
रांची: झारखंड सरकार के खान विभाग ने राजस्व वसूली में एक नया रिकॉर्ड बनाया है। इस वित्तीय वर्ष के शुरुआती छह महीनों में ही सरकार ने खनन रॉयल्टी से ज्यादा कमाई सेस से कर ली है। 12 अक्तूबर तक जेएमबीएल सेस के जरिए कुल 6,224.17 करोड़ रुपये वसूले जा चुके हैं। वहीं, खनन रॉयल्टी से यह आंकड़ा 5,639.41 करोड़ रुपये रहा है। इस तरह कुल राजस्व 13,100.93 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
पोर्टल पर सख्ती, बिना सेस भुगतान नहीं मिल रहा चालान
केंद्र सरकार ने पिछले साल अगस्त में खनिज अधिनियम में संशोधन कर सेस हटाने का प्रावधान किया था। इसके बावजूद झारखंड सरकार ने इसे अपने यहां जारी रखा। सरकार के चालान पोर्टल जिम्स में ऐसा सिस्टम बनाया गया है कि बिना सेस चुकाए किसी भी कंपनी को चालान नहीं मिल रहा है। कंपनियों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वे पहले सेस का भुगतान करें। इसके चलते सरकारी खजाने में लगातार भारी रकम आ रही है।
सेस की बढ़ी हुई दरें बनीं बड़ी वजह
सरकार ने दिसंबर 2025 में ‘द झारखंड मिनरल बियरिंग लैंड सेस रूल-2024’ लागू किया था। इसके तहत खनिजों पर सेस की दरें काफी बढ़ा दी गई थीं।
कोयला की दर 250 रुपये से बढ़ाकर 450 रुपये प्रति टन की गई।लौह अयस्क 400 रुपये से बढ़ाकर 600 रुपये प्रति टन कर दी गई। नॉन-मेटालर्जिकल बॉक्साइट की दर 180 रुपये प्रति टन और मेटालर्जिकल ग्रेड पर लंदन मेटल एक्सचेंज का दो प्रतिशत तय किया गया।
अन्य खनिजों में चूना पत्थर (लाइमस्टोन), सोना, तांबा, सीसा और ग्रेफाइट पर भी सेस की दरें काफी बढ़ा दी गईं। इन बढ़ी हुई दरों के कारण इस साल सेस से मिलने वाली आय पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुनी होने की उम्मीद है। विभाग ने इस वित्तीय वर्ष के लिए 25 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कुल लक्ष्य रखा है।
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