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French Mass Rape Trial: ड्रग्स देकर सालों तक पत्नी का करवाता रहा रेप, 71 वर्षीय Gisèle Pelicot ने की इंसाफ की मांग

यह दर्दनाक राज तब खुला जब गिसेले को 2020 में शक हुआ कि उनकी स्वास्थ्य समस्याओं का कारण कुछ और नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी में घुलता हुआ यह जहर था।

by Priya Shandilya
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सेंट्रल डेस्क : फ्रांस की 71 वर्षीय गिसेले पेलीकॉट (Gisèle Pelicot), जो कभी अपने पति डॉमिनिक के साथ एक खुशहाल जीवन जी रही थीं, अब उसी व्यक्ति के खिलाफ अदालत में खड़ी हैं। डॉमिनिक पर आरोप है कि उसने गिसेले को नशीली दवाओं से अचेत कर, उनके साथ कई वर्षों तक अजनबियों से बलात्कार करवाया। इस घिनौनी हरकत को डॉमिनिक ने 2010 से लेकर 2020 के बीच अंजाम दिया।

यह दर्दनाक राज तब खुला जब गिसेले को 2020 में शक हुआ कि उनकी स्वास्थ्य समस्याओं का कारण कुछ और नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी में घुलता हुआ यह जहर था। इसके बाद 2021 में उन्होंने अपने पति से तलाक ले लिया और न्याय की तलाश में यह मुकदमा दर्ज करवाया।

अदालत में गवाही देते हुए गिसेले ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा, “मैं चाहती हूं कि दुनिया की हर महिला, जिसने बलात्कार सहा है, यह समझे कि इसमें हमारी कोई गलती नहीं है। शर्म हमारे लिए नहीं है; यह उन लोगों के लिए होनी चाहिए, जिन्होंने हमारे साथ ऐसा किया।” गिसेले का कहना था कि उन्होंने अपने जीवन के 50 साल इस आदमी के साथ बिताए, जिसने उनके साथ स्नेह और देखभाल का दिखावा किया। अदालत में उन्होंने अपनी बातों से सबको झकझोर दिया जब उन्होंने कहा, “मैं एक खुशहाल और संतुष्ट महिला थी। डॉमिनिक एक केयरिंग पति लगता था, मुझे कभी उस पर शक नहीं हुआ। जब मैं स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थी, तो मुझे लगता था कि मैं कितनी भाग्यशाली हूं कि वो मेरे साथ है। लेकिन वो असल में मेरे ही खिलाफ एक साजिश रच रहा था।”

अतीत का काला सच

गिसेले की जिंदगी में किसी बुरे सपने की तरह तब आया जब उन्हें यह एहसास हुआ कि उनकी स्वास्थ्य समस्याओं का कारण उनके पति द्वारा गुपचुप तरीके से दी गई दवाइयां थीं। गिसेले ने बताया कि डॉमिनिक अक्सर उनके लिए खाना बनाता और खाने के बाद आइसक्रीम देता था। अब उन्हें समझ में आया कि वही आइसक्रीम उन्हें बेहोश करने के लिए इस्तेमाल की गई थी।

उनके चेहरे पर दुख और अविश्वास की परछाइयां थीं जब उन्होंने अदालत में सवाल उठाया, “एक ऐसा व्यक्ति, जो मेरे लिए सबसे प्रिय था, जिसने मुझसे जीवन भर वफादारी का वादा किया था, मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकता है? उसने इन अजनबियों को हमारे बेडरूम में कैसे आने दिया?”

ओपन ट्रायल की मांग

गिसेले के दर्दनाक अनुभव ने पूरे फ्रांस को झकझोर दिया है। उन्होंने अपनी पहचान छिपाने से इनकार करते हुए खुले ट्रायल की मांग की ताकि वह महिलाओं के प्रति हुए इस अपराध को सबके सामने ला सके। फ्रांस की सड़कों पर महिलाओं और उनके समर्थकों ने गिसेले के साहस के समर्थन में मार्च निकाले, और न्यायालय के इस फैसले ने गिसेले को एक सशक्त नारीवादी प्रतीक बना दिया है।

उन्होंने अपने खुले ट्रायल की मांग पर जोर देते हुए कहा कि उनके लिए यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण था ताकि जो शर्म उन्होंने झेली, वह अब वापस अपराधियों के सिर पर लौट सके। गिसेले का कहना है कि यह बहादुरी नहीं, बल्कि उनके भीतर का वो दृढ़ संकल्प है जो उन्हें हर दिन अदालत लाता है, उन भयानक सच्चाइयों का सामना करने के लिए जो उन्हें अब भी अंदर से तोड़ देती हैं।

संघर्ष और संकल्प

गिसेले ने अदालत में इस बात पर जोर दिया कि वह उन सभी महिलाओं के लिए खड़ी हैं, जो उनके जैसे अपराधों का शिकार हुई हैं। “मुझे बहादुर कहा जा रहा है, लेकिन यह बहादुरी नहीं है। बहादुरी वह होती है, जब कोई किसी को बचाने के लिए समंदर में छलांग लगाता है। मैं बस संकल्पित हूं कि यह समाज अब बदले।”

डॉमिनिक की मानसिकता में हीन भावना?

उनके वकील और गिसेले ने अदालत में यह भी सवाल उठाया कि क्या डॉमिनिक की मानसिकता में हीन भावना घर कर गई थी, जो उसे इस अपराध की ओर ले गई। क्या गिसेले का किसी सहकर्मी के साथ थोड़े समय के लिए रिश्ता, या उनके सामाजिक स्तर का अंतर, या फिर डॉमिनिक का अकेला और कठिन बचपन इस पूरे अपराध का कारण बना?

अभियुक्तों ने अपने बचाव में दावा किया कि उन्होंने गिसेले के साथ बलात्कार नहीं किया क्योंकि उन्हें पता ही नहीं था कि वह बेहोश हैं। उनका कहना है कि उन्होंने इसे सहमति से खेला जाने वाला एक सेक्स गेम समझा, जिसमें गिसेले अपनी इच्छा से भाग ले रही थीं। यह तर्क सुनकर गिसेले के चेहरे पर अपमान का भाव साफ झलक रहा था। उन्होंने कोर्ट में कहा, “ये लोग मेरे साथ बलात्कार करने आए थे। यह सुनना मेरे लिए बेहद अपमानजनक और अपमानित करने वाला है कि लोग यह सोच सकते हैं कि मैंने अपनी मर्जी से इसमें हिस्सा लिया।”

फ्रांस में कानूनी बदलाव की उम्मीद

गिसेले की इस साहसिक पहल ने फ्रांस में महिला अधिकारों पर एक नई बहस छेड़ दी है। कई महिला संगठनों ने गिसेले के समर्थन में आवाज उठाई है और फ्रांसीसी सरकार से बलात्कार के कानून में संशोधन की मांग की है, जिसमें सहमति की परिभाषा पर विशेष ध्यान दिया जाए। गिसेले की कहानी, उनका साहस और उनका संकल्प पूरे फ्रांस में महिलाओं के लिए एक प्रेरणा बन गया है।

इस मामले की सुनवाई 2 सितंबर को शुरू हुई थी। कोर्ट में हर रोज लंबे समय तक सुनवाई चल रही है। उम्मीद की जा रही है कि इस मामले का फैसला दिसंबर के अंत तक आ जाएगा।

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