Jharkhand Bureaucracy : गुरु मुंह में पान दबाए कुछ फुसफुसा रहे थे। बगल में खड़े सेवादार मंद ध्वनि और टूटती आवाज के बीच तारतम्य बैठाकर बात समझने की कोशिश कर रहे थे। जैसे ही दरवाजा खुला गुरु ने अपने दोनों सेवादारों को रवानगी का फरमान सुना दिया। ‘साहेब’ का हुक्म सिर आंखों पर। कमरे से निकलते सेवादारों के चेहरे से साफ झलक रहा था कि उन्हें अनचाहा आगमन पसंद नहीं आया। बहरहाल, गुरु के चेहरे पर बेफिक्री देखकर संतोष हुआ। सामान्य दिनों के मुकाबले गुरु ने बड़े उत्साह से स्वागत किया।
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पहले पास पड़ी पीकदान में अपना मुंह हल्का किया, फिर बोले, आओ-आओ अब तो तुम्हारी बिरादरी भी खूब नाम कमा रही है। तुम नौकरशाही के मुहल्ले में खबर छान रहे हो और न्यूज क्रिएटर तुम्हारी गली में ही बैठे हैं। पहले विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की खबरें होती थीं। अब तो खबरनवीस ही खबर हैं। गुरु का यह बाउंसर सीधे सिर के ऊपर से निकल गया।
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उनके कथन से एक बात साफ थी। कुछ गूढ़ मामला है। बस बात-बात में फंसी थी। हाथ जोड़कर कहा- गुरु थोड़ी सरल व्याख्या कीजिए। बात सुनकर गुरु ने बगैर कुछ कहे एक ऑडियो प्ले कर दिया। जैसे-जैसे ऑडियो की आवाज आगे बढ़ रही थी, वैसे-वैसे वनांचल में लोकतंत्र की कलई खुल रही थी। शीर्ष पर काबिज कार्यपालिका के दो मजबूत स्तंभ एक-एक कर कांड, कर्ता और कारण की व्याख्या कर रहे थे। कोई अपना अनुराग दिखा रहा था। कोई खुद को अविनाशी बता रहा था। देखते-देखते नौ मिनट 30 सेकेंड कैसे गुजर गए, पता ही नहीं चला। इसमें क्या कुछ नहीं था। आपसी उठापटक, रसूख, बचाने-फंसाने की बातें, चौथे खंभे की तो… कर दी गई थी। यानी हम्माम में सभी नंगे होते हैं।
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पूरी कहानी सुनकर मन में सवाल उठा, क्या जो कुछ कहा जा रहा है, सब कुछ सच है या तथ्यों की एकांगी व्याख्या है। दरअसल, जब से एआई ने तहलका मचाया है, सब कुछ अविश्वसनीय, अकल्पनीय जैसा लगने लगा है। हालांकि, गुरु ने जिस विश्वास से सब कुछ खोलकर रख दिया, वह अपने आप में पर्याप्त था।
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ऑडियो की आवाज थमने पर पहला प्रश्न किया। गुरु क्या यह सब सच है? गुरु बोले, बच्चा यह जगत बस इन्हीं दो सवालों को सुलझाने में उलझा है। सत्य क्या है? असत्य क्या है? भौतिकवादी कहते हैं, जो दिख रहा है, वह मान्य है। अध्यात्म कहता है, जो नहीं दिख रहा, वही शक्ति है। अब यह व्यक्ति पर निर्भर है कि वह किसे सही माने, किसे गलत? बहरहाल, यह तुम्हारे लिए झन्नाटेदार खबर है, लिखना चाहो तो लिखो, छोड़ना चाहो तो छोड़ो। गुरु ने बड़े धर्म संकट में फंसा दिया था। ऑडियो क्लिप अपने मोबाइल में ट्रांसफर कराया और चलते बने। मन में बस एक ही सवाल था- क्या सच इतना नंगा है, जिससे देख-सुनकर दिल टूट जाए।
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