Home » VBG Ram Ji Scheme : वी बी जी राम जी के पांच हजार कर्मियों के मानदेय भुगतान का रास्ता साफ, 35.68 करोड़ रुपये आवंटित

VBG Ram Ji Scheme : वी बी जी राम जी के पांच हजार कर्मियों के मानदेय भुगतान का रास्ता साफ, 35.68 करोड़ रुपये आवंटित

by Nikhil Kumar
MGNREGA work continues without disruption in Jharkhand and other states.
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

कुछ जिलों में 10 से 11 महीने से लंबित है मानदेय, दीपावली से पहले भुगतान की उम्मीद; प्रशासनिक मद की राशि से होगा बकाया भुगतान

रांची : विकसित भारत-जी राम जी योजना के तहत झारखंड के करीब पांच हजार मनरेगा कर्मियों के बकाया मानदेय भुगतान का रास्ता साफ हो गया है। राज्य सरकार ने योजना की प्रशासनिक मद में 35 करोड़ 68 लाख 75 हजार 600 रुपये आवंटित किये हैं। लंबे समय से मानदेय नहीं मिलने के कारण आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे कर्मियों को इससे बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। राज्य के कुछ जिलों में पांच से छह महीने, जबकि कुछ जिलों में 10 से 11 महीने तक का मानदेय लंबित है। राशि आवंटित होने के बाद अब दीपावली से पहले भुगतान होने की उम्मीद बढ़ गयी है।

इस संबंध में आयुक्त, विकसित भारत जी राम जी मृत्युंजय कुमार बरनवाल ने राज्य के सभी उपायुक्तों और उप विकास आयुक्तों को पत्र जारी किया गया है। इसमें जिलों को आवंटित राशि प्रखंडों और कार्यान्वयन एजेंसियों को जल्द से जल्द उप आवंटित करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही राशि उप आवंटित करने के बाद इसकी सूचना आयुक्त कार्यालय को उपलब्ध कराने को कहा गया है।

मानदेय भुगतान को प्राथमिकता देने का निर्देश

जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि योजना की प्रशासनिक मद से होने वाले खर्च में मानदेय भुगतान को प्राथमिकता दी जाये। इसके लिए सभी जिलों के लिए अलग-अलग राशि निर्धारित की गयी है। प्रशासनिक मद में केंद्र और राज्य के बीच 60 और 40 प्रतिशत का अनुपात रखा गया है। यानी कुल आवंटन में 60 प्रतिशत केंद्रांश और 40 प्रतिशत राज्यांश शामिल है। सरकार ने जिलों को निर्देश दिया है कि राशि मिलने के बाद भुगतान की प्रक्रिया में तेजी लायी जाये।

कई महीने से भुगतान नहीं होने से कर्मियों में नाराजगी

मनरेगा कर्मियों का मानदेय लंबे समय से लंबित रहने के कारण उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। कई कर्मियों के लिए परिवार का खर्च चलाना भी मुश्किल हो रहा था। कुछ जिलों में पांच से छह महीने से भुगतान नहीं हुआ था, जबकि कुछ जिलों में बकाया अवधि 10 से 11 महीने तक पहुंच गयी थी। मानदेय नहीं मिलने का असर योजना के क्रियान्वयन पर भी पड़ रहा था। प्रखंड स्तर पर मनरेगा से जुड़ी योजनाओं का संचालन, मजदूरों को काम उपलब्ध कराने, अभिलेखों के संधारण और योजनाओं की निगरानी की जिम्मेदारी कर्मियों के पास होती है।

इस मामले को लेकर मनरेगा कर्मचारी संघ की ओर से भी कई बार राज्य सरकार को पत्र लिखकर बकाया मानदेय भुगतान की मांग की गयी थी। संघ ने सरकार से लंबित भुगतान के लिए राशि उपलब्ध कराने का आग्रह किया था। अब प्रशासनिक मद में राशि आवंटित होने के बाद कर्मियों को बकाया मानदेय मिलने की उम्मीद जगी है।

गिरिडीह को सबसे अधिक 2.69 करोड़ रुपये

जारी जिलावार आवंटन में गिरिडीह को सबसे अधिक करीब 2.69 करोड़ रुपये दिये गये हैं। इसके अलावा हजारीबाग को 2.11 करोड़, धनबाद को 1.99 करोड़, बोकारो को 1.84 करोड़, पूर्वी सिंहभूम को 1.80 करोड़, गढ़वा को 1.70 करोड़ और दुमका को 1.65 करोड़ रुपये आवंटित किये गये हैं। अन्य जिलों के लिए भी राशि निर्धारित की गयी है। सभी जिलों को अपने अधीन प्रखंडों और कार्यान्वयन एजेंसियों को राशि उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गयी है।

भुगतान से ग्रामीण योजनाओं के कामकाज को भी मिलेगी गति

मनरेगा कर्मियों को मानदेय का भुगतान होने से उन्हें आर्थिक राहत मिलने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में योजना के कामकाज को भी गति मिलने की संभावना है। कर्मियों की जिम्मेदारी ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने, योजनाओं के क्रियान्वयन, मजदूरी भुगतान से संबंधित प्रक्रिया और कार्यों की निगरानी से जुड़ी है। लंबे समय से मानदेय लंबित रहने के कारण इन कार्यों पर भी असर पड़ रहा था। अब जिलों को जल्द राशि उप आवंटित करने के निर्देश के बाद भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।

Related Articles

Leave a Comment