
गिरिडीह : झारखंड के गिरिडीह से एक हैरान कर देने वाली सनसनीखेज वारदात सामने आई है। शुरुआत में ट्रेन हादसे या खुदकुशी की लगने वाली घटना असल में एक सुनियोजित और खौफनाक हत्याकांड निकली। पुलिस की तफ्तीश में यह खुलासा हुआ है कि जिस युवती का शव रेलवे ट्रैक के किनारे मिला था, उसकी हत्या उसके ही प्रेमी ने अपनी पत्नी की मदद से की थी। साजिश इतनी शातिराना थी कि पुलिस और परिवार दोनों को उलझाने के लिए लाश को पटरी पर फेंका गया और मोबाइल ट्रेन में छोड़ दिया गया। फिर भी आरोपी कानून के शिकंजे से बच नहीं सके।
प्यार, मदद और फिर डेढ़ लाख के दबाव में हत्या
पूरा मामला गिरिडीह जिले के बन्धखारो निवासी बिनोद मंडल और कपिलो गांव की रहने वाली लक्ष्मी कुमारी से जुड़ा हुआ है। बिनोद चिचाकी रेलवे स्टेशन पर टिकट काटने का काम करता था और पिछले करीब 6-7 सालों से लक्ष्मी के साथ रिलेशनशिप में था। बिनोद न सिर्फ लक्ष्मी का ख्याल रखता था, बल्कि उसकी पढ़ाई और परीक्षाओं का खर्च भी उठाता था।
हाल ही में लक्ष्मी ने अपनी आगे की पढ़ाई पीजी में एडमिशन आंध्र प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी में लेना चाहती थी। इसके लिए उसे करीब डेढ़ लाख रुपये की सख्त जरूरत थी। जब घर से पैसों का इंतजाम नहीं हो सका, तो लक्ष्मी ने बिनोद पर पैसों का दबाव बनाना शुरू कर दिया। बिनोद इतनी बड़ी रकम एक बार में देने को तैयार नहीं था, लेकिन लक्ष्मी का लगातार बढ़ता दबाव उसे नागवार गुजरने लगा। यहीं से उसने अपनी राह का रोड़ा बनी लक्ष्मी को हमेशा-हमेशा के लिए हटाने की साजिश रच डाली।
सोई हुई प्रेमिका का घोंटा गला, पत्नी संग बोरे में भरकर फेंका
19 सितंबर की शाम बिनोद ने लक्ष्मी को बहला-फुसलाकर दोदलों बुलाया और फिर अपनी बाइक पर बिठाकर एक सुनसान कमरे में ले गया। लक्ष्मी को उस पर पूरा भरोसा था। रात में जब लक्ष्मी सो गई, तो बिनोद ने बेहद बेदर्दी से अपने पैरों से दबाकर उसका गला घोंट दिया।
हत्या के बाद उसने अपनी पत्नी सविता देवी को भी इस गुनाह में शामिल किया। दोनों ने मिलकर लाश को एक सफेद बोरे में बंद किया और फिर अपनी पल्सर मोटरसाइकिल पर लादकर चिचाकी स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक के किनारे फेंक आए, ताकि मामला ट्रेन से कटने या आत्महत्या जैसा दिखाई दे।
पुलिस को भटकाने की चाल और जम्मू से आया वो एक कॉल
हत्या के बाद वारदात को पूरी तरह छिपाने के लिए बिनोद ने अपनी दिमागी तिकड़म का इस्तेमाल किया। उसने लक्ष्मी के मोबाइल से परिजनों को एक मैसेज भेजा-“मैं कहीं दूर जा रही हूं, अब कभी वापस नहीं आऊंगी, मुझे ढूंढने की कोशिश मत करना।”
मैसेज भेजने के बाद उसने लक्ष्मी का बैग और मोबाइल जम्मूतवी एक्सप्रेस ट्रेन में रख दिया ताकि लोकेशन काफी दूर की दिखे और जांच का रुख भटक जाए। कुछ दिनों बाद जब जम्मूतवी ट्रेन से किसी यात्री ने लक्ष्मी के परिजनों को फोन करके बताया कि उसका सामान और फोन यहां मिला है, तो परिजनों के साथ-साथ पुलिस को भी गहरी साजिश की गंध आने लगी।
विशेष जांच टीम ने दबोचा, बरामद हुआ सामान
20 सितंबर को ट्रैक किनारे से बरामद शव की पहचान जब लक्ष्मी के रूप में हुई, तब एसपी डॉ. बिमल कुमार के निर्देश पर एक विशेष जांच दल का गठन किया गया। जांच की कड़ियां जोड़ते हुए जब पुलिस बिनोद तक पहुंची और कड़ाई से पूछताछ की, तो उसका सारा प्लान ताश के पत्तों की तरह ढह गया।
पुलिस ने बिनोद मंडल और उसकी पत्नी सविता देवी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों की निशानदेही पर हत्या के बाद शव को ढोने में इस्तेमाल की गई पल्सर बाइक और सफेद बोरा भी बरामद कर लिया गया है। पुलिस की इस मुस्तैदी ने शातिर कातिल के हर पैंतरे को नाकाम करते हुए उसे सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है।
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