- झारखंड शिक्षा विभाग ने दो महीने की देरी से शुरू की एडमिशन की प्रक्रिया, इसलिए नामांकन में हो रही देरी
जमशेदपुर : झारखंड के शिक्षा विभाग की लापरवाही का खामियाजा इस बार निजी स्कूलों में राईट टू एजुकेशन के तहत आरक्षित 25 प्रतशित सीटों पर नामांकन लेने वाले बच्चे भुगतेंगे। जहां एक ओर शहर के निजी स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 2025-26 की कक्षाएं शुरू हो गयी हैं, वहीं दूसरी ओर आरक्षित सीटों पर अभी तक बच्चों का दाखिला नहीं हुआ है। ऐसे में जहां सामान्य सीटों पर नामांकन लेने वाले बच्चों की पढ़ाई शुरू हो गई है, वहीं आरक्षिट कोटे की सीटों पर नामांकन के लिए बच्चों के अभिभावक अभी शिक्षा विभाग के चक्कर काट रहे हैं, यह पता करने के लिए कि उनके बच्चे का दाखिला कब होगा। शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, अभी तक आरक्षित कोटे की सीटों पर भरे गए आवेदन पत्रों के स्क्रूटनी की प्रक्रिया चल रही है। अप्रैल में इसे पूरा कर लिया जाएगा। इस तरह आरक्षित कोटे की सीटों पर नामांकन की प्रक्रिया मई में पूरी होगी। इस अवधि तक निजी स्कूलों में दो महीने की क्लास पूरी होने के साथ ही अधिकतर स्कूलों में एक टेस्ट आयोजित होकर ग्रीष्मावकाश हो जाएगा। ऐसे में इस बार निजी स्कूलों के आरक्षित कोटे की सीटों पर नामांकन लेने वाले बच्चों की पढ़ाई दो महीने पिछड़ने वाली है। जबकि राईट टू एजुकेशन एक्ट यह कहता है कि सामान्य व आरक्षित कोटे की सीटों पर नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही एक साथ कक्षाएं शुरू होनी चाहिए।
इसलिए हो रही देरी
आरक्षित श्रेणी की सीटों पर नामांकन में देर की मुख्य वजह एडमिशन प्रक्रिया को शुरू करने में हुई देरी है। जहां निजी स्कूलों ने सामान्य कोटे के लिए अक्टूबर व नवंबर में आवेदन फॉर्म लिया था और दिसंबर में इसकी स्क्रूटनी करके जनवरी में लॉटरी के जरिए बच्चों के नाम की सूची जारी कर एडमिशन ले लिया था। जबकि, आरक्षित कोटे की सीटों के लिए जनवरी में शिक्षा विभाग ने आवेदन लिया। वहीं फरवरी व मार्च में पहले चरण के स्क्रूटनी के तहत डॉक्यूमेंट का वेरिफिकेशन हुआ। वहीं अप्रैल में दूसरे चरण के स्क्रूटनी की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। यू कहें तो शिक्षा विभाग ने दो महीने बाद एडमिशन की प्रक्रिया शुरू की और इसी लिए दो महीने की देरी नामांकन में भी हो रही है।
1552 सिटों के लिए जमा हुए 3000 आवेदन
निजी स्कूलों की बात करें तो यहां राईट टू एजुकेशन के तहत इंट्री कक्षा में आरक्षित कोटे की कुल 1552 सीटें हैं, जिनके लिए 2771 आवेदन जमा हुए हैं। पहले चरण की स्क्रूटनी प्रक्रिया में करीब 200 आवेदन पत्र छांटे गए हैं। शेष बचे हुए आवेदन पत्रों की फिर से स्क्रूटनी होगी। इसमें बच्चों का नाम व अन्य डॉक्यूमेंट का वेरिफिकेशन किया जाएगा। इसके बाद जो आवेदन स्क्रूटनी में सही पाए जाएंगे, उन्हें एडमिशन के लिए स्कूलों को भेजा जाएगा।
शैक्षणिक व मनोवैज्ञानिक दोनों तरह का बच्चों पर पड़ता है प्रभाव
मनोवैज्ञानिक डॉ. दीपक गिरी ने कहा कि स्कूल में दूसरे बच्चों के मुकाबले देर से जाने वाले बच्चों पर इसका बहुत नकारात्मक असर होता है। शुरूआत के कई दिनों तक ऐसे बच्चे डरे सहमे और दूसरे बच्चों से अलग रहते हैं। क्योंकि पहले जाने वाले बच्चों के बीच एक दोस्ताना माहौल बन जाता है। जबकि जो बच्चे बाद में जाते हैं वे अलग-थलग पड़ जाते हैं। इसके अलावा सिलेबस पिछड़ने का दबाव भी उन पर होता है और उन्हें कई दिनों तक विषयों की समझ नहीं हो पाती है। इसका असर बच्चों पर लंबे समय तक रहता है। क्योंकि बच्चे जब शुरू से किसी विषय को पढ़ते हुए आगे बढ़ते हैं, तो उनका कांसेप्ट क्लियर रहता है।
एडमिशन समय पर होना चाहिए। दो महीने देर होने से बच्चों का 20 प्रतिशत सिलेबस पिछड़ जाता है। ये बच्चे गरीब परिवेश से आते हैं ऐसे में उनकी पारिवारिक स्थिति ऐसी नहीं होती है कि वे पिछड़े हुए कोर्स को घर पर बच्चों को पढ़ाकर उसे पूरा करा सकें। इसके साथ ही टेस्ट में शामिल नहीं होने से बच्चों का रिजल्ट भी खराब होता है। इसका असर अगले कई कक्षाओं तक इन बच्चों पर देखने को मिलता है। एक बार पिछड़ने के बाद ये बच्चे पिछे ही रहते हैं।
आरक्षित श्रेणी के सीटों के बारे में
निजी स्कूलों में आरक्षित श्रेणी की कुल सीटें : 1552
कुल आवेदन जमा हुए : 3000
डॉक्यूमेंट फर्जी मिले : अब तक 200
एडमिशन : मई तक संभावित
वर्जन
यह सही है कि इस बार एडमिशन में कुछ देरी हुई है। लेकिन अभी भी हम दूसरे जिलों के मुकाबले आगे हैं। अप्रैल में स्क्रूटनी की प्रक्रिया पूरी कल ली जाएगी। इसे जल्द जल्द पूरा कर आवेदन स्कूलों को भेजा जाएगा, जिसके आधार पर वे दाखिला लेंगे।
- आशीष कुमार पांडेय, डीएसई, पूर्वी सिंहभूम, झारखंड

