
फीचर डेस्क : पितरों के प्रति श्रद्धा, तर्पण और स्मरण का पखवाड़ा शनिवार को सर्व पितृ अमावस्या के साथ संपन्न हो जाएगा। इसी दिन महालया मनाया जाएगा, जो पितृ पक्ष की विदाई और मां दुर्गा के आगमन के आह्वान का प्रतीक है। महालया के साथ ही दुर्गापूजा की तैयारियों में तेजी आ गई है। रविवार को कलश स्थापना के साथ शारदीय नवरात्र की शुरुआत होगी। इसके बाद नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाएगी। भागलपुर के नाथनगर सहित विभिन्न इलाकों में महालया को लेकर श्रद्धा और उत्साह का माहौल है। वहीं, शहर के प्रमुख दुर्गापूजा स्थलों पर सजावट और तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
महालया पर चंडी पाठ से भक्तिमय हुआ माहौल
महालया के अवसर पर सुबह से ही चंडी पाठ और मां दुर्गा के आह्वान से वातावरण भक्तिमय हो गया। परंपरा के अनुसार, श्रद्धालु सुबह स्नान और ध्यान के बाद प्रसिद्ध रेडियो प्रस्तोता वीरेंद्र कृष्ण भद्र की आवाज में चंडी पाठ सुनते हैं। उनके द्वारा प्रस्तुत महिषासुर मर्दिनी का पाठ बंगाल सहित देश के कई हिस्सों में महालया की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
समय के साथ चंडी पाठ सुनने के माध्यम बदल गए हैं। पहले जहां लोग रेडियो पर इस पाठ को सुनते थे, वहीं अब मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल माध्यमों से भी इसका प्रसारण सुनते हैं। इसके बावजूद महालया के प्रति लोगों की आस्था और उत्साह बना हुआ है। चंडी पाठ के मंत्र, मां दुर्गा के आह्वान और भक्ति गीतों के माध्यम से श्रद्धालु शारदीय नवरात्र के स्वागत की तैयारी करते हैं।
नाथनगर क्षेत्र में भी महालया को लेकर भक्तिमय माहौल है। श्रद्धालु इसे पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ मां दुर्गा की आराधना के नए चरण की शुरुआत के रूप में देखते हैं।
सर्व पितृ अमावस्या पर पितरों को दिया जाएगा अंतिम तर्पण
पितृ पक्ष के अंतिम दिन सर्व पितृ अमावस्या का विशेष धार्मिक महत्व है। इस दिन पूर्वजों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य करने की परंपरा है। मान्यता के अनुसार, जिन लोगों को अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि की जानकारी नहीं होती या किसी कारणवश निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं हो पाता, वे सर्व पितृ अमावस्या पर श्राद्ध कर्म कर सकते हैं।
ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज कुमार मिश्रा के अनुसार, पितृ पक्ष की अमावस्या तिथि पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का महत्वपूर्ण अवसर है। इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य किया जाता है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार इन कर्मों को पूरा करते हैं।
भागलपुर में गंगा घाटों सहित विभिन्न स्थानों पर लोग पितरों को तर्पण देकर पितृ पक्ष का समापन करेंगे। घरों में भी श्राद्ध कर्म और धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे। इसके साथ ही पितरों के स्मरण और पूजा-अर्चना का 15 दिवसीय पक्ष समाप्त हो जाएगा।
कलश स्थापना के साथ कल से शुरू होगा शारदीय नवरात्र
पितृ पक्ष की समाप्ति के अगले दिन रविवार को कलश स्थापना के साथ शारदीय नवरात्र का शुभारंभ होगा। नवरात्र के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। श्रद्धालु पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना के साथ नौ दिनों के व्रत और पूजा का संकल्प लेते हैं। मंदिरों और घरों में कलश स्थापना, दुर्गा सप्तशती का पाठ और विशेष पूजा-अर्चना की तैयारियां की जा रही हैं।
महालया को मां दुर्गा के आगमन के आह्वान से जोड़कर देखा जाता है। इसके साथ ही दुर्गापूजा की रौनक बढ़ने लगती है। बाजारों में पूजा सामग्री की खरीदारी और पूजा स्थलों पर तैयारियां तेज हो जाती हैं। नवरात्र के दौरान श्रद्धालु उपवास, मंत्र जाप और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से मां दुर्गा की आराधना करते हैं।
दुर्गापूजा की तैयारियां अंतिम चरण में
महालया के साथ भागलपुर शहर में दुर्गापूजा का उत्साह बढ़ने लगा है। आदमपुर, कचहरी चौक, मारवाड़ी पाठशाला, मुंदीचक गढ़ैया, तिलका मांझी और बरारी सहित प्रमुख पूजा स्थलों पर सजावट का काम अंतिम चरण में है। पूजा समितियां पंडालों और आसपास के क्षेत्रों को सजाने में जुटी हैं।
पितृ पक्ष के समापन के साथ ही धार्मिक गतिविधियों का केंद्र अब नवरात्र और दुर्गापूजा की तैयारियां होंगी। रविवार से शुरू होने वाले शारदीय नवरात्र के लिए श्रद्धालु पूजा सामग्री जुटाने और घरों में धार्मिक अनुष्ठानों की व्यवस्था करने में लगे हैं। शहर के विभिन्न पूजा स्थलों पर तैयारियां पूरी होने के साथ आगामी दिनों में उत्सव का माहौल और बढ़ने की उम्मीद है।
इस तरह शनिवार का दिन दो महत्वपूर्ण धार्मिक परंपराओं से जुड़ा है। एक ओर सर्व पितृ अमावस्या पर पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त कर पितृ पक्ष का समापन होगा, वहीं दूसरी ओर महालया के साथ मां दुर्गा के स्वागत का आह्वान किया जाएगा। इसके अगले दिन कलश स्थापना के साथ शारदीय नवरात्र शुरू होंगे और भागलपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में दुर्गापूजा का उत्सव गति पकड़ेगा।

