रांची : सोमवार से झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) का 13वां केंद्रीय महाधिवेशन सोमवार से रांची के खेलगांव स्थित टाना भगत इंडोर स्टेडियम में शुरू हो गया। दो दिवसीय इस महाधिवेशन में झारखंड सहित देश के 8 से अधिक राज्यों से पार्टी के 3500 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि हमारा राज्य अनगिनत शहादतों और संघर्षों के बाद मिला है। झामुमो शुरू से ही किसानों, दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों का प्रतिनिधित्व करता आया है।

अलग राज्य का सपना हुआ साकार
हेमंत सोरेन ने कहा कि जब गुरुजी (शिबू सोरेन) का आंदोलन चरम पर था, तब हजारों लोग उनके पीछे खड़े होते थे। अलग राज्य के लिए चला यह आंदोलन बहुत लंबा और संघर्षपूर्ण था, लेकिन अंततः सपना साकार हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि यह दुर्भाग्य की बात है कि झारखंड को अलग राज्य का दर्जा मिलने के बाद राज्य की कमान उन लोगों के हाथ में गई, जिन्हें इस धरती के लोगों से कोई सरोकार नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे लोगों ने राज्य के लिए बलिदान दिया, लेकिन विकास की दिशा में चर्चा और काम अपेक्षाकृत कम हुआ। अब झामुमो इस दिशा में पूरी तरह सक्रिय है और जनहित को सर्वोपरि रखते हुए काम कर रही है।
पत्नी संग पहुंचे शिबू सोरेन
महाधिवेशन की शुरुआत झामुमो के केंद्रीय अध्यक्ष और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन और पार्टी की उपाध्यक्ष रूपी सोरेन की उपस्थिति से हुई। खराब स्वास्थ्य के बावजूद दोनों नेताओं ने इस महाधिवेशन में भाग लिया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद अपने माता-पिता को आवास से लेकर कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल देखा गया। काफी देर तक वह अपने पिता की व्हीलचेयर थामे उनके पीछे खड़े रहे। शिबू सोरेन और रूपी सोरेन ने हाथ हिलाकर प्रतिनिधियों का उत्साह बढ़ाया।

विरासत को बढ़ा रहे झामुमो के सिपाही : कल्पना सोरेन
कल्पना सोरेन ने कहा कि झारखंड की माटी से उपजे एक सपने को दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी ने आंदोलन की मशाल बनाई। उसी विरासत को हम सभी झामुमो सिपाही हेमंत सोरेन जी के नेतृत्व में संकल्प की नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। कदम से कदम मिलाकर हम झारखंड के स्वाभिमान और समृद्धि के लिए एकजुट हैं। महाधिवेशन के दौरान बंसत सोरेन, मंत्री हफीजुल हसन सहित कई वरिष्ठ नेता व पदाधिकारी उपस्थित रहे।

स्टीफन मरांडी ने पेश किया प्रस्ताव
पार्टी के वरिष्ठ विधायक और पूर्व उपमुख्यमंत्री स्टीफन मरांडी ने झामुमो का राजनीतिक प्रस्ताव प्रस्तुत किया। प्रस्ताव में कई महत्वपूर्ण मुद्दों को शामिल किया गया, जिनमंस जातिगत जनगणना, ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण, 1932 खतियान आधारित स्थानीय नीति और निजी क्षेत्र में स्थानीयों के लिए 75 प्रतिशत आरक्षण शामिल था। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी वक्फ एक्ट में प्रस्तावित संशोधनों के खिलाफ है। इसके अलावा सरना धर्म कोड को देश की संसद से मान्यता देने की मांग और पूरे देश में जातिगत जनगणना कराने की वकालत भी की गई। उन्होंने कहा कि झामुमो हमेशा सामाजिक न्याय, स्थानीय अधिकारों और हाशिए पर पड़े वर्गों की बेहतरी के लिए संघर्ष करता रहा है और करता रहेगा।
मुद्दों को जनता के पास ले जाएगा जेएमएम
महाधिवेशन के दौरान झामुमो के नेताओं ने स्पष्ट संकेत दिए कि पार्टी आने वाले चुनावों में इन मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएगी और उन्हें निर्णायक राजनीतिक एजेंडा बनाएगी। महाधिवेशन 15 अप्रैल तक चलेगा, जिसमें कई अन्य प्रस्तावों पर चर्चा और संगठनात्मक समीक्षा भी की जाएगी। इस दौरान पार्टी के भविष्य की रणनीतियों और आगामी चुनावों की दिशा भी तय की जाएगी।

