
वित्त विभाग ने जारी की कागजातों की सूची, पहली नियुक्ति और प्रोन्नति के लिए अलग-अलग अभिलेख अनिवार्य
रांची : झारखंड के सरकारी कर्मचारियों के लिए ऑनलाइन वेतन पर्ची, सेवा इतिहास और अवकाश लेखा बनवाना अब थोड़ा अधिक दस्तावेज आधारित होगा। इसके लिए आवेदन करने वाले कर्मियों को अब निर्धारित कागजातों की छायाप्रति भी जमा करनी होगी। वित्त विभाग ने आवेदन के साथ लगाए जाने वाले जरूरी दस्तावेजों की सूची जारी कर दी है। पहली बार सरकारी सेवा में आने वाले और प्रोन्नति पाने वाले कर्मचारियों के लिए अलग-अलग कागजात तय किए गए हैं।
विभाग के पास बड़ी संख्या में ऐसे आवेदन पहुंच रहे थे, जिनमें जरूरी दस्तावेज नहीं लगाए जा रहे थे। जांच के दौरान कमी मिलने पर आवेदन वापस करना पड़ता था। इससे कर्मचारियों को दोबारा कागजात जुटाने और आवेदन जमा करने की परेशानी होती थी। साथ ही वेतन पर्ची और सेवा संबंधी अभिलेख जारी होने में भी देरी होती थी। इसी परेशानी को दूर करने के लिए वित्त विभाग ने दस्तावेजों की सूची जारी की है।
पहली नियुक्ति पर इन कागजातों की जरूरत
पहली बार सरकारी सेवा में योगदान देने वाले कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र, पदस्थापन आदेश, प्रथम प्रभार ग्रहण प्रतिवेदन, मैट्रिक प्रमाण पत्र या अंक पत्र और चिकित्सा प्रमाण पत्र देना होगा। इसके अलावा दहेज संबंधी घोषणा पत्र, पासपोर्ट आकार की तस्वीर और अवकाश संबंधी स्वघोषणा भी जमा करनी होगी। वाहन और आवास आवंटित नहीं होने की स्थिति में इसकी स्वघोषणा के साथ निर्धारित अनुलग्नक भी देना होगा।
प्रोन्नति पाने वालों को भी देने होंगे अभिलेख
अराजपत्रित पद से राजपत्रित पद पर प्रोन्नति पाने वाले कर्मचारियों के लिए प्रोन्नति अधिसूचना, पदस्थापन आदेश, पुराने पद से विरमन आदेश और नये पद पर योगदान का प्रतिवेदन अनिवार्य किया गया है। इसके साथ अद्यतन सत्यापित मूल सेवा पुस्तिका, आवेदन, अवकाश संबंधी स्वघोषणा, वाहन और आवास आवंटन से संबंधित घोषणा तथा अंतिम वेतन प्रमाण पत्र भी देना होगा।
वित्त विभाग ने इस संबंध में सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव, विभागाध्यक्ष, प्रमंडलीय आयुक्त और उपायुक्तों को निर्देश भेजा है। वेतन पर्ची के अलावा सेवा इतिहास, अवकाश लेखा और बची हुई अर्जित छुट्टी के बदले नकद भुगतान के मामलों में भी निर्धारित अभिलेखों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। विभाग का मानना है कि आवेदन के साथ ही सभी जरूरी कागजात मिलने से कर्मचारियों को बार-बार कार्यालयों का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा और उनके आवेदनों का निष्पादन भी तेजी से हो सकेगा।

