धनबाद : इस बार विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को सिंदरी और निरसा विधानसभा क्षेत्रों में कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। माना जा रहा है कि इन दोनों ही सीटों पर भाजपा के लिए जीत आसान नहीं होगी। क्योंकि भाजपा के उम्मीदवार की कार्यशैली को लेकर पार्टी के कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों में रुझान अपेक्षाकृत कम देखने को मिल रहा है। वहीं, इंडिया गठबंधन के तहत सीपीआइ-एमएल (Communist Party of India – Marxist-Leninist) के उम्मीदवारों के प्रति ग्रामीण मतदाताओं में समर्थन बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है।
हेमंत सोरेन की नीतियों का प्रभाव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सिंदरी और निरसा विधानसभा की चुनावी दिशा इस बार ग्रामीण मतदाताओं के हाथों में है। इन क्षेत्रों के ग्रामीण मतदाता झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी सरकार की नीतियों से अधिक प्रभावित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विगत 22 अगस्त को धनबाद के बलियापुर में आयोजित कार्यक्रम में आदिवासियों, मूलवासियों और झारखंडवासियों के हक में बयान दिया था, जिसके बाद से ग्रामीण मतदाता हेमंत सोरेन के पक्ष में लामबंद हो गए हैं।
हेमंत सोरेन का बलियापुर में विकास का वादा
बलियापुर में आयोजित सभा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड वासियों के विकास के लिए राज्य सरकार के प्रयासों को साझा किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केंद्र से नहीं बल्कि गांव-देहात से काम कर रही है। इसके साथ ही उन्होंने एयरपोर्ट निर्माण के प्रस्ताव को लेकर एक सकारात्मक बयान भी दिया था, जिससे क्षेत्र के विकास की संभावना बढ़ी है। हेमंत सोरेन ने यह भी कहा कि अगर केंद्र सरकार सहमति देती है, तो बलियापुर में एयरपोर्ट बन सकता है, जो क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित होगा।
भाजपा प्रत्याशी की कार्यशैली पर नाराजगी
बताया जाता है कि भाजपा प्रत्याशी की कार्यशैली पर असंतोष बढ़ता जा रहा है। सिंदरी विधानसभा क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली पर खुलकर नाराजगी जताई है। भाजपा जिला कार्यसमिति सदस्य राकेश तिवारी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डालते हुए भाजपा प्रत्याशी तारा देवी की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया है कि पार्टी के पुराने और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की जा रही है। उनकी भूमिका को नजरअंदाज किया जा रहा है। यह स्थिति भाजपा के लिए चुनावी नुकसान का कारण बन सकती है।
इंडिया गठबंधन समर्थित सीपीआइ-एमएल प्रत्याशी की बढ़ती लोकप्रियता
सिंदरी और निरसा विधानसभा क्षेत्र में इंडिया गठबंधन के उम्मीदवारों के प्रति ग्रामीण मतदाताओं के प्रति रुझान दिख रहा है। सिंदरी विधानसभा में सीपीआइ-एमएल (CPI-ML) प्रत्याशी चंद्रदेव महतो और निरसा विधानसभा में अरूप चटर्जी की उम्मीदवारी को लेकर ग्रामीणों में उत्साह बढ़ा है। पिछले चुनावों में इन क्षेत्रों में सीपीआइ-एमएल का मजबूत प्रदर्शन रहा था। इसके मद्देनजर उनकी स्थिति काफी बेहतर मानी जा रही है।
मतदाता समीकरण और वोट प्रतिशत
सिंदरी विधानसभा : सिंदरी विधानसभा क्षेत्र में कुल 3.20 लाख मतदाता हैं, जिनमें से 79.7% ग्रामीण मतदाता हैं। क्षेत्र में मुस्लिम, आदिवासी और महतो वोटरों की महत्वपूर्ण संख्या है। भाजपा के लिए यहां की राजनीति चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में स्थानीय विधायक की अनुपस्थिति और बेरोजगारी जैसे मुद्दों ने मतदाताओं के बीच असंतोष को जन्म दिया है। इस क्षेत्र में सीपीआइ-एमएल और झामुमो के उम्मीदवारों के प्रति अच्छा-खासा रुझान देखने को मिल रहा है।
निरसा विधानसभा
निरसा विधानसभा में कुल 3.9 लाख मतदाता हैं, जिनमें से 61.39% ग्रामीण मतदाता हैं। यहां भी सीपीआइ-एमएल के प्रत्याशी अरूप चटर्जी भाजपा के लिए चुनौती बन सकते हैं। 2019 के चुनाव में भाजपा को 42.2% वोट मिले थे, जबकि मासस (CPI-ML) को 30.1% वोट मिले थे। इस बार, इंडिया गठबंधन समर्थित प्रत्याशी इन वोटों का काफी हिस्सा अपनी ओर खींचने में सफल हो सकते हैं।सिंदरी और निरसा में भाजपा की स्थितिबीते चुनावों के आंकड़ों के अनुसार, भाजपा को 2009 में सिंदरी में 13.4% वोट, 2014 में 25.78% वोट, और 2019 में 35.6% वोट मिले थे। वहीं, सीपीआइ-एमएल (अब इंडिया गठबंधन का हिस्सा) ने 2009 में 25.87%, 2014 में 25.78%, और 2019 में 32% वोट हासिल किए थे। इस बार, सीपीआइ-एमएल की उम्मीदवारी को लेकर वोट प्रतिशत में और बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे भाजपा के लिए चुनौती और भी बड़ी हो जाएगी।
चुनावी भविष्य
हालांकि, भाजपा की रणनीति और प्रत्याशी के चुनावी प्रचार में कमी को देखते हुए, अगर नाराज कार्यकर्ताओं को समय रहते मनाया नहीं गया, तो भाजपा के लिए जीत आसान नहीं होगी। खासकर सिंदरी विधानसभा में तारा देवी के खिलाफ पार्टी कार्यकर्ताओं का असंतोष चुनाव परिणामों पर असर डाल सकता है।