पॉलिटिकल डेस्क : वर्तमान संसदीय सत्र के दौरान केंद्र की मोदी सरकार वर्ष 2004 से 2014 तक के यूपीए (White Paper UPA) शासन के दौरान कथित आर्थिक कुप्रबंधन पर एक श्वेत पत्र पेश करने वाली है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की मानें तो श्वेत पत्र भारत की आर्थिक पीड़ा और अर्थव्यवस्था पर इसके हानिकारक प्रभावों के बारे में विस्तार से बताएगा।
साथ ही यह उस समय रचनात्मक कार्रवाई करने के फायदों पर भी चर्चा करेगा, जिसे अगर यूपीए शासन के दौरान किया गया होता तो इससे भारत की अर्थव्यवस्था काफी तेजी से आगे बढ़ती।
इस दिन हो सकता है पेश
माना जा रहा है कि यह श्वेत पत्र सदन में शुक्रवार (9 फरवरी) या फिर शनिवार (10 फरवरी) को पेश किया जा सकता है। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते हुए भी कांग्रेस और यूपीए सरकार पर जमकर निशाना साधा था। उन्होंने यूपीए 2 के शासनकाल में हुए भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के साथ ही कांग्रेस पार्टी की मंशा और विपक्षी दलों की नीयत पर भी सवाल उठाए थे।
क्या होगा मुद्दा
यूपीए सरकार के कार्यकाल के खिलाफ लाए जाने वाले श्वेत पत्र में आर्थिक कुप्रबंधन के अलावा यूपीए सरकार के दौरान उठाए जा सकने वाले सकारात्मक कदमों के असर के बारे में भी बात की जाएगी। श्वेत पत्र में खास तौर पर यूपीए शासनकाल में आर्थिक अनियमितताओं का असर देश की अर्थव्यवस्था पर किस तरह से पड़ा, इस पर भी चर्चा की जाएगी। माना जा रहा है कि सरकार और विपक्षी सांसदों के बीच इस मुद्दे पर जमकर बवाल हो सकता है।
निर्मला सीतारमण ने दी जानकारी
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि डॉ मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री रहने के दौरान यूपीए शासन में जो कुछ भी अनैतिक था उसे श्वेत पत्र में शामिल किया जाएगा। साथ ही उन संभावित लाभों को भी शामिल किया जाएगा जो उस समय सही निर्णयों से अर्थव्यवस्था को हो सकते थे। सीतारमण ने कहा कि हमने दस अद्भुत साल खो दिए। खानों से लेकर बैंकों तक, अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र में समस्याएं थीं।
उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले श्वेत पत्र नहीं निकाला, क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि लोगों का उस पर और संस्थानों पर से विश्वास कम हो। उन्होंने कहा, पीएम मोदी ने सबसे पहले अर्थव्यवस्था को संभाला, यही वजह है कि पहले श्वेत पत्र नहीं निकाला गया। पीएम कभी भी त्वरित बदलाव के पक्ष में नहीं हैं।
क्या होता है श्वेत पत्र और कैसे लाया जाता है सदन में (White Paper UPA)
श्वेत पत्र की शुरुआत 99 साल पहले सन 1922 में ब्रिटेन में हुई थी। यह किसी विषय के बारे में ज्ञात जानकारी या एक सर्वेक्षण/अध्ययन के परिणाम का सारांश होता है। एक श्वेत पत्र किसी भी विषय के बारे में हो सकता है, जिसमें उस विषय से संबंधित सभी पहलुओं का तथ्यवार वर्णन किया जाता है। संसद में ही नहीं, कंपनियों की ओर से भी श्वेत पत्र लाए जा सकते हैं। पूर्ववर्ती सरकारें भी कई बार श्वेत पत्र संसद में लेकर आई हैं।
सरकार की ओर से जारी श्वेत पत्र से क्या पता चलेगा?
केन्द्रीय वित्त मंत्री ने तब की और अब की अर्थव्यवस्था पर बात करते हुए कहा कि उन वर्षों के संकटों से पार पा लिया गया है और हमारी अर्थव्यवस्था सर्वांगीण विकास के साथ उच्च टिकाऊ विकास की राह पर बढ़ चली है। उन्होंने घोषणा की कि सरकार अर्थव्यवस्था पर सदन के पटल पर श्वेत पत्र पेश करेगी, ताकि ये पता चल सके कि वर्ष 2014 तक हम कहां थे और अब कहां हैं। उन्होंने कहा कि श्वेत पत्र का मकसद उन वर्षों के कुप्रबंधन से सबक सीखना है।
एक श्वेत पत्र में क्या-क्या होता है?
आर्थिक मामलों से जुड़े श्वेत पत्र में सरकार या किसी संस्था की कमियों, उससे होने वाले दुष्परिणामों और सुधार करने के लिए सुझावों जैसे विषय होते हैं। वहीं, उत्पादन/तकनीक से जुड़े श्वेत पत्र में उस उत्पादन/तकनीक से जुड़ी विभिन्न जानकारियां शामिल होती हैं। उदाहरण के तौर पर उस तकनीक की वजह से मिलने वाली सुविधाएं, उसका उपयोग करने का तरीका और आवश्यक वातावरण, अन्य तकनीक से यह कैसे भिन्न है, इसकी कीमत आदि जानकारियां शामिल होती हैं।

