Ranchi (Jharkhand) : झारखंड हाईकोर्ट ने जेएसएससी स्नातक स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (जेएसएससी-सीजीएल) 2024 के कथित पेपर लीक मामले में सीबीआई जांच की मांग करने वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने आयोग को परीक्षा परिणाम शीघ्र जारी करने और नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है।हालांकि कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए उन दस सफल अभ्यर्थियों के परिणाम पर रोक लगा दी है, जिन्होंने नेपाल में रहकर परीक्षा की तैयारी की थी और जिनके खिलाफ संदेह जताया गया था।
इन अभ्यर्थियों के मामले में अलग से विचार
अदालत ने स्पष्ट किया कि इन अभ्यर्थियों के मामले में अलग से विचार किया जाएगा। यह फैसला बुधवार (3 नवंबर 2025) को लंबी सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की डिवीजन बेंच ने सुनाया। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार और अधिवक्ता समीर रंजन ने दावा किया था कि 22 सितंबर 2024 को हुई परीक्षा से कई घंटे पहले ही प्रश्नपत्र लीक हो गया था। उन्होंने व्हाट्सएप चैट, कुछ अभ्यर्थियों द्वारा किए गए भुगतान के सबूत, नेपाल में कोचिंग कनेक्शन और संदिग्धों के बयान को आधार बनाया था।
जांच में प्रश्नपत्र लीक होने का ठो प्रमाण नहीं मिला : महाधिवक्ता का तर्क
दूसरी तरफ राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने तर्क दिया कि सीआईडी की गहन जांच और बाद में आईजी स्तर के अधिकारियों की नई एसआईटी से भी प्रश्नपत्र लीक होने का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला। केवल कुछ गेस पेपर मिलने को लीक का सबूत नहीं माना जा सकता।
अभ्यर्थियों के अधिवक्ताओं ने कहा…
वहीं सफल अभ्यर्थियों की ओर से पेश हुए अधिवक्ताओं ने कहा कि कुछ प्रश्नों का पिछले वर्षों में दोहराव हुआ था, जिसे पेपर लीक नहीं कहा जा सकता।अदालत ने सभी पक्षों के तथ्य और सबूतों का गहन परीक्षण करने के बाद सीबीआई जांच की मांग को निराधार मानते हुए याचिका खारिज कर दी। अब आयोग बाकी अभ्यर्थियों का परिणाम जारी कर 2023 की इस भर्ती प्रक्रिया को जल्द पूरा कर सकेगा, जिसमें विभिन्न विभागों के कुल 2025 पदों पर नियुक्तियां होनी हैं।यह परीक्षा 21 और 22 सितंबर 2024 को दो पालियों में राज्य भर में आयोजित की गई थी।
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