
जमशेदपुर : रोजमर्रा की भागदौड़ में अचानक घबराहट, पसीना या सीने में भारीपन होने पर कई लोग इसे थकान अथवा गैस समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन जब ये परेशानियां एक साथ हों और सांस लेने में भी दिक्कत महसूस हो, तो तत्काल सावधान होने की जरूरत है। ऐसे लक्षण दिल से जुड़ी गंभीर समस्या की चेतावनी हो सकते हैं।
जमशेदपुर के जाने-माने फिजिशियन डॉ. बलराम झा के अनुसार, सीने में दबाव के साथ अचानक ठंडा पसीना, बेचैनी या चक्कर आने पर चिकित्सा सहायता लेने में देर नहीं करनी चाहिए। उनके अनुसार, घर पर यह तय करना मुश्किल है कि परेशानी एसिडिटी की है या हृदय से संबंधित किसी आपात स्थिति की।
सिर्फ तेज दर्द ही नहीं, भारीपन भी चेतावनी
हार्ट अटैक में हर मरीज को एक जैसे लक्षण नहीं होते। सीने के बीचोंबीच दबाव, कसाव, जकड़न या भारीपन महसूस होना भी इसका संकेत हो सकता है। परेशानी कुछ मिनट बनी रह सकती है या कम होकर दोबारा लौट सकती है। कभी असहजता एक या दोनों बांहों, कंधे, पीठ, गर्दन अथवा जबड़े तक पहुंचती है। इसके साथ सांस फूलना, मतली और चक्कर भी हो सकते हैं।
उनके अनुसार, दर्द कम होने या बीच में राहत मिलने को खतरा टलने का प्रमाण नहीं मानना चाहिए। अचानक शुरू हुई और सामान्य से अलग तकलीफ की जांच जरूरी है।
खून की आपूर्ति रुकने से होता है नुकसान
हार्ट अटैक तब होता है, जब दिल की मांसपेशियों तक रक्त पहुंचाने वाली धमनी में रुकावट आ जाती है। इससे संबंधित हिस्से को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती और मांसपेशियों को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए समय पर अस्पताल पहुंचना बेहद जरूरी है। उपचार का तरीका मरीज की स्थिति और जांच के नतीजों के आधार पर तय होता है।
हल्के या अलग लक्षणों पर भी रखें ध्यान
कुछ लोगों में सीने की तकलीफ बहुत तेज नहीं होती। सांस फूलना, असामान्य थकान, जी मिचलाना या पीठ और जबड़े में असहजता भी दिखाई दे सकती है। महिलाओं, बुजुर्गों और मधुमेह से पीड़ित लोगों में लक्षण अपेक्षाकृत हल्के या अलग हो सकते हैं। हालांकि महिलाओं में भी सीने का दर्द या असहजता सबसे आम लक्षण है।
इंतजार छोड़ें, तुरंत चिकित्सा सहायता लें
उनके अनुसार, संदिग्ध लक्षण आते ही काम रोककर आराम की स्थिति में बैठना और एम्बुलेंस अथवा आपातकालीन चिकित्सा सहायता बुलाना चाहिए। खुद वाहन चलाकर अस्पताल जाने से बचें। घरेलू नुस्खों या गैस की दवा के असर का इंतजार करके समय न गंवाएं।
अस्पताल में ईसीजी, ट्रोपोनिन जैसे रक्त परीक्षण और चिकित्सकीय जांच से स्थिति का आकलन किया जाता है। जरूरत पड़ने पर जांच दोहराई जा सकती है। शुरुआती ईसीजी सामान्य आने से हर मामले में हार्ट अटैक की आशंका समाप्त नहीं होती। इसलिए जांच रिपोर्ट के साथ लक्षणों का चिकित्सकीय मूल्यांकन भी जरूरी है।

