RANCHI: झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई। बैठक में अस्पताल सूचीबद्ध और हॉस्पिटल इंपैनलमेंट मॉड्यूल (एचईएम)-2.0 पोर्टल पर अस्पतालों के माइग्रेशन की स्थिति की गहन समीक्षा की गई। बैठक में छवि रंजन, राजीव लोचन बख्शी, विद्यानंद शर्मा पंकज, सिद्धार्थ सान्याल और सीमा सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। समीक्षा के दौरान पाया गया कि एचईएम 2.0 पोर्टल पर अस्पतालों का माइग्रेशन झारखंड में अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया है। विशेष रूप से प्राइवेट अस्पतालों की भागीदारी कम होने पर चिंता व्यक्त की गई। अधिकारियों ने बताया कि फायर सेफ्टी एनओसी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की स्वीकृति, बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट अनुमति और बिल्डिंग प्लान अप्रूवल जैसे आवश्यक दस्तावेजों की कमी माइग्रेशन में प्रमुख बाधा बन रही है।
प्री-ऑथराइजेशन प्रक्रिया भी होगी बंद
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि जब तक सूचीबद्ध अस्पताल एचईएम 2.0 पोर्टल पर माइग्रेट नहीं करेंगे, तब तक उन्हें मिलने वाले इंसेंटिव बंद रहेंगे। साथ ही राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) के निर्देशानुसार भविष्य में प्री-ऑथराइजेशन प्रक्रिया भी बंद की जा सकती है। फिलहाल अस्पतालों में नई स्पेशलिटी जोड़ने की अनुमति भी नहीं दी जा रही है। अपर मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि जरूरी लाइसेंस और स्वीकृतियों की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। उन्होंने विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर लंबित मामलों का शीघ्र समाधान करने पर जोर दिया। बैठक में भविष्य की कार्ययोजना पर भी चर्चा हुई।
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