ सफल अभ्यर्थियों जैसे अजय कुमार और अन्य को ज्वाइनिंग लेटर देने में सरकार ने 2021 तक का समय लगा दिया।
बिना किसी वजह के 3 साल की इस देरी के कारण ये शिक्षक अपने ही बैच के साथियों से जूनियर हो गए थे, जिससे उन्हें सैलरी और प्रमोशन में नुकसान हो रहा था। हक न मिलने पर इन शिक्षकों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
अधिकारियों ने नियुक्ति पत्र जारी करने में लगा दिए 3 साल
शिक्षकों की तरफ से वकीलों ने अदालत को बताया कि जब भर्ती पर किसी भी कोर्ट की रोक नहीं थी, तब भी अधिकारियों ने नियुक्ति पत्र जारी करने में 3 साल लगा दिए। आखिर अफसरों की लापरवाही की सजा शिक्षक क्यों भुगतें? सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा गया कि प्रशासनिक देरी का नुकसान कर्मचारियों पर नहीं डाला जा सकता।
जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद शिक्षकों की बात को सही माना। कोर्ट ने सरकार की आपत्तियों को खारिज करते हुए आदेश दिया कि इन सभी शिक्षकों को 2019 में बहाल हुए इनके साथियों के समान ही सारे फायदे और सीनियरिटी दी जाए, ताकि इनके साथ पूरा न्याय हो सके।

