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अंधापन नियंत्रण में घोर लापरवाही, झारखंड के 17 जिलों के कार्यक्रम प्रबंधक को शोकॉज

by Rakesh Pandey
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जमशेदपुर : झारखंड राज्य में राष्ट्रीय अंधापन नियंत्रण कार्यक्रम में बड़ी लापरवाही सामने आई है, जिसे स्वास्थ्य विभाग ने गंभीरता से लिया है। स्वास्थ्य सेवाएं के निदेशक प्रमुख डा. बीरेंद्र प्रसाद सिंह ने राज्य के 17 सिविल सर्जनों को इस संदर्भ में पत्र लिखा है। इसमें पूर्वी सिंहभूम सहित बोकारो, चतरा, गढ़वा, गिरीडीह, गुमला, हजारीबाग, जामताड़ा, खुंटी, लातेहार, पाकुड़, पलामू, रामगढ़, रांची, सरायकेला, सिमडेगा व चाईबासा के सिविल सर्जन को पत्र लिखा है।

पत्र में कहा गया है कि माह जून 2023 तक आपके जिला में राष्ट्रीय अंधापन नियंत्रण कार्यक्रम का व्यय राशि शून्य है। जिससे ज्ञात होता है कि आपके जिला में राष्ट्रीय अंधापन नियंत्रण कार्यक्रम जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम का संचालन पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जो आपके कार्य में शिथिलता एवं घोर लापरवाही दर्शाता है। उन्होंने सभी सिविल सर्जनों को निर्देश दिया है कि आप प्रत्येक माह कार्यक्रम का समीक्षा करेंगे तथा अंधापन नियंत्रण कार्यक्रम का कार्य करने वाले कार्यक्रम प्रबंधक एवं लेखा प्रबंधक को स्पष्टीकरण पूछते हुए कारण स्पष्ट करें कि अंधापन नियंत्रण कार्यक्रम का व्यय अभी तक शून्य क्यों है?

किन पदाधिकारी, कर्मियों के कारण व्यय नहीं हो पा रहा है। उन्हें चिन्हित कर कार्रवाई करते हुए अधोहस्ताक्षरी को सूचित करेंगे। वहीं, कार्ययोजना तैयार कर मोतियाबिंद आपरेशन का भौतिक एवं वित्तीय लक्ष्य के विरुद्ध उपलब्धि प्राप्त करने की कार्रवाई करेंगे। वहीं, सिविल सर्जन डा. जुझार माझी ने कहा कि यह गंभीर मामला है। संबंधित पदाधिकारियों से जवाब तलब किया गया है।

उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मालूम हो कि पूर्वी सिंहभूम सहित राज्यभर में इस कार्यक्रम को लेकर विशेष अभियान चलाया जाता है। इस दौरान लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ मरीजों को चयनित कर उनका आपरेशन किया जाता है। इसके लिए विशेष फंड भी विभाग की तरफ से आवंटित किया जाता है।

 

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