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Jharkhand High Court: 14 साल की कानूनी लड़ाई के बाद इंजीनियरों को मिला हक, सरकार को 12 हफ्तों में पूरी करनी होगी प्रोन्नति की प्रक्रिया

​CBI जांच और नियमों का हवाला देकर फंसाया गया था मामला, अदालत ने खारिज किया विभाग का तर्क

by Kanchan Kumar
Jharkhand High Court
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रांची: ​झारखंड में सरकारी विभाग की सुस्ती और नियमों के पेच में फंसे कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर है। झारखंड हाईकोर्ट ने जल संसाधन विभाग के तीन जूनियर इंजीनियरों (मैकेनिकल) के पक्ष में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि विभाग की अपनी भूल या देरी का खामियाजा किसी कर्मचारी को भुगतना नहीं पड़ सकता।

​मामला रॉबिन अजय सिंह, पंकज कुमार और संदीप कुमार से जुड़ा है। तीनों की नियुक्ति साल 2007 में हुई थी। नियम के मुताबिक, पांच साल की सेवा पूरी करने के बाद ये नवंबर 2012 में ही सहायक अभियंता (मैकेनिकल) बनने के योग्य हो चुके थे। लेकिन विभागीय लालफीताशाही के चलते इन्हें यह हक छह साल के बाद साल 2018 में मिल पाया।

​जब इन इंजीनियरों ने साल 2012 से ही वित्तीय और सेवा लाभ की मांग उठाई, तो विभाग ने पुरानी फाइलों और तकनीकी अड़चनों का पिटारा खोल दिया। इसी साल जनवरी में विभाग ने सीबीआई जांच लंबित होने, साल 2016 की नई नियमावली और वित्तीय नियमों का हवाला देकर इनके दावों को सिरे से खारिज कर दिया था।

​अदालत में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने मजबूत दलील रखी। उन्होंने कोर्ट को बताया कि साल 2012 में न तो उनके मुवक्किलों के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज थी और न ही कोई चार्जशीट दाखिल हुई थी। सरकार के अपने संकल्प के मुताबिक, गंभीर मामलों में ही प्रोन्नति रोकी जा सकती है। केवल शुरुआती सीबीआई जांच के नाम पर किसी का हक नहीं छीना जा सकता। इसके अलावा, साल 2016 के नियमों को पिछले दरवाजे से 2012 पर लागू नहीं किया जा सकता।

​जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने इन सभी तर्कों को पूरी तरह जायज माना। कोर्ट ने विभाग के उस आदेश को कचरे के डिब्बे में डाल दिया जिसमें प्रोन्नति रोकी गई थी। अदालत ने आदेश दिया है कि तीनों इंजीनियरों को 20 नवंबर 2012 से ही सहायक अभियंता माना जाए और उनके सभी एरियर व अन्य वित्तीय लाभ दिए जाएं।

​इतना ही नहीं, हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि सहायक अभियंता के पद पर यह लाभ मिलने के बाद, इन तीनों को आगे कार्यपालक अभियंता के पद पर प्रोन्नति देने के मामले में भी नियमानुसार विचार किया जाए। अदालत ने राज्य सरकार को हिदायत दी है कि इस पूरी प्रक्रिया को अगले 12 हफ्तों के भीतर हर हाल में पूरा कर लिया जाए। इस फैसले से कर्मचारियों में खुशी की लहर है।

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