
रांची : झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की सीजीएल परीक्षा में हुए बड़े फर्जीवाड़े और धांधली के मामले ने पूरे राज्य की व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। शुरुआत में यह मामला महज अफवाह और ठगी का प्रतीत हो रहा था। हालांकि, जैसे-जैसे पुलिस और सीआईडी की विशेष जांच टीम ने पड़ताल का दायरा बढ़ाया, इस संगठित सिंडिकेट की परतें खुलती चली गईं।
जांच में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब मुख्य आरोपी अभय तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी की कड़ियों को खंगाला गया। अभय तिवारी ने इस फर्जीवाड़े के जरिए खुद भी परीक्षा में 48वीं रैंक हासिल कर ली थी। इसके साथ ही उसने अपने भाई अक्षय तिवारी और भाभी सुषमा कुमारी को भी परीक्षा में पास करवा दिया था। सीआईडी ने कार्रवाई करते हुए तीनों को गिरफ्तार कर लिया है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोह ने अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र रटवाने के लिए बाकायदा गुप्त ठिकाने बनाए थे। परीक्षा से ठीक दो दिन पहले अभ्यर्थियों के एक समूह को पटना से नेपाल के विराटनगर स्थित एक होटल में ठहराया गया था। इसी तरह कुछ अभ्यर्थियों को बोकारो के होटलों में रखा गया। वहां उन्हें करीब 135 संभावित सवाल और उनके उत्तर याद करवाए गए। परीक्षा के बाद जब इन उत्तरों का मिलान किया गया, तो इनमें से 120 प्रश्न मुख्य परीक्षा पत्र में हू-बू-हू पाए गए।
पूरे खेल में पैसों का हुआ बड़ा लेन-देन
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस पूरे खेल में पैसों का बहुत बड़ा लेन-देन हुआ। नौकरी पक्की करने के नाम पर अभ्यर्थियों से 12 लाख रुपये से लेकर 70 लाख रुपये तक की भारी-भरकम राशि वसूली गई थी। कई अभ्यर्थियों से तो मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र और सादे चेक भी जमा करवा लिए गए थे ताकि बाद में पैसे ऐंठे जा सकें।
जैसे ही फर्जीवाड़े के पुख्ता सुराग मिले, सीआईडी की टीम ने नामकुम स्थित आयोग के मुख्यालय में अचानक छापेमारी की। वहां से ओएमआर शीट, डिजिटल सबूत और चयन प्रक्रिया से जुड़ी कई गोपनीय फाइलें जब्त की गईं। इस मामले में आयोग के सचिव सुधीर गुप्ता से भी लंबी पूछताछ की जा चुकी है।
प्रश्नपत्र की छपाई और एजेंसी चयन में हुए घपले की जांच के दौरान वेबेल और आईसीएन जैसी कंपनियों के अधिकारियों के नाम भी सामने आए हैं। पुलिस अब तक इस मामले में 22 से अधिक आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है, जिनमें दो प्रिंटिंग एजेंसी कर्मी भी शामिल हैं।
फिलहाल सीआईडी लगभग 350 से अधिक अभ्यर्थियों और संदिग्धों से लगातार पूछताछ कर रही है। संदिग्धों के बैंक खातों और मोबाइल फोन की कॉल डिटेल खंगाली जा रही है। राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कई परीक्षाओं को रद्द कर दिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। आने वाले समय में इस जांच से कुछ और बड़े चेहरों का बेनकाब होना तय माना जा रहा है।
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