RANCHI : बच्चों के बीच आंखों से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। डॉक्टरों के अनुसार, मोबाइल फोन, टैबलेट, कंप्यूटर और टीवी के ज्यादा उपयोग के कारण बच्चों की आंखें बीमार हो रही हैं। इतना ही नहीं बच्चों की आंखों में जलन, सूखापन, लालिमा, दर्द और बार-बार सिरदर्द की शिकायतें आम होती जा रही हैं। आई स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का कहना है कि यह स्थिति अब केवल बड़ों तक सीमित नहीं रही, बल्कि कम उम्र के बच्चों में भी ड्राई आई डिजीज और आई स्ट्रेन जैसी समस्याएं देखने को मिल रही है।
कम झपकती है पलकें
डिजिटल डिवाइस के लंबे और लगातार इस्तेमाल से आंखों की पलकें कम झपकती हैं। जिससे आंखों में नमी की कमी हो जाती है। डॉक्टरों का कहना है कि रोजाना स्क्रीन टाइम में वृद्धि ड्राई आई डिजीज के खतरे को बढ़ा रही है। आज आंखों के क्लिनिक में ऐसे बच्चे समस्याएं लेकर आ रहे हैं, जो पहले वयस्कों में देखी जाती थीं।
स्टडी रिपोर्ट में खुलासा
इंडियन जर्नल ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी 2024 में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, डिजिटल डिवाइस का अत्यधिक उपयोग स्कूली बच्चों में ड्राई आई डिजीज के मामलों को तेजी से बढ़ा रहा है। स्टडी में पाया गया कि जो बच्चे रोजाना 8 से 10 घंटे स्क्रीन के सामने बिताते हैं, उनमें इस बीमारी का जोखिम कहीं अधिक है। स्टडी में ये भी पाया गया है कि ड्राई आई डिजीज से पीड़ित बच्चे सामान्य बच्चों की तुलना में 60 से 70 प्रतिशत अधिक स्क्रीन का उपयोग कर रहे थे। वहीं, लंबे समय तक स्क्रीन देखने के कारण पलक झपकने की दर में कमी आई है।
10 प्रतिशत बच्चों में शिकायत
आई स्पेशलिस्ट डॉ. प्रीतीश प्रणय ने बताया कि ओपीडी में आने वाले 10 प्रतिशत बच्चों को आंखों में लाली, पानी आना और सिरदर्द की शिकायत होती है। जिसका एक बड़ा कारण लंबे समय तक मोबाइल का इस्तेमाल है। उन्होंने कहा कि मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल और लगातार पढ़ाई से आंखों पर दबाव पड़ता है। ऐसे में बच्चों में मायोपिया जैसी समस्या भी दिख रही है। उन्होंने कहा कि इस वजह से ज्यादा पावर का चश्मा छोटे बच्चों को लग रहा है। अगर यही स्थिति रही तो आने वाले समय में ये आंकड़ा और तेजी से बढ़ेगा।
इस प्रकार कर सकते है कंट्रोल
डॉक्टर ने कहा कि नियमित पढ़ाई के बीच ब्रेक लेने की जरूरत है। कम से कम आधे घंटे में 20-30 सेकेंड का ब्रेक ले। आउटडोर खेल के लिए बाहर निकले और रोज कम से कम 60 मिनट धूप में रहे। इससे मायोपिया को कंट्रोल किया जा सकता है। फिजिकल एक्टिविटी से भी आंखों को आराम मिलता है। इसलिए एक्सरसाइज भी जरूरी है। आंखों के एक्सरसाइज के लिए पलकों को झफकाते रहे। वहीं थोड़ी देर के लिए आंखों को बंद भी रखे।
रोजाना एहतियात बरतने की जरूरत
एक्सपर्ट्स का कहना है कि दिनभर में स्क्रीन टाइम एक घंटे से ज्यादा नहीं होना चाहिए। अगर इससे ज्यादा टाइम मोबाइल, कंप्यूटर और टीवी पर दे रहे है तो उसके लिए एहतियात भी बरतने की जरूरत है। इसके लिए पैरेंट्स को भी ध्यान देना होगा। छोटे बच्चों को कुछ मिनट के लिए फोन देकर वापस लेने की आदत डाले। पैरेंट्स बच्चों के स्क्रीन टाइम पर नजर रखें, नियमित आंखों की जांच कराएं और आउटडोर एक्टिविटी को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। जिससे कि भविष्य में आंखों की गंभीर बीमारियों से बचा जा सके।
केस-1
10 वर्षीय बच्चे की मां ने बताया कि ऑनलाइन क्लास के बाद उनके बेटे को आंखों में जलन और सिरदर्द रहने लगा था। डॉक्टर की सलाह पर स्क्रीन ब्रेक और आंखों के एक्सरसाइज शुरू करने से कुछ ही हफ्तों में स्थिति में सुधार हुआ।
केस-2
7 साल की बच्ची के पिता ने कहा कि मोबाइल का इस्तेमाल सीमित करने और आउटडोर खेलने से उनकी बेटी की आंखों की समस्या में काफी सुधार आया है।
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