
रांची : रकारी नौकरी की आस में बैठे युवाओं के लिए पिछले सात साल किसी इम्तिहान से कम नहीं रहे हैं। झारखंड में साल 2018 से लटकी पड़ी जूनियर इंजीनियरों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर आखिरकार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कड़ा रुख अपनाया है। युवाओं की लंबी गुहार और शिकायतों के बाद अब मुख्यमंत्री सचिवालय ने नगर विकास विभाग से इस पूरे मामले पर महज 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
क्या है पूरा मामला और कहां अटका है पेंच
यह पूरी कहानी अक्टूबर 2018 से शुरू होती है, जब नगर विकास विभाग के अंतर्गत आने वाले ‘जुडको’ ने राज्य में कुल 141 जूनियर इंजीनियरों के पदों पर बंपर बहाली निकाली। इनमें सिविल के 93, इलेक्ट्रिकल के 23 और मैकेनिकल के 25 पद शामिल थे।
इस वेकेंसी में आवेदन करने वाले बेरोजगार युवाओं से फॉर्म के नाम पर भारी-भरकम 2000 रुपये शुल्क वसूला गया था। कई युवाओं ने तो नौकरी की उम्मीद में कर्ज लेकर या अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई से यह फीस भरी थी। लेकिन फॉर्म जमा लेने के बाद विभाग सो गया। न तो आवेदनों की ठीक से छंटनी हुई और न ही परीक्षा या चयन प्रक्रिया का कोई अता-पता चला।
सालों तक धक्के खाते रहे युवा, तब जागा सचिवालय
नौकरी के इंतजार में सात साल बीत जाना किसी भी युवा के भविष्य के साथ खिलवाड़ जैसा है। प्रभावित युवाओं ने अपनी इस पीड़ा को लेकर विभाग के चक्कर काटने में कोई कसर नहीं छोड़ी। हर दरवाजे पर दस्तक दी, अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन हर बार उन्हें कोरे आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला।
जब विभाग की तरफ से कोई उम्मीद नहीं बची, तब थक-हारकर इन युवाओं ने मुख्यमंत्री शिकायत कोषांग का दरवाजा खटखटाया। मुख्यमंत्री सचिवालय ने इस गंभीर मामले पर तुरंत संज्ञान लिया और नगर विकास विभाग को नोटिस जारी कर दिया है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि 15 दिन की इस मियाद के बाद क्या वाकई युवाओं को उनका हक मिलेगा या यह फाइल फिर किसी ठंडे बस्ते में दबी रह जाएगी।
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