नई दिल्ली: पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के भाई मनोहर राव ने कांग्रेस पार्टी द्वारा नरसिम्हा राव को दिए गए सम्मान पर कड़ा सवाल उठाया है। उनके अनुसार, कांग्रेस ने न तो नरसिम्हा राव के योगदान को पहचाना और न ही उन्हें उचित सम्मान दिया। मनोहर राव ने यह आरोप लगाया कि पार्टी ने न तो उन्हें भारत रत्न दिया, न उनकी कोई प्रतिमा बनाई, और न ही उनके लिए कोई स्मारक स्थल स्थापित किया।
कांग्रेस का रवैया और नरसिम्हा राव का योगदान
मनोहर राव ने कांग्रेस की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी ने नरसिम्हा राव को दो गज जमीन भी नहीं दी, जबकि उनके नेतृत्व में ही भारत ने ऐतिहासिक आर्थिक सुधारों की दिशा में कदम बढ़ाया। मनोहर राव का आरोप था कि अगर नरसिम्हा राव के योगदान को सही तरीके से सम्मानित किया जाता, तो उन्हें कोई सार्वजनिक सम्मान, प्रतिमा या स्मारक दिया जाता।
सोनिया गांधी का नजरअंदाज करना, अंतिम संस्कार में न आना
मनोहर राव ने यह भी कहा कि सोनिया गांधी, जो उस वक्त कांग्रेस की अध्यक्ष थीं, ने नरसिम्हा राव के अंतिम संस्कार में भाग नहीं लिया। उन्होंने कहा, “क्या सोनिया गांधी हैदराबाद नहीं आ सकती थीं?” उनका यह सवाल था कि अगर कांग्रेस अपने नेताओं को सम्मान नहीं दे सकती, तो उनके योगदान को सही तरीके से क्यों नहीं पहचाना गया?
नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह की जोड़ी
मनोहर राव ने यह भी स्पष्ट किया कि नरसिम्हा राव और डॉ. मनमोहन सिंह के बीच एक गुरु-शिष्य का संबंध था। नरसिम्हा राव ने मनमोहन सिंह को स्वतंत्रता दी, जिससे उन्होंने ऐतिहासिक आर्थिक निर्णय लिए और देश को आर्थिक संकट से उबारने में अहम भूमिका निभाई। हालांकि, मनोहर राव ने सवाल किया कि डॉ. मनमोहन सिंह को सम्मानित किया गया, लेकिन उनके गुरु, नरसिम्हा राव को क्यों नहीं।
भाजपा का समर्थन और स्मारक स्थल के लिए जमीन
मनोहर राव ने भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) के समर्थन की सराहना की। उन्होंने कहा कि भाजपा डॉ. मनमोहन सिंह के स्मारक स्थल के लिए जगह देने को तैयार है और इस संबंध में ट्रस्ट बनाने की प्रक्रिया चल रही है। मनोहर राव ने कहा कि भाजपा ने यह सुनिश्चित किया है कि डॉ. मनमोहन सिंह को उनके योगदान के लिए उचित सम्मान मिले।
मनोहर राव के सवाल कांग्रेस पार्टी को एक बार फिर से सोचने पर मजबूर करते हैं कि क्या उसने अपने नेताओं को पर्याप्त सम्मान दिया है। पीवी नरसिम्हा राव का योगदान देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण था, लेकिन उनका सम्मान और पहचान शायद सही तरीके से नहीं मिली। अब यह देखना होगा कि भविष्य में कांग्रेस पार्टी अपने नेताओं के योगदान को किस प्रकार सम्मानित करती है।

