
रांची: दुर्गा पूजा की आहट के साथ ही झारखंड सरकार ने राज्य की माताओं और बहनों के चेहरे पर मुस्कान बिखेर दी है। मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के अंतर्गत रांची और धनबाद जिले की करीब 7.40 लाख महिलाओं को सितंबर महीने की सम्मान राशि का भुगतान कर दिया गया है। त्यौहार के इस सीजन में सीधे महिलाओं के बैंक खातों में 2,500-2,500 रुपये पहुंचने से पूजा की खरीदारी और पारिवारिक तैयारियों को बड़ा सहारा मिला है।
प्रशासनिक स्तर पर पूरी पारदर्शिता बरतते हुए यह राशि आधार से जुड़े डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर प्रणाली के जरिए भेजी गई है। इससे महिलाओं को अपनी जरूरत के हिसाब से त्यौहार पर कपड़े, बच्चों का सामान और अन्य सामग्रियां खरीदने की पूरी आजादी मिली है।
धनबाद में 3.46 लाख महिलाओं को मिला आर्थिक संबल
धनबाद जिले की बात करें तो यहां कुल 3,46,365 महिलाओं के खातों में सितंबर महीने की राशि भेजी गई है। इसके लिए सरकार की ओर से 86.59 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की गई।
धनबाद जिले में गोविंदपुर प्रखंड ने बाजी मारी, जहां 50,413 महिलाओं को योजना का लाभ मिला। झरिया अंचल में 44,279 और बाघमारा प्रखंड में 44,136 लाभुकों को पैसे ट्रांसफर किए गए।
अन्य क्षेत्र तोपचांची, निरसा, बलियापुर, कलियासोल, पुटकी, एग्यारकुंड, टुंडी और पूर्वी टुंडी समेत सभी अंचलों और प्रखंडों की सुपात्र महिलाओं को योजना के दायरे में लाया गया है।
रांची में 3.93 लाख बहनों के खाते में पहुंचे 98.49 करोड़ रुपये
राजधानी रांची में भी इस योजना को लेकर महिलाओं में भारी उत्साह है। जिले की 3,93,994 लाभार्थी महिलाओं के बैंक खातों में कुल 98.49 करोड़ रुपये की सम्मान राशि हस्तांतरित की गई है।
रांची जिले के आंकड़ों में कांके प्रखंड सबसे आगे रहा, जहां 31,483 महिलाओं के खाते में राशि पहुंची। रांची टाउन अर्बन क्षेत्र में 25,893, मांडर में 22,936, सिल्ली में 21,269, बेड़ो में 20,555 और रातू में 20,329 महिलाओं को लाभ मिला।
इसके अलावा चान्हो, तमाड़, नगड़ी, ओरमांझी, बुढ़मू, नामकुम, अनगड़ा, हेहल, अरगोड़ा, सोनाहातू, लापुंग, बड़गाईं और इटकी सहित बुंडू, खलारी और राहे के क्षेत्रों में भी शत-प्रतिशत भुगतान सुनिश्चित किया गया है।
स्वावलंबन और खुशी का दोहरा संदेश
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, त्यौहारों के ठीक पहले समय पर भुगतान सुनिश्चित करने का मकसद महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। इससे न केवल परिवार की छोटी-मोटी जरूरतों के लिए महिलाओं को दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता, बल्कि बाजार में भी त्यौहार के समय सकारात्मक चहल-पहल देखने को मिलती है।
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