
Jamshedpur : कुछ लोग अपने काम से केवल इतिहास का हिस्सा नहीं बनते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए बदलाव की राह भी तैयार करते हैं। लेडी मेहरबाई टाटा ऐसी ही शख्सियत थीं। उन्होंने उस दौर में महिलाओं की शिक्षा, समान अधिकार और सामाजिक सुधार की आवाज बुलंद की, जब महिलाओं के लिए सार्वजनिक जीवन में अपनी पहचान बनाना आसान नहीं था। खेल, संगीत, यात्राओं और समाजसेवा में रुचि रखने वाली मेहरबाई की सोच अपने समय से काफी आगे थी।
उनका जीवन टाटा स्टील के इतिहास से भी गहराई से जुड़ा रहा। वर्ष 1920 के दशक में जब कंपनी आर्थिक संकट से गुजर रही थी, तब उन्होंने अपने पति सर दोराबजी टाटा का मजबूती से साथ दिया। कंपनी को संकट से उबारने के लिए सर दोराबजी ने अपनी निजी संपत्ति तक गिरवी रख दी थी। इसमें लेडी मेहरबाई का बेहद प्रिय जुबली डायमंड भी शामिल था। यह हीरा उनके लिए केवल बेशकीमती आभूषण नहीं था, बल्कि उस भरोसे और प्रतिबद्धता का प्रतीक भी था, जिसके साथ उन्होंने टाटा स्टील के भविष्य के लिए अपना योगदान दिया। इस कदम से कंपनी को कठिन आर्थिक दौर से निकलने में मदद मिली। आगे चलकर टाटा स्टील ने भारत के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।
जुबली डायमंड से जुड़ी है त्याग की कहानी
लेडी मेहरबाई और सर दोराबजी टाटा के निधन के बाद जुबली डायमंड बेच दिया गया। इससे प्राप्त राशि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट को सौंपी गई। इस ट्रस्ट ने शिक्षा, स्वास्थ्य, वैज्ञानिक अनुसंधान, ग्रामीण विकास और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विभिन्न कार्यों को आगे बढ़ाने में योगदान दिया। इस तरह मेहरबाई के त्याग से जुड़ी कहानी का प्रभाव केवल टाटा स्टील तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज कल्याण के कई क्षेत्रों तक पहुंचा।
महिलाओं के अधिकार और शिक्षा के लिए उठाई आवाज

मेहरबाई
मेहरबाई टाटा महिलाओं को शिक्षा और समान अवसर दिलाने की प्रबल समर्थक थीं। उन्होंने महिलाओं की स्थिति बेहतर बनाने के लिए सामाजिक स्तर पर लगातार प्रयास किए। महिला संगठनों के विकास और भारत में महिला अधिकारों से जुड़े आंदोलनों को आगे बढ़ाने में भी उनकी अहम भूमिका रही।
उन्होंने महिलाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने, पर्दा प्रथा के विरोध और छुआछूत जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाई। उनका मानना था कि समाज की वास्तविक उन्नति तभी संभव है, जब महिलाओं को भी आगे बढ़ने और अपनी क्षमता के अनुसार जीवन जीने का अवसर मिले। उस दौर में जब महिलाओं की भूमिका को सीमित नजरिये से देखा जाता था, मेहरबाई ने अपनी सक्रियता और विचारों से स्थापित मान्यताओं को चुनौती दी। उनके प्रयासों ने महिला सशक्तीकरण से जुड़े मुद्दों को व्यापक सामाजिक चर्चा का हिस्सा बनाने में मदद की।
टेनिस में भी बनाई अपनी अलग पहचान

मेहरबाई
लेडी मेहरबाई टाटा की पहचान केवल समाजसेवा तक सीमित नहीं थी। वह एक कुशल टेनिस खिलाड़ी भी थीं। वेस्टर्न इंडिया टेनिस टूर्नामेंट में उन्होंने तीनों खिताब अपने नाम किए और अपने खेल करियर में 60 से अधिक ट्रॉफियां जीतीं।
उन्हें मोटरगाड़ियों का शौक था और उन्होंने दुनिया के कई हिस्सों की यात्रा की। इन यात्राओं के दौरान उन्होंने अलग-अलग समाजों और महिलाओं की परिस्थितियों को करीब से देखा। उनकी सोच का केंद्र हमेशा यही रहा कि महिलाओं को बेहतर जीवन, सम्मान और आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए। खेल, यात्राओं और सामाजिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी उस समय की महिलाओं के लिए एक अलग उदाहरण थी। उन्होंने साबित किया कि महिलाएं सामाजिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपनी रुचियों और क्षमताओं के दम पर भी नई पहचान बना सकती हैं।
टाटा मेमोरियल अस्पताल में आज भी जीवित है उनकी विरासत

मेहरबाई
18 जून 1931 को लेडी मेहरबाई टाटा का निधन हो गया, लेकिन उनके विचारों और सामाजिक योगदान की छाप आज भी दिखाई देती है। उनके जीवन से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण विरासतों में टाटा मेमोरियल अस्पताल का नाम भी शामिल है। यह संस्थान कैंसर के इलाज, चिकित्सा अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में देश के प्रमुख केंद्रों में गिना जाता है। अस्पताल के माध्यम से बड़ी संख्या में मरीजों को उपचार और उनके परिवारों को उम्मीद मिलती है। स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में इस तरह के संस्थानों का योगदान मेहरबाई और सर दोराबजी टाटा से जुड़ी परोपकार की परंपरा की याद दिलाता है।
दुनिया की दूसरी अग्रणी महिलाओं की तरह थीं मेहरबाई
लेडी मेहरबाई टाटा उन महिलाओं की परंपरा का हिस्सा थीं, जिन्होंने अपने समय की सीमाओं से आगे बढ़कर समाज में बदलाव की राह बनाई। दुनिया में एडा लवलेस ने कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के शुरुआती विकास में योगदान दिया, जबकि रोजालिंड फ्रैंकलिन के शोध ने डीएनए की संरचना को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारत में उषा मेहता ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान साहस और नेतृत्व का परिचय दिया। वहीं, डॉ. जानकी अम्माल ने वनस्पति विज्ञान और आनुवंशिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। इन सभी महिलाओं की तरह मेहरबाई ने भी अपने काम और विचारों से समाज को नई दिशा देने का प्रयास किया।
उनके जीवन का संदेश स्पष्ट था कि विकास का अर्थ केवल आर्थिक समृद्धि नहीं है। वास्तविक प्रगति तब होती है, जब समाज के हर वर्ग को बेहतर स्वास्थ्य, शिक्षा, समान अवसर और सम्मान के साथ जीने का अधिकार मिले। करीब एक सदी बाद भी लेडी मेहरबाई टाटा की कहानी त्याग, साहस और सामाजिक जिम्मेदारी की याद दिलाती है। उनके विचार आज भी महिला अधिकारों, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर प्रासंगिक हैं। उनका जीवन बताता है कि किसी व्यक्ति की असली पहचान उसकी प्रसिद्धि या संपत्ति से नहीं, बल्कि समाज में लाए गए उस बदलाव से बनती है, जिसका असर आने वाली पीढ़ियों तक बना रहता है।


