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Jharkhand High Court Madhu Koda Fine: पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा पर हाई कोर्ट सख्त, लगाया चौथी बार जुर्माना, जानें क्या है मामला

इस घोटाले के सिलसिले में मधु कोड़ा करीब ढाई साल तक जेल में भी रहे थे, जिसके बाद उन्हें 30 जुलाई, 2013 को जमानत मिली थी।

by Reeta Rai Sagar
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Ranchi (Jharkhand) : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा को राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण परियोजना में कथित घोटाले से जुड़े एक मामले में झारखंड हाई कोर्ट से एक बार फिर झटका लगा है। शुक्रवार को हुई सुनवाई में हाई कोर्ट ने मधु कोड़ा के अधिवक्ता द्वारा निचली अदालत में आरोप गठन को चुनौती देने वाली याचिका पर लगातार चौथी बार समय मांगे जाने पर सख्त रुख अख्तियार करते हुए उन पर 8 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई आठ सप्ताह बाद निर्धारित की है। इस मामले में सीबीआई की ओर से अधिवक्ता प्रशांत पल्लव ने अदालत में अपना पक्ष रखा।

लगातार मांगी जा रही थी मोहलत, पहले भी लग चुका है जुर्माना

यह पहली बार नहीं है जब हाई कोर्ट ने मधु कोड़ा के अधिवक्ता द्वारा समय मांगे जाने पर जुर्माना लगाया है। इससे पहले भी तीन बार ऐसा हो चुका है। तीसरी बार समय मांगने पर अदालत ने मधु कोड़ा पर 4 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। वहीं, 17 जनवरी, 2025 को समय मांगे जाने पर 2 हजार रुपये और 13 दिसंबर, 2024 को 1 हजार रुपये का जुर्माना कोर्ट द्वारा लगाया गया था। अदालत ने जुर्माने की यह राशि झारखंड लीगल सर्विस अथॉरिटी (झालसा) में जमा करने का स्पष्ट निर्देश दिया है।

क्या है राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण घोटाला?

दरअसल, वर्ष 2006 में केंद्र सरकार द्वारा राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण परियोजना के तहत झारखंड को 467.76 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य झारखंड के छह जिलों के कुल 27,359 गांवों का विद्युतीकरण करना था। आरोप है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए इस परियोजना का ठेका हैदराबाद की ब्लैक लिस्टेड कंपनी आईवीआरसीएल को सौंप दिया था।

इस सौदे के एवज में कंपनी के डायरेक्टर डीके श्रीवास्तव से मुंबई में कथित तौर पर 11.40 करोड़ रुपये की घूस भी ली गई थी। इसके अलावा, कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए लातेहार, गढ़वा और पलामू सहित छह जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युतीकरण का ठेका भी इसी कंपनी को दे दिया गया। इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) कर रही है। इस घोटाले के सिलसिले में मधु कोड़ा करीब ढाई साल तक जेल में भी रहे थे, जिसके बाद उन्हें 30 जुलाई, 2013 को जमानत मिली थी। हाई कोर्ट द्वारा बार-बार जुर्माना लगाए जाने से इस मामले की सुनवाई में और विलंब होने की संभावना जताई जा रही है।

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