रांची : ग्रामीण विकास विभाग झारखंड ने मनरेगा के तहत कार्यरत पांच जिलों के लोकपालों की सेवा समाप्त कर दी है। इस संबंध में विभाग ने आदेश जारी कर दिया है और संबंधित जिलों के उपायुक्तों को सूचित कर दिया है। गुमला, लोहरदगा, चतरा, सरायकेला-खरसावां और जामताड़ा में नियुक्त लोकपालों को अवधि विस्तार नहीं दिया गया है, जिससे इन जिलों में लोकपाल के पद फिलहाल रिक्त हो गए हैं। बता दें कि फरवरी 2026 में भी 14 जिले के लोकपाल की सेवा समाप्त की गई थी। ऐसे में 19 जिलों में अब लोकपाल नहीं है इन जिलों में मनरेगा योजना की निगरानी पूरी तरह से प्रभावित हो गईं है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार की गाइडलाइन के तहत लोकपाल की नियुक्ति दो वर्षों के लिए की जाती है, जिसके बाद एक-एक वर्ष के लिए अधिकतम दो बार विस्तार का प्रावधान है। झारखंड में वर्ष 2023 में नियुक्त पांच लोकपालों की दो वर्षीय कार्यावधि 31 अगस्त 2025 को पूरी हो चुकी थी। इसके बाद चयन समिति ने उनके कार्यों की समीक्षा की।
समीक्षा के बाद चयन समिति ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि किसी भी लोकपाल को आगे अवधि विस्तार नहीं दिया जाए। इसी निर्णय के आधार पर विभाग ने सभी पांचों लोकपालों को कार्यमुक्त करने का आदेश जारी कर दिया। जिन लोकपालों की सेवा समाप्त की गई है उनमें शहवान शेख (गुमला), इंदू तिवारी (लोहरदगा), संध्या प्रधान (चतरा), संतोष कुमार राय (सरायकेला-खरसावां) और संजय कुमार उपाध्याय (जामताड़ा) शामिल हैं।
लोकपाल मनरेगा से जुड़ी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर जिला, प्रखंड, पंचायत और ग्राम स्तर पर शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए नियुक्त किए जाते हैं। उनकी रिपोर्ट के आधार पर सरकार करवाई करती है।
इन जिलों में खाली है पद
बता दे फरवरी 2026 में ही देवघर, दुमका, धनबाद, बोकारो, गोड्डा, गढ़वा, लातेहार, गिरिडीह, कोडरमा, रामगढ़, खूंटी, पलामू, रांची और सिमडेगा जिले में कार्यरत लोकपाल की सेवा समाप्त कर दी गई थी।

