
नई दिल्ली/रांची: राज्यों में पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति में नियमों की अनदेखी का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत में गरमा गया है। झारखंड और ओडिशा में DGP पदों पर हुई नियुक्तियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जारी सुनवाई अब टल गई है। शीर्ष अदालत ने इस मामले पर अगली सुनवाई के लिए मंगलवार 29 सितंबर की तारीख तय की है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष इस संवेदनशील मामले की सुनवाई शुरू हुई।
अदालत के तीखे सवाल से मांगा वक्त
सुनवाई के दौरान कोर्ट में तब अजीब स्थिति बन गई, जब बेंच ने केंद्र और राज्य सरकारों की कार्यप्रणाली पर सीधा सवाल दाग दिया। ओडिशा में आईपीएस अधिकारी सुशांत कुमार नाथ का नाम सूची से हटाने और झारखंड में एडीजी स्तर के अधिकारी को प्रमोट कर डीजीपी बनाने की दलीलें दी जा रही थीं।
तभी मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने पूछा “जिस दिन डीजीपी का पद खाली हुआ, उस समय राज्य में पहले से डीजीपी कैडर के तीन योग्य अधिकारी मौजूद थे। ऐसे में उन वरिष्ठ अधिकारियों को दरकिनार कर एडीजी स्तर के अफसर को प्रमोट करने की आखिर क्या हड़बड़ी थी?”
सीजेआई के इस सवाल का तत्काल कोई ठोस जवाब सॉलिसिटर जनरल के पास नहीं था। उन्होंने अदालत से इसका औपचारिक जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने सहमति जताते हुए अगली सुनवाई मंगलवार को मुकर्रर कर दी।
कोर्ट में मौजूद वरिष्ठ वकीलों ने झारखंड में डीजीपी नियुक्ति से जुड़े विवाद पर भी उसी दिन सुनवाई करने की अपील की। इसके बाद अदालत ने साफ किया कि झारखंड और ओडिशा दोनों ही राज्यों के मामलों को 29 सितंबर को एक साथ सुना जाएगा।
बता दें कि राज्यों द्वारा सुप्रीम कोर्ट के ‘प्रकाश सिंह दिशा-निर्देशों’ को दरकिनार कर मनपसंद अफसरों को डीजीपी बनाने के आरोपों पर अदालत बेहद गंभीर नजर आ रही है।

