नई दिल्ली : दिल्ली में होटल, रेस्टोरेंट, डिस्कोथेक, स्विमिंग पूल जैसे सात तरह के व्यापारों के लाइसेंस अब दिल्ली पुलिस नहीं, बल्कि नगर निगम एमसीडी व एनडीएमसी और अन्य सिविक एजेंसियां जारी करेंगी। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के आदेश के बाद यह बड़ा प्रशासनिक बदलाव लागू कर दिया गया है। जहां वरिष्ठ अधिकारी मानते हैं कि इससे सुरक्षा व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
वहीं दिल्ली पुलिस को इससे बड़ी राहत मिली है। पुलिस को करीब 12,000 सालाना फाइलों और 8,000 से अधिक लंबित मामलों की जिम्मेदारी से मुक्ति मिलेगी, लेकिन अब यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि एमसीडी, एनडीएमसी और अन्य निकाय उसी सख्ती से सुरक्षा प्रक्रिया अपनाएं।
अब पुलिस नहीं देगी इन 7 व्यापारों के लाइसेंस
- होटल / मोटल / गेस्ट हाउस
- ईटिंग हाउस (रेस्टोरेंट, ढाबा, फूड आउटलेट)
- डिस्कोथेक
- स्विमिंग पूल
- वीडियो गेम पार्लर
- अम्यूजमेंट पार्क
- ऑडिटोरियम
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बोले – अब हमारी नजर कम हो जाएगी
दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि हर साल हजारों लाइसेंसिंग फाइलें हमारे पास आती थीं। उनसे बहुत सारी ऐसी गतिविधियां पकड़ में आती थीं जो सतह के नीचे चलती थीं, जैसे ड्रग्स पार्टी, अवैध शराब, सेक्स रैकेट, गैंग मीटिंग्स वगैरह। अब वो जांच का रास्ता खत्म हो गया है। उन्होंने माना कि यह फैसला प्रशासनिक रूप से सही जरूर है, लेकिन इसका सुरक्षा दृष्टि से असर जरूर पड़ेगा।
दिल्ली पुलिस के लिए क्या रहा फायदा?
- हर साल इन सात कैटेगरी में हजारों आवेदन आते थे। सिर्फ ईटिंग हाउस के ही 6–8 हजार आवेदन सालाना होते थे।
- हर फाइल में दस्तावेज, फील्ड वेरिफिकेशन, फायर सेफ्टी, पर्यावरण मंजूरी जैसी लंबी प्रक्रिया होती थी।
- अब यह सारा बोझ एमसीडी और एनडीएमसी को झेलना होगा।
- पुलिस को अब लाइसेंसिंग स्टाफ, फाइल प्रक्रिया और समय की बचत होगी।
- इस बची हुई ताकत को अब पेट्रोलिंग, गश्त और अपराध रोकने में लगाया जा सकेगा।
लेकिन निगरानी कमजोर पड़ी तो…
- कई जगहों पर पुलिस के पास ‘लाइसेंस की जांच’ का बहाना होता था, जिससे अवैध गतिविधियां पकड़ी जाती थीं।
- अब वो मौके नहीं रहेंगे।
- सिविक एजेंसियों के पास न तो खुफिया इनपुट होते हैं, न ही अपराध रोकने की ट्रेनिंग।
क्या फर्क पड़ेगा आम लोगों पर?
- अब व्यापारी वर्ग को एक ही ऑनलाइन पोर्टल से सारे लाइसेंस मिलेंगे। इससे प्रक्रिया आसान होगी।
- लेकिन अगर सुरक्षा के मामले ढीले पड़े तो आम लोग प्रभावित होंगे – खासकर डिस्कोथेक, अम्यूजमेंट पार्क या भीड़ वाले होटल्स में।
- दिल्ली पुलिस की लाइसेंसिंग यूनिट हर साल इन सात व्यापारों के लिए हजारों लाइसेंस जारी करती थी
पिछले 3 साल में क्या तस्वीर रही (अनुमानित) ?
| वर्ष | कुल आवेदन | स्वीकृत | अस्वीकृत | लंबित |
|---|---|---|---|---|
| 2022 | ~12,000 | ~8,500 | ~1,000 | ~2,500 |
| 2023 | ~12,500 | ~9,000 | ~1,100 | ~2,400 |
| 2024 | ~13,000 | ~9,500 | ~1,200 | ~2,300 |
| कुल | ~37,500 | ~27,000 | ~3,300 | ~7,200 |
ट्रेड वार सालाना लाइसेंस (अनुमान)
| ट्रेड | सालाना लाइसेंस (अनुमान) |
|---|---|
| ईटिंग हाउस | 5,500–7,000 |
| होटल/गेस्ट हाउस | 1,800–2,500 |
| डिस्कोथेक | 80–120 |
| स्विमिंग पूल | 100–150 |
| वीडियो गेम पार्लर | 70–100 |
| अम्यूजमेंट पार्क | 20–40 |
| ऑडिटोरियम | 40–60 |
| कुल | 7,610–9,970 |
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह बदलाव उन्हें हर साल करीब 12,000 फाइलों से मुक्ति देगा। इससे उनकी यूनिट कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण पर बेहतर फोकस कर सकेगी।
अब प्रक्रिया कैसी थी और क्या बदलेगा?
पुरानी प्रक्रिया (दिल्ली पुलिस के तहत):
- ऑनलाइन आवेदन: दिल्लीऑनलाइन डॉट एमएचए डॉट जीओवी डॉट इन पोर्टल पर
- दस्तावेज: पहचान पत्र, किरायानामा/स्वामित्व पत्र, एमसीडी से ट्रेड एनओसी, डीएफएस से फायर एनओसी, डीपीसीसी से पर्यावरण मंजूरी
- पुलिस रिपोर्ट: स्थानीय थाना, ट्रैफिक यूनिट, तकनीकी निरीक्षण
- फाइनल अप्रूवल: 30 से 60 दिन में लाइसेंस
अब प्रक्रिया
- लाइसेंसिंग का जिम्मा एमसीडी और एनडीएमसी व अन्य विभागों पर होगा
- एकीकृत ऑनलाइन पोर्टल के जरिए आवेदन
- पुलिस की जगह अब सिविक एजेंसियां दस्तावेजों की जांच और निरीक्षण करेंगी
- जनता और व्यापारियों को क्या फायदा–नुकसान?
ये होंगे फायदे
- एक ही पोर्टल से फायर, पर्यावरण और ट्रेड लाइसेंस की मंजूरी
- पुलिस थाने के चक्कर नहीं
- प्रक्रिया में गति आने की उम्मीद
- ये होंगी चुनौतियां
- सिविक एजेंसियों के पास अपराध या संदिग्ध गतिविधियों की ट्रेनिंग नहीं
- पुलिस की निगरानी खत्म, जिससे अवैध कामकाज को बढ़ावा मिल सकता है
- डिस्कोथेक, गेस्ट हाउस जैसी जगहों पर खतरा बढ़ सकता है
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की दो टूक चेतावनी
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार अब निगरानी का अधिकार हमारे पास नहीं है। इसलिए जरूरी है कि एमसीडी और एनडीएमसी सुरक्षा नजरिए से अपने सिस्टम को मजबूत करें। नहीं तो होटल के कमरे और डिस्कोथेक की अंधेरी रोशनी में क्या हो रहा है ये कोई नहीं देख पाएगा।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस नीति के तहत लिया गया फैसला
यह फैसला सरकार की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस नीति के तहत लिया गया है, जिससे कारोबारी वर्ग को सुविधा मिलेगी और दिल्ली पुलिस प्रशासनिक बोझ से मुक्त होगी। लेकिन सुरक्षा की जो परत अब हट गई है, वह अगर ठीक से भरपाई नहीं की गई, तो जनता और शहर दोनों को जोखिम में डाल सकती है।

