रांची : राज्य सरकार ने बोकारो और हजारीबाग में वेतन के नाम पर करोड़ों रुपये की अवैध निकासी को गंभीरता से लिया है। इस संबंध में वित्त सचिव प्रशांत कुमार ने सरकारी बिलों की निकासी से पहले अनिवार्य सावधानियां सुनिश्चित करने के लिए सभी विभागों, विभागाध्यक्षों, उपायुक्तों, पुलिस अधीक्षकों और कोषागार पदाधिकारियों को निर्देश जारी किया है। वित्त विभाग ने वेतन निकासी के घोटाले के मामले में महालेखाकार झारखंड द्वारा वित्त विभाग को 2 अप्रैल को लिखे गए पत्र का भी जिक्र किया है।
वित्त सचिव द्वारा जारी पत्र में बताया गया है कि बोकारो स्थित पुलिस अधीक्षक कार्यालय से मई 2024 से दिसंबर 2025 के बीच 3 करोड़ 15 लाख 33 हजार 993 रुपये की अवैध निकासी वेतन मद से की गई, जबकि हजारीबाग पुलिस अधीक्षक कार्यालय से पिछले आठ वर्षों में 15 करोड़ 41 लाख 41 हजार 485 रुपये की अवैध निकासी सामने आई है।
वित्त विभाग की समीक्षा में गंभीर अनियमितता सामने आई
वित्त विभाग की समीक्षा में कई गंभीर अनियमितताएँ सामने आईं। यह पाया गया कि सेवानिवृत्त या कार्यालय से असंबंधित व्यक्तियों को भी वेतन भुगतान किया जा रहा था। बोकारो मामले में एक सेवानिवृत्त व्यक्ति के जीपीएफ प्रोफाइल में जन्मतिथि बदलकर उसे कार्यरत कर्मचारी के रूप में भुगतान किया गया। वहीं कर्मियों के वेतन भुगतान से पहले उनके अनुमानित वेतन, वेतनमान और भत्तों की जांच नहीं की जा रही थी। बोकारो तथा हजारीबाग कार्यालय में संबंधित व्यक्ति को उसके निर्धारित वेतन से कहीं अधिक राशि प्रतिमाह दी जा रही थी।
जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित बिल लिपिक ने अपनी पत्नी और संबंधियों के बैंक खातों का विवरण दर्ज कर उन खातों में लगातार राशि हस्तांतरित कराई। कई मामलों में कर्मचारियों के अनुमानित वेतन से कहीं अधिक राशि हर महीने भेजी गई। सितंबर 2025 से पहले तक बिल पारित करने के लिए आवश्यक ओटीपी एक ही मोबाइल नंबर पर प्राप्त हो रहा था, जिससे निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी तथा बिल लिपिक दोनों की प्रक्रिया प्रभावित हुई। बाद में मोबाइल नंबर बदले जाने के बावजूद प्रणाली में गलत नंबर दर्ज किए जाते रहे, जिससे ओटीपी अन्य व्यक्तियों तक पहुंचता रहा।
उक्त मामलों में यह भी सामने आया कि संबंधित बिल लिपिक पिछले 10-12 वर्षों से एक ही कार्यालय में बिल लिपिक/लेखापाल के रूप में कार्यरत था, जिसके कारण उसके संदिग्ध कार्य समय पर उजागर नहीं हो सके।
भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियों को रोकने के लिए दिए गए निर्देश
वित्त विभाग ने निर्देश दिया है कि प्रत्येक निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी अपने मोबाइल नंबर को सुरक्षित रखे। स्थापना कर्मियों के नाम, पदनाम, जन्मतिथि तथा अन्य आवश्यक सूचनाओं का मिलान सेवा पुस्तिका से करते हुए वेतन भुगतान से पहले यह सुनिश्चित किया जाए कि संबंधित कर्मचारी वास्तव में कार्यालय में कार्यरत है। सभी कर्मियों को वेतन भुगतान केवल निर्गत वेतन पर्ची और सेवा पुस्तिका में दर्ज सत्यापन के आधार पर ही किया जाएगा।
वेतन भुगतान से पहले कर्मियों के बैंक खाता संख्या का सत्यापन उनकी पासबुक के आधार पर करना अनिवार्य होगा। डीडीओ द्वारा बिल प्रमाणपत्र भी जारी किया जाएगा और किसी भी परिस्थिति में ओटीपी साझा नहीं किया जाएगा। यदि किसी कार्यालय में एक ही लिपिक कार्यरत है तो उसके कार्यकाल की लगातार निगरानी की जाएगी।
साथ ही स्पष्ट निर्देश दिया गया कि भुगतान प्रणाली में अतिरिक्त सुरक्षा जांच भी जोड़ी जा रही है ताकि भविष्य में इस प्रकार की वित्तीय अनियमितियों की पुनरावृत्ति न हो सके।
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