
रांची : झारखंड के पुलिसकर्मियों और चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों के लिए चिकित्सा सहायता को लेकर अहम फैसला लिया गया है। पुलिस सहाय्य एवं कल्याण कोष तथा चतुर्थवर्गीय कर्मचारी कल्याण कोष से इलाज के लिए मिलने वाली आर्थिक सहायता राशि में बढ़ोतरी की गई है। नई व्यवस्था के तहत किडनी और लिवर प्रत्यारोपण जैसी गंभीर चिकित्सा स्थितियों में अधिकतम सात लाख रुपये तक की सहायता निर्धारित की गई है। वहीं, कैंसर के इलाज में कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के लिए दो लाख से पांच लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान किया गया है।
इस संबंध में अपराध अनुसंधान विभाग के पुलिस महानिरीक्षक की अध्यक्षता में 30 सितंबर को उच्चस्तरीय प्रबंध समिति की बैठक हुई थी। बैठक में विभिन्न बीमारियों और चिकित्सा प्रक्रियाओं के आधार पर सहायता राशि का नए सिरे से निर्धारण किया गया। समिति की बैठक का आधिकारिक विवरण अब जारी किया गया है। इसमें अलग-अलग बीमारियों के लिए न्यूनतम और अधिकतम सहायता राशि का ब्योरा दिया गया है।
झारखंड पुलिस चिकित्सा सहायता : किन बीमारियों के इलाज के लिए कितनी राशि?
नई सूची में गंभीर बीमारियों, शल्य चिकित्सा और अन्य उपचार प्रक्रियाओं को अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है। सहायता राशि बीमारी और उपचार की प्रकृति के अनुसार निर्धारित की गई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, प्रमुख चिकित्सा श्रेणियों में सहायता की राशि इस प्रकार है।
| बीमारी या उपचार | न्यूनतम सहायता | अधिकतम सहायता |
|---|---|---|
| कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी | ₹2 लाख | ₹5 लाख |
| महत्वपूर्ण अंगों की शल्य चिकित्सा | ₹2 लाख | ₹4 लाख |
| सामान्य अंगों की शल्य चिकित्सा | ₹50,000 | ₹1 लाख |
| किडनी प्रत्यारोपण | ₹1 लाख | ₹7 लाख |
| लिवर प्रत्यारोपण | ₹1 लाख | ₹7 लाख |
| डायलिसिस के साथ गुर्दे की विफलता | ₹50,000 | ₹2 लाख |
| गुर्दे की विफलता | ₹45,000 | ₹1 लाख |
| दोनों किडनी में पॉलीसिस्टिक रोग | ₹50,000 | ₹1 लाख |
| पथरी और अन्य संबंधित शल्य चिकित्सा | ₹20,000 | ₹50,000 |
| लिवर सिरोसिस | ₹30,000 | ₹1 लाख |
| पित्ताशय और अग्नाशय की शल्य चिकित्सा | ₹20,000 | ₹50,000 |
इन प्रावधानों के तहत गंभीर बीमारियों के उपचार में आर्थिक सहायता की सीमा तय की गई है। विशेष रूप से किडनी और लिवर प्रत्यारोपण के लिए सात लाख रुपये तक की अधिकतम राशि निर्धारित होना महत्वपूर्ण है। हालांकि, किसी कर्मचारी को वास्तविक रूप से कितनी सहायता मिलेगी, यह संबंधित नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तय होगा।
हृदय रोग के इलाज के लिए कितनी मिलेगी सहायता?
हृदय से जुड़ी गंभीर बीमारियों और उपचार प्रक्रियाओं को भी नई सूची में शामिल किया गया है। हार्ट सर्जरी, वाल्व सर्जरी, कोरोनरी बैलून प्रक्रिया और एंजियोप्लास्टी के लिए दो लाख से तीन लाख रुपये तक की सहायता निर्धारित की गई है।
पेसमेकर लगाने के लिए 60 हजार से 1.50 लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान है। इलाज किए गए मायोकार्डियल इंफार्क्शन यानी हृदयाघात के मामलों में 50 हजार से 1.50 लाख रुपये तक की राशि निर्धारित की गई है। रूमेटिक हृदय रोग और हृदय संबंधी अन्य चिकित्सा स्थितियों के लिए 30 हजार से 50 हजार रुपये तक की सहायता सूची में शामिल है।
इन प्रावधानों का उद्देश्य हृदय रोग से जुड़े उपचार खर्च के लिए निर्धारित सीमा के भीतर आर्थिक मदद उपलब्ध कराना है।
मस्तिष्क की सर्जरी और गंभीर बीमारियों के लिए सहायता राशि
मस्तिष्क से संबंधित बीमारियों और दुर्घटनाओं में होने वाली शल्य चिकित्सा के लिए भी अलग-अलग सहायता राशि तय की गई है। मस्तिष्क में ट्यूमर या गांठ निकालने की सर्जरी के लिए 50 हजार से एक लाख रुपये तक की सहायता निर्धारित है।
दुर्घटना के मामलों में मस्तिष्क की सर्जरी के लिए 20 हजार से दो लाख रुपये तक की राशि तय की गई है। मस्तिष्क की अन्य चिकित्सा स्थितियों के लिए 10 हजार से 25 हजार रुपये तक की सहायता का प्रावधान है। वहीं, मस्तिष्क में रक्त प्रवाह से जुड़ी गंभीर स्थिति सीवीए के लिए 50 हजार से दो लाख रुपये तक की सहायता निर्धारित की गई है।
फेफड़ों और सांस संबंधी बीमारियों के इलाज का प्रावधान
फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों के उपचार के लिए भी सहायता राशि की अलग-अलग सीमाएं तय की गई हैं। अस्पताल में भर्ती होने वाले निमोनिया के मामलों में 10 हजार से 50 हजार रुपये तक की सहायता निर्धारित है। ब्रोंकियल अस्थमा और सारकॉइडोसिस के लिए 10 हजार से 20 हजार रुपये तक की राशि का प्रावधान है।
दीर्घकालिक अवरोधक फेफड़ा रोग यानी सीओपीडी के मामलों में 20 हजार से 25 हजार रुपये तक की सहायता निर्धारित की गई है। इन श्रेणियों को शामिल करने से सांस और फेफड़ों से संबंधित बीमारियों के इलाज के लिए भी आर्थिक सहायता की सीमा स्पष्ट होती है।
पेट और आंखों की सर्जरी के लिए भी तय हुई राशि
पेट और अन्य अंगों से जुड़ी कई शल्य चिकित्सा प्रक्रियाओं को नई सूची में शामिल किया गया है। अपेंडिक्स, हर्निया, प्रोस्टेट की सर्जरी, अल्सर, गर्भाशय संबंधी सर्जरी, बवासीर और हाइड्रोसील के उपचार के लिए 20 हजार से 50 हजार रुपये तक की सहायता निर्धारित है।
आंखों की गंभीर बीमारियों में रेटिना अलग होने, कॉर्निया प्रत्यारोपण, ग्लूकोमा और विट्रियस सर्जरी जैसी प्रक्रियाओं के लिए 40 हजार से एक लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान है। आंख में चोट, बाहरी वस्तु निकालने और अन्य रोगों के लिए 15 हजार से 50 हजार रुपये तक की राशि तय की गई है।
सामान्य मोतियाबिंद के उपचार के लिए 35 हजार से 50 हजार रुपये तक की सहायता निर्धारित है। वहीं, जटिलताओं वाले मोतियाबिंद के मामलों में 50 हजार से एक लाख रुपये तक की राशि का प्रावधान किया गया है।
पुलिस सहाय्य एवं कल्याण कोष के फैसले से कर्मचारियों को क्या लाभ?
चिकित्सा सहायता राशि में संशोधन का लाभ झारखंड पुलिसकर्मियों और चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। गंभीर बीमारी, प्रत्यारोपण और बड़ी शल्य चिकित्सा के दौरान इलाज पर अधिक खर्च आता है। ऐसे में निर्धारित सहायता राशि कर्मचारियों को आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराने में मदद कर सकती है।
अपराध अनुसंधान विभाग के पुलिस महानिरीक्षक की अध्यक्षता वाली समिति ने बीमारियों और उपचार की श्रेणियों के अनुसार सहायता की सीमाएं तय की हैं। हालांकि, उपलब्ध विवरण में प्रत्येक कर्मचारी के लिए स्वीकृति की प्रक्रिया, पात्रता की विस्तृत शर्तें और आवेदन संबंधी समयसीमा का पूरा ब्योरा नहीं दिया गया है। इसलिए सहायता प्राप्त करने के लिए संबंधित कल्याण कोष के लागू नियमों और आधिकारिक निर्देशों के अनुसार प्रक्रिया पूरी करना आवश्यक होगा।
इन प्रावधानों के तहत गंभीर बीमारियों के उपचार में आर्थिक सहायता की सीमा तय की गई है। विशेष रूप से किडनी और लिवर प्रत्यारोपण के लिए सात लाख रुपये तक की अधिकतम राशि निर्धारित होना महत्वपूर्ण है। हालांकि, किसी कर्मचारी को वास्तविक रूप से कितनी सहायता मिलेगी, यह संबंधित नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तय होगा।

