Home » Hemant Soren 51st Birthday : हेमंत सोरेन का 51वां जन्मदिन, नेमरा गांव से झारखंड की सत्ता तक, जानें ऐसा रहा सियासी सफर

Hemant Soren 51st Birthday : हेमंत सोरेन का 51वां जन्मदिन, नेमरा गांव से झारखंड की सत्ता तक, जानें ऐसा रहा सियासी सफर

हेमंत सोरेन के लिए यह दिन व्यक्तिगत भावनाओं के साथ-साथ राजनीतिक जिम्मेदारियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत कई नेताओं ने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दी हैं

by Rakesh Pandey
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

रांची : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आज अपना 51वां जन्मदिन मना रहे हैं। 10 अगस्त 1975 को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में जन्मे हेमंत सोरेन ने राज्य की राजनीति में लंबा सफर तय किया है। झारखंड आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक शिबू सोरेन के बेटे होने के कारण उन्हें राजनीति विरासत में मिली, लेकिन समय के साथ उन्होंने अपनी अलग राजनीतिक पहचान भी बनाई।

इस बार उनका जन्मदिन इसलिए भी खास है, क्योंकि पिता और झामुमो के संस्थापक शिबू सोरेन के निधन के बाद यह उनका पहला जन्मदिन है। शिबू सोरेन का 4 अगस्त 2025 को निधन हुआ था। ऐसे में हेमंत सोरेन के लिए यह दिन व्यक्तिगत भावनाओं के साथ-साथ राजनीतिक जिम्मेदारियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत कई नेताओं ने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दी हैं।

नेमरा की मिट्टी से मिली राजनीति की पहली समझ

हेमंत सोरेन का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ, जिसका झारखंड के अलग राज्य आंदोलन और आदिवासी राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रहा है। उनके पिता शिबू सोरेन लंबे समय तक झारखंड की राजनीति के केंद्रीय चेहरों में रहे और उन्होंने झामुमो को मजबूत राजनीतिक संगठन के रूप में स्थापित किया। ऐसे राजनीतिक माहौल में पले-बढ़े हेमंत ने बचपन से ही आदिवासी समाज, जल-जंगल-जमीन और झारखंड की क्षेत्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों को करीब से देखा। हालांकि, उनकी राजनीतिक यात्रा केवल पारिवारिक विरासत तक सीमित नहीं रही। सक्रिय राजनीति में आने के बाद उन्होंने संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर अपनी भूमिका मजबूत की।

सितंबर 2010 में उन्हें झारखंड का उपमुख्यमंत्री बनाया गया। जनवरी 2013 तक इस पद पर रहते हुए उन्होंने राज्य की राजनीति में अपनी सक्रियता बढ़ाई। इसी दौर में पार्टी के भीतर भी उनका कद मजबूत हुआ और वह झामुमो की अगली पीढ़ी के प्रमुख नेताओं में गिने जाने लगे।

2013 में पहली बार संभाली मुख्यमंत्री की कुर्सी

हेमंत सोरेन के राजनीतिक करियर में वर्ष 2013 निर्णायक मोड़ लेकर आया। झामुमो, कांग्रेस और राजद के गठबंधन से बनी सरकार में उन्होंने पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनका पहला कार्यकाल 13 जुलाई 2013 से 23 दिसंबर 2014 तक रहा। हालांकि, 2014 के विधानसभा चुनाव में उन्हें दुमका सीट पर हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद बरहेट विधानसभा सीट से जीत दर्ज कर उन्होंने विधानसभा में अपनी मौजूदगी कायम रखी। जनवरी 2015 में उन्हें झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी मिली। विपक्ष में रहते हुए उन्होंने सरकार को घेरने के साथ-साथ झामुमो के संगठन को भी मजबूत करने पर ध्यान दिया।

2019 का चुनाव बना बड़ा राजनीतिक मोड़

वर्ष 2019 का विधानसभा चुनाव हेमंत सोरेन के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ। झामुमो के नेतृत्व वाले गठबंधन ने बहुमत हासिल किया और हेमंत सोरेन एक बार फिर मुख्यमंत्री बने। उन्होंने इस चुनाव में दुमका और बरहेट, दोनों सीटों से चुनाव लड़ा और दोनों जगह जीत हासिल की। इसके बाद उन्होंने गठबंधन सरकार की कमान संभाली। दूसरे कार्यकाल में उन्हें कई राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने सरकार और पार्टी संगठन पर अपनी पकड़ बनाए रखी।
वर्ष 2022 में विधानसभा में विश्वास मत के दौरान भी उनकी सरकार ने बहुमत साबित किया। इस दौर में हेमंत सोरेन की पहचान झारखंड की राजनीति में एक प्रभावशाली आदिवासी नेता और गठबंधन की राजनीति के महत्वपूर्ण चेहरे के रूप में और मजबूत हुई।

सत्ता के साथ कानूनी और राजनीतिक चुनौतियां भी

हेमंत सोरेन का सियासी सफर लगातार आसान नहीं रहा। मुख्यमंत्री के रूप में उन्हें कई राजनीतिक और कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। सत्ता से जुड़े विवादों और विपक्ष के दबाव के बीच भी उन्होंने झामुमो के संगठन पर अपनी पकड़ बनाए रखी। झारखंड की आदिवासी राजनीति में मजबूत आधार, पार्टी संगठन पर प्रभाव और गठबंधन की राजनीति में उनकी सक्रिय भूमिका ने उन्हें राज्य के प्रमुख नेताओं की कतार में खड़ा किया। उनके राजनीतिक सफर में ऐसे कई मौके आए, जब उन्हें कठिन परिस्थितियों के बीच अपनी राजनीतिक जमीन बचाने और मजबूत करने की चुनौती मिली।

‘गुरुजी’ के बिना पहला जन्मदिन

शिबू सोरेन का 4 अगस्त 2025 को 81 वर्ष की उम्र में निधन हुआ। झारखंड की राजनीति में ‘गुरुजी’ के नाम से मशहूर शिबू सोरेन के निधन के बाद हेमंत सोरेन के सामने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। पिता के निधन के बाद हेमंत ने सार्वजनिक रूप से अपनी भावनाएं भी जाहिर की थीं। उन्होंने उस समय खुद को भीतर से खाली महसूस करने की बात कही थी। ऐसे में 10 अगस्त 2026 का जन्मदिन उनके लिए भावनात्मक रूप से अलग है।

सुबह-सुबह झारखंड के CM हेमंत सोरेन के लिए PM मोदी ने किया पोस्ट, जानें क्या लिखा

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर हेमंत सोरेन के लिए पोस्ट लिखा । उन्होंने मुख्यमंत्री की लंबी उम्र और अच्छी सेहत की कामना की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिखा कि ‘झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी को जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। ईश्वर उन्हें लंबी उम्र दे और वो हमेशा अच्छे स्वास्थ्य और खुशियों से भरे रहें।’

Read Also- Jharkhand Legislative Assembly : सवाल पूछने वाले विधायक समय पर सदन में रहें, गैरमौजूदगी पर विधानसभा अध्यक्ष ने जताई नाराजगी

Related Articles

Leave a Comment