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JPSC, JSSC, Exam Reform Committee : अब तक आकार नहीं ले सकी जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा सुधार कमेटी

कप्तान तय, टीम गायब : 18 अगस्त को आईएएस अमिताभ कौशल को बनाया गया था अध्यक्ष

by Nikhil Kumar
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दो महीने में रिपोर्ट देने का तय किया गया था लक्ष्य, समय पर टास्क पूरा होना मुश्किल

परीक्षाओं को पारदर्शी, सुरक्षित व भरोसेमंद बनाने के लिए व्यवस्था में होगा बदलाव

परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली के खिलाफ विद्यार्थियों ने किया था आंदोलन

Ranchi : सरकार ने झारखंड पब्लिक सर्विस कमिशन (जेपीएससी) और झारखंड स्टाफ सिलेक्शन कमिशन (जेएसएससी) की प्रतियोगिता परीक्षाओं में सुधार के लिए दो महीने में रिपोर्ट मांग ली। लेकिन, 21 दिनों में कमेटी की पूरी टीम नहीं बना सकी है। उल्लेखनीय है कि 18 अगस्त को सरकार ने आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल को कमेटी का अध्यक्ष तो बना दिया, लेकिन उनके साथ काम करने वाले सदस्यों के नाम अब तक तय नहीं किए गए हैं यानी कप्तान मैदान में है, लेकिन टीम गायब है। ऐसे में परीक्षा सुधार की इस पूरी कवायद पर ही सवाल खड़े होने लगे हैं।

सरकार के फैसले के मुTagsताबिक, कमेटी को दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। लेकिन, तय समय-सीमा का एक बड़ा हिस्सा कमेटी के गठन में ही निकल गया। 18 अगस्त से अब तक काफी समय बीत चुका हैं। अगर गठन में और देरी हुई तो कमेटी के पास जेपीएससी और जेएसएससी की पूरी परीक्षा व्यवस्था का अध्ययन करने, विशेषज्ञों से राय लेने और ठोस सुधार का खाका तैयार करने के लिए कितना समय बचेगा, यह बड़ा सवाल है।

विवादों के बीच सरकार ने किया था बड़ा एलान

जेपीएससी और जेएसएससी की प्रतियोगिता परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और कदाचार के आरोपों को लेकर छात्रों के लगातार आंदोलन और आक्रोश के बाद सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार का भरोसा दिया था। इसी क्रम में 18 अगस्त को उच्चस्तरीय परीक्षा सुधार कमेटी बनाने का फैसला हुआ। दावा था कि कमेटी परीक्षा प्रणाली की खामियों का अध्ययन करेगी और भविष्य की परीक्षाओं को पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के लिए जरूरी बदलाव सुझाएगी। फैसले में अमिताभ कौशल को अध्यक्ष बनाने के साथ अन्य अधिकारियों और किसी प्रतिष्ठित संस्थान के निदेशक को सदस्य बनाने की बात कही गई थी। लेकिन, अध्यक्ष के अलावा बाकी नामों पर अब तक तस्वीर साफ नहीं है। कार्मिक विभाग की ओर से भी कमेटी के पूर्ण गठन को लेकर नई अधिसूचना जारी नहीं हुई है।

जांच चल रही, लेकिन सिस्टम सुधारने वाली कमेटी ही अधूरी

परीक्षाओं में अनियमितता और कदाचार से जुड़े मामलों की जांच सीआईडी और एसआईटी कर रही है। लेकिन, सरकार ने खुद यह माना कि सिर्फ पुराने मामलों की जांच से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। परीक्षा कराने की पूरी व्यवस्था में बदलाव जरूरी है। यही वजह है कि सुधार कमेटी को बेहद अहम माना जा रहा है। लेकिन, जिस कमेटी से परीक्षा व्यवस्था की खामियां दूर करने की उम्मीद है, उसका गठन ही अधूरा है। इससे सरकार की गंभीरता और उसकी समय-सीमा को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

प्रश्नपत्र से लेकर परिणाम तक होगी समीक्षा

कमेटी को परीक्षा संचालन से लेकर प्रश्नपत्र की सुरक्षा, परीक्षा एजेंसी की भूमिका, परीक्षा केंद्रों की निगरानी, तकनीकी व्यवस्था, कदाचार रोकने के उपाय और परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया तक का अध्ययन करना है। उसकी सिफारिशों के आधार पर जेपीएससी और जेएसएससी की भविष्य की प्रतियोगिता परीक्षाओं की व्यवस्था में बदलाव संभव है।
लेकिन, फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब कमेटी की पूरी टीम ही तैयार नहीं है तो परीक्षा सुधार की कवायद शुरू कब होगी। छात्रों के आंदोलन और परीक्षा विवादों के बीच सरकार ने जिस सुधार का भरोसा दिया था, उसकी पहली परीक्षा अब सरकार की अपनी कार्यशैली ले रही है।

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