स्पेशल डेस्क : दिल्ली शराब मामले को लेकर जारी जांच के बीच अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) को राउज एवेन्यू कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अब उन्हें व्यक्तिगत तौर पर कोर्ट में पेश नहीं होना पड़ेगा। राउज एवेन्यू कोर्ट ने आपराधिक मानहानि मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को व्यक्तिगत पेशी से छूट दी है। साथ ही उन्हें 29 फरवरी को उनके सामने पेश होने का निर्देश दिया है।

दरअसल, सुनवाई के दौरान अरविंद केजरीवाल ने बजट का हवाला देते हुए पेशी से छूट मांगी थी, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया और मामले की सुनवाई 29 फरवरी तक के लिए टाल दी गई। बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में केजरीवाल के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि किसी के बारे में अपमानजनक सामग्री को रिट्वीट करना मानहानि के बराबर है।
अरविंद केजरीवाल के अच्छी-खासी संख्या में फॉलोअर्स हैं और वह वीडियो को रिट्वीट करने के नतीजों को बखूबी समझते हैं। अगर एक राज्य का मुख्यमंत्री किसी ट्वीट को बिना वेरिफाई किए रिट्वीट करता है, तो ये मानहानि वाले कंटेट को बढ़ावा देना ही है।
क्यों हुआ मानहानि का केस दर्ज
यूट्यूबर ध्रुव राठी के वीडियो को रिट्वीट करने के मामले में ही उन पर मानहानि का केस दर्ज हुआ था। कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को राहत तो दे दी, लेकिन 29 फरवरी को अदालत में होने का भी निर्देश दिया है। ऐसे में 29 फरवरी को इस केस की अगली सुनवाई होगी।
क्या था पूरा मामला (Arvind Kejriwal)
गौरतलब है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने यूट्यूबर ध्रुव राठी द्वारा बनाए गए वीडिया ‘बीजेपी: आईटी सेल पार्ट 2’ को रीट्वीट किया था। इसको लेकर ही उन पर मानहानि का केस किया गया था। इसके जवाब में अरविंद केजरीवाल ने कोर्ट में याचिका लगाकर केस को खारिज करने की मांग की थी लेकिन कोर्ट ने केजरीवाल की मांग खारिज कर दी थी।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को यूट्यूबर ध्रुव राठी द्वारा बनाए गए ‘बीजेपी आईटी सेल पार्ट 2’ शीर्षक वाले वीडियो को री-ट्वीट करने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया था।
न्यायमूर्ति ने कही ये बात
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने मामले में अरविंद केजरीवाल को तलब करने के निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा। अदालत ने कहा था कि केजरीवाल के एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर महत्वपूर्ण फॉलोअर्स हैं और वह वीडियो को रिट्वीट करने के नतीजों को समझते है। कोर्ट ने कहा अपमानजनक सामग्री को रिट्वीट करना मानहानि के समान है।
यह मामला विकास सांकृत्यायन उर्फ विकास पांडे द्वारा दायर किया गया था, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थक होने का दावा करता है और सोशल मीडिया पेज ‘आई सपोर्ट नरेंद्र मोदी’ का संस्थापक है।
READ ALSO: Health Benefits Of Ragi:रागी मधुमेह रोगियों के लिए है वरदान, आज ही करें डाइट में शामिल

