रांची : झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (सीजीएल) परीक्षा में पेपर लीक के मामले में सीबीआई जांच की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका को झारखंड हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया। याचिका को अधिवक्ता विनय कुमार तिवारी ने दायर किया था, जिसमें उन्होंने पेपर लीक मामले की सीबीआई से जांच कराने और एसआईटी रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग की थी।

हाई कोर्ट ने जनहित याचिका पर क्या कहा?
सुनवाई के दौरान, झारखंड हाई कोर्ट की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता से पूछा कि इस मामले में उनका व्यक्तिगत हित क्या है और क्या यह याचिका किसी और उद्देश्य से दायर की गई है। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में पहले से ही अधिवक्ता प्रकाश कुमार द्वारा एक जनहित याचिका दायर की गई है और इस पर सुनवाई चल रही है, इसलिए नई याचिका का कोई औचित्य नहीं है।
कोर्ट ने तिवारी को उनकी याचिका वापस लेने की अनुमति दी और पीआईएल (जनहित याचिका) को खारिज कर दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर तिवारी चाहें तो वह चल रही जनहित याचिका में हस्तक्षेप याचिका दायर कर सकते हैं।
पेपर लीक मामला और एसआईटी की जांच
बता दें कि झारखंड सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (जेएसएससी सीजीएल) का आयोजन 28 जनवरी 2024 को किया गया था, जिसमें पेपर लीक का मामला सामने आया था। इसके बाद, अभ्यर्थियों के विरोध और गंभीर आरोपों के कारण परीक्षा रद्द कर दी गई थी। राज्य सरकार ने जांच के लिए एसआईटी (विशेष जांच दल) का गठन किया था।
इस परीक्षा में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में 2,025 पदों पर नियुक्ति के लिए आवेदन मांगे गए थे। इस परीक्षा में 6.5 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने भाग लिया था, जिससे यह परीक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण बन गई थी। पेपर लीक मामले की जांच के चलते अभ्यर्थियों में भारी आक्रोश था, और उनके दबाव में परीक्षा को रद्द कर दिया गया।
झारखंड सरकार और एसआईटी की भूमिका
जेएसएससी द्वारा आयोजित इस परीक्षा के दौरान पेपर लीक की घटना ने राज्य सरकार को काफी परेशानी में डाला। मामले के उजागर होते ही एसआईटी ने जांच शुरू की, लेकिन इस मामले में एक्शन की मांग को लेकर विभिन्न याचिकाएं दायर की जा रही थीं। अब, झारखंड हाई कोर्ट ने सीबीआई जांच की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया है, हालांकि यह मामला अभी भी एसआईटी के पास जांच के लिए जारी है।
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