
Jamshedpur :धालभूमगढ़ थाना में पदस्थापित एक आदिवासी महिला सिपाही से कथित अत्याचार और शोषण के मामले में आरोपी रहे पवन कुमार को दोबारा थाना प्रभारी बनाने का विरोध शुरू हो गया है।झारखंड आदिवासी युवा संगठन और पूर्वी सिंहभूम आदिवासी छात्र संघ ने गुरुवार को वरीय पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल ने पवन कुमार को श्यामसुंदरपुर थाना प्रभारी के पद से तत्काल हटाने और निलंबित करने की मांग की। साथ ही धालभूमगढ़ थाना में महिला सिपाही से जुड़े पुराने मामले की निष्पक्ष जांच तथा पूर्व में शुरू की गई विभागीय जांच की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की गई।
पहले निलंबित किए गए थे पवन कुमार
संगठनों के अनुसार, 18 अक्टूबर 2025 को धालभूमगढ़ थाना में पदस्थापित एक आदिवासी महिला सिपाही से कथित अत्याचार और शोषण का मामला सामने आया था। तत्कालीन थाना प्रभारी पवन कुमार पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। इसके बाद उन्हें निलंबित किया गया था और विभागीय जांच शुरू किए जाने की बात कही गई थी।
संगठनों ने सवाल उठाया कि यदि विभागीय जांच पूरी नहीं हुई थी तो 18 सितंबर 2026 को पवन कुमार को दोबारा श्यामसुंदरपुर थाना प्रभारी की जिम्मेदारी किस आधार पर दी गई।
पिछली पोस्टिंग को लेकर भी सवाल
प्रतिनिधिमंडल ने पवन कुमार की पूर्व पदस्थापनाओं को लेकर भी सवाल उठाए। संगठन के मुताबिक, पलामू से पूर्वी सिंहभूम आने के बाद उनकी गुड़ाबांधा थाना में पोस्टिंग हुई थी। करीब छह महीने के भीतर उन्हें वहां से हटाया गया। इसके बाद सुंदरनगर थाना में पदस्थापित किया गया, जहां करीब सात महीने बाद उन्हें हटाया गया। इसके बाद उन्हें धालभूमगढ़ थाना प्रभारी बनाया गया, लेकिन वहां भी उनका कार्यकाल दो महीने से कम रहा। अब श्यामसुंदरपुर थाना प्रभारी बनाए जाने के बाद संगठनों ने इन तबादलों और कम अवधि की पोस्टिंग को लेकर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।
‘आदिवासियों पर अत्याचार बर्दाश्त नहीं’
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि आदिवासी महिला पुलिसकर्मी से जुड़े गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। संगठनों ने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।
एसएसपी को सौंपे ज्ञापन में पवन कुमार को तत्काल थाना प्रभारी के पद से हटाने, निलंबित करने, पुराने मामले की जांच की स्थिति स्पष्ट करने और विभागीय कार्रवाई पूरी होने तक उन्हें महत्वपूर्ण थाना की जिम्मेदारी नहीं देने की मांग की गई। प्रतिनिधिमंडल में झारखंड आदिवासी युवा संगठन के अजय देवगाम, सुकरा हो, अनुज पूर्ति, पोरेश मुर्मू, दासो टुडू और सरद टुडू के अलावा आदिवासी छात्र संघ के फुदान मुर्मू, दशमथ मुर्मू, सुजाता मार्डी, रघुनाथ हांसदा, सुपाय सिंह हांसदा सहित अन्य लोग शामिल थे।

