
रांची: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय का तीसरा दीक्षांत समारोह गुरुवार को संपन्न हुआ। समारोह में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने युवाओं को देश का भविष्य बताते हुए अपनी क्षमताओं को पहचानने और नई ऊंचाइयों को छूने का आह्वान किया।
बेटियों ने गाड़े सफलता के झंडे

समारोह के दौरान एक खास और प्रेरक तस्वीर देखने को मिली। राज्यपाल ने जानकारी दी कि दीक्षांत समारोह में कुल 142 गोल्ड मेडल दिए गए, जिनमें से 93 पदकों पर छात्राओं ने कब्जा जमाया। उन्होंने इसे ‘बदलते भारत’ की एक बेहद मजबूत तस्वीर करार दिया। उन्होंने कहा कि आज की बेटियां शिक्षा, विज्ञान, प्रशासन, खेल और तकनीक समेत हर क्षेत्र में पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं।
तकनीकी विकास के साथ नैतिक मूल्यों का होना जरूरी
अपने संबोधन में राज्यपाल ने भारत की सदियों पुरानी शिक्षा-परंपरा का जिक्र करते हुए ‘विद्या ददाति विनयम्’ के सिद्धांत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नालंदा जैसे प्राचीन केंद्रों ने भारत को दुनिया में ज्ञान का सिरमौर बनाया था।
आज के आधुनिक दौर पर चर्चा करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अंतरिक्ष विज्ञान और डिजिटल तकनीक का जमाना है। ऐसे में युवाओं को केवल तकनीक का इस्तेमाल करने वाला नहीं, बल्कि उसमें नई खोज करने वाला बनना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी याद दिलाया कि तकनीकी विकास के साथ-साथ नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं का होना बहुत जरूरी है।
नौकरी ढूंढने वाले नहीं, जॉब क्रिएटर बनें

राज्यपाल ने युवाओं को करियर के प्रति नई सोच अपनाने की सलाह दी। कहा कि पढ़ाई का मकसद सिर्फ नौकरी पाना नहीं होना चाहिए, बल्कि अपने ज्ञान और कौशल के दम पर दूसरों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना चाहिए। उन्होंने अपने जीवन का उदाहरण देते हुए बताया कि उनकी पहली डिग्री इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में थी, लेकिन बाद में उन्होंने कानून, अर्थशास्त्र और वित्तीय नीतियों के क्षेत्र में राह बनाई। उन्होंने समझाया कि जीवन में नया सीखने और रास्ते बदलने की संभावनाएं हमेशा खुली रहती हैं।
जिंदगी में कभी बंद नहीं होती सीखने की प्रक्रिया
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य डॉ. राकेश मोहन ने कहा कि कॉलेज की पढ़ाई इंसान को सोचने और समस्याओं को सुलझाने का आधार देती है। एआई के दौर में भी ये बुनियादी क्षमताएं सबसे काम आएंगी। उन्होंने बताया कि भारतीय अर्थव्यवस्था पिछले 35 वर्षों से लगातार मजबूत हो रही है, जिसमें ग्रामीण भारत और महिला स्वयं सहायता समूहों की बड़ी भूमिका रही है। उन्होंने छात्रों से कहा कि सफलता के साथ-साथ रिश्तों और अपनी साख की रक्षा करना भी उतना ही जरूरी है।
हजारों विद्यार्थियों को मिलीं उपाधियां

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राजीव मनोहर ने दीक्षांत समारोह को विद्यार्थियों के सालों की मेहनत और अनुशासन का परिणाम बताया। समारोह में यूजी, पीजी, बीएड और पीएचडी के कुल 6,415 पात्र विद्यार्थियों में से पंजीकृत 3,535 छात्र-छात्राओं को डिग्रियां प्रदान की गईं। विभिन्न विषयों में अव्वल आने वाले होनहारों को मंच पर गोल्ड मेडल देकर सम्मानित किया गया, जिससे पूरे परिसर में खुशी का माहौल रहा।

