RANCHI: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मंगलवार को सदन में कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जोरदार हंगामा देखने को मिला। कार्यवाही शुरू होते ही भारतीय जनता पार्टी के विधायक पोस्टर लेकर वेल में पहुंच गए और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। विपक्ष ने राज्य में बढ़ते अपराध और भ्रष्टाचार को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ रही है। उन्होंने दुमका में मजदूर यूनियन नेताओं पर हुई फायरिंग की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि अब तक अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इसके अलावा उन्होंने रजरप्पा और गिरिडीह की घटनाओं का भी हवाला देते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य में बिना पैसे कोई काम नहीं हो रहा और सरकार पूरी तरह भ्रष्टाचार में डूबी हुई है।
इस पर संसदीय कार्य सह वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि यदि कार्यमंत्रणा समिति में चर्चा का निर्णय लिया जाता है तो सरकार इस मुद्दे पर सदन में चर्चा कराने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था नियंत्रण में है और भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई की जा रही है। हंगामे के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक आमने-सामने आ गए। इसी बीच मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू और आजसू विधायक निर्मल महतो उर्फ तिवारी महतो के बीच भी तनातनी देखने को मिली। स्थिति को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने तिवारी महतो को मार्शल आउट करने का निर्देश दे दिया। बाद में वित्त मंत्री के हस्तक्षेप के बाद उन्हें फिर से सदन में बुला लिया गया।
सदन में अल्पसंख्यक विद्यालयों को सरकारी योजनाओं का लाभ देने का मुद्दा भी उठा। विधायक अरूप चटर्जी ने सवाल किया कि इन स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को पाठ्यपुस्तक, कॉपी और मुख्यमंत्री छात्रवृत्ति योजना का लाभ क्यों नहीं मिल रहा है। इस पर मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि इन विद्यालयों को अभी तक सरकारी स्कूल का दर्जा नहीं मिला है, इसलिए सीधे योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। हालांकि सरकार इस दिशा में पहल करने पर विचार कर रही है।

